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Hindi Toppers Class- स्वर और व्यंजन का संपूर्ण निचोड़ | KTM-DO ट्रिक के साथ (Super TET & All Exams)

 



📚 विषय सूची: हिन्दी व्याकरण (स्वर एवं व्यंजन)

"नमस्कार दोस्तों! आज की इस विशेष क्लास में मैं, आफताब सर, आपको हिन्दी व्याकरण की नींव यानी 'स्वर एवं व्यंजन' के कॉन्सेप्ट को बिल्कुल बेसिक से एडवांस लेवल तक सिखाने जा रहा हूँ। यह क्लास आपकी Super TET 2026 की तैयारी में मील का पत्थर साबित होगी। नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से हम वर्णमाला के हर एक रहस्य को समझेंगे:"

  • 1 स्वर का वर्गीकरण: ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत स्वर
  • 2 व्यंजन का विज्ञान: स्पर्श, अंतस्थ और ऊष्म व्यंजन
  • 3 उच्चारण स्थान की मास्टर टेबल (KTM DO ट्रिक)
  • 4 विशेष: अयोगवाह, संयुक्त और द्विगुण व्यंजन

— Way2 Study Smart Official



1. व्याकरण की परिभाषा (Simple Definition) व्याकरण वह शास्त्र या विद्या है जो हमें किसी भाषा को शुद्ध रूप में बोलना, पढ़ना और लिखना सिखाती है। बिना व्याकरण के भाषा बिखरी हुई होती है। 
 उदाहरण के लिए: अशुद्ध: "आफताब सर पढ़ा रही है।" (यह सुनने में अजीब लग रहा है ना?)
 शुद्ध: "आफताब सर पढ़ा रहे हैं।" यह अंतर हमें व्याकरण ही समझाता है।

2. व्याकरण के मुख्य अंग (Parts of Grammar)

हिन्दी व्याकरण को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है:

  1. वर्ण विचार (Orthography): इसमें हम अक्षरों (अ, आ, क, ख) के बारे में सीखते हैं।

  2. शब्द विचार (Morphology): इसमें शब्दों की बनावट, उनके भेद (तत्सम, तद्भव, संज्ञा, सर्वनाम) के बारे में पढ़ते हैं।

  3. वाक्य विचार (Syntax): यहाँ हम सीखते हैं कि शब्दों को जोड़कर सही वाक्य कैसे बनाए जाते हैं।

  4. छंद/रूप विचार: इसमें कविता, रस और अलंकार की बारीकियां आती हैं।


3. व्याकरण क्यों ज़रूरी है? (Importance)

जैसे बिना नियम के ट्रैफिक जाम हो जाता है, वैसे ही बिना व्याकरण के भाषा का अर्थ बदल सकता है।

  • यह भाषा को अनुशासन में रखता है।

  • यह हमें सही और गलत का फर्क बताता है।

  • परीक्षाओं में (जैसे Super TET) शुद्ध वर्तनी और सही वाक्य विन्यास के ही सबसे ज्यादा नंबर मिलते हैं।

 

📚 हिन्दी व्याकरण: प्रथम अध्याय

विषय: वर्ण (Varn) - भाषा की सबसे छोटी इकाई

शिक्षक का नाम: आफताब सर (Aftab Sir)
लक्ष्य परीक्षा: Super TET 2026 Special
क्लास टॉपिक: वर्ण, वर्णमाला और उनके भेद
स्टडी सोर्स: Way2 Study Smart Official
वर्ण (Varn) क्या है?
जब हम बोलना शुरू करते हैं, तो हमारे मुँह से कुछ आवाज़ें निकलती हैं। इन्हीं आवाज़ों को जब हम कागज़ पर लिख देते हैं, तो उन्हें 'वर्ण' कहते हैं।

परिभाषा: भाषा की वह सबसे छोटी इकाई या आवाज़ जिसके और अधिक टुकड़े नहीं किए जा सकते, उसे वर्ण कहते हैं।

  • उदाहरण के लिए: अ, आ, इ, ई, क, ख... क्या आप 'अ' को और छोटा तोड़ सकते हैं? नहीं! इसलिए यह एक 'वर्ण' है।

वर्ण को 'अक्षर' क्यों कहते हैं?

 'अक्षर' का अर्थ होता है— "जिसका क्षर (विनाश) न हो"। यानी वह ध्वनि जो हमेशा बनी रहे। साधारण बोलचाल में हम वर्ण और अक्षर को एक ही मान लेते हैं।

 'ध्वनि' और 'वर्ण' में अंतर (Smart Point)

अक्सर छात्र इसमें गलती करते हैं:

  • ध्वनि (Sound): जब हम कुछ बोलते हैं और वह कानों को सुनाई दे, तो वह 'ध्वनि' है। (यह भाषा की मौखिक इकाई है)।

  • वर्ण (Letter): जब हम उसी बोली गई आवाज़ को लिख देते हैं, तो वह 'वर्ण' बन जाता है। (यह भाषा की लिखित इकाई है)।

🚀 भाषा की पूर्ण यात्रा: ध्वनि से ग्रंथ तक

ध्वनि अक्षर शब्द पद
🔽 (विकास का क्रम)
वाक्य अनुच्छेद अध्याय ग्रंथ 📚

"भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है और सबसे विशाल एवं पूर्ण रूप ग्रंथ है।"

वर्णमाला (Alphabet) क्या है? 

जैसे फूलों को एक धागे में पिरोकर सुंदर माला बनती है, वैसे ही वर्णों को जब एक खास और वैज्ञानिक क्रम में सजाया जाता है, तो उसे 'वर्णमाला' कहते हैं। परिभाषा: वर्णों के व्यवस्थित और क्रमबद्ध समूह को 'वर्णमाला' कहते हैं। विशेष बात: अगर हम वर्णों को कहीं भी लिख दें (जैसे- क, अ, म, झ), तो वह वर्णमाला नहीं कहलाएगी। उनका एक निश्चित क्रम (जैसे- अ, आ, इ...) होना ज़रूरी है।

हिन्दी वर्णमाला की खास बातें (Exam Points):

हिन्दी वर्णमाला बहुत ही वैज्ञानिक है।

  1. कुल वर्ण: मानक देवनागरी वर्णमाला में कुल 52 वर्ण होते हैं।

  2. दो मुख्य भाग: इसे दो हिस्सों में बाँटा गया है— स्वर और व्यंजन

  3. लिपि: हमारी वर्णमाला जिस ढंग से लिखी जाती है, उस लिपि का नाम 'देवनागरी' है।



 

📊 हिन्दी वर्णमाला का गणित (कुल 52 वर्ण)

वर्ण का प्रकार संख्या
मूल स्वर (Vowels) 11
अयोगवाह (अं, अः) 02
मूल व्यंजन (Consonants) 33
संयुक्त व्यंजन (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) 04
द्विगुण व्यंजन (ड़, ढ़) 02
कुल योग (Total) 52
स्वर
परिभाषा: वे वर्ण जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जाता है (अर्थात जिन्हें बोलने के लिए किसी दूसरे वर्ण की सहायता नहीं लेनी पड़ती), उन्हें स्वर कहते हैं।

 हिन्दी में स्वरों की कुल संख्या 11 है:
 अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

मात्रा/समय के आधार पर स्वर के भेद:

  1. ह्रस्व स्वर (Short Vowels): जिन्हें बोलने में सबसे कम समय (एक मात्रा) लगता है।

    • ये 4 हैं: अ, इ, उ, ऋ। (इन्हें मूल स्वर भी कहते हैं)।

  2. दीर्घ स्वर (Long Vowels): जिन्हें बोलने में ह्रस्व स्वर से दोगुना समय (दो मात्रा) लगता है।

    • ये 7 हैं: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

  3. प्लुत स्वर (Extra Long Vowels): जिन्हें बोलने में ह्रस्व से तीन गुना समय लगता है। इसका प्रयोग किसी को पुकारने या नाटक के संवादों में होता है।

    • जैसे: ओ३म्, राम!

🌟 स्वर के मुख्य भेद (Quick Revision)

  • 1. ह्रस्व स्वर (4): अ, इ, उ, ऋ (कम समय लगता है)
  • 2. दीर्घ स्वर (7): आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ (ज़्यादा समय लगता है)
  • 3. प्लुत स्वर: ओ३म् (पुकारने में प्रयोग)

कुल स्वरों की संख्या = 11


जीभ के प्रयोग के आधार पर स्वरों के भेद

हमारी जीभ मुँह के अंदर जिस हिस्से से स्वर को बोलने में मदद करती है, उस आधार पर स्वर 3 प्रकार के होते हैं:

  1. अग्र स्वर (Front Vowels): जिन्हें बोलने में जीभ का आगे का हिस्सा काम करता है।

    • ये हैं: इ, ई, ए, ऐ

  2. मध्य स्वर (Central Vowels): जिन्हें बोलने में जीभ का बीच का हिस्सा काम करता है।

    • यह सिर्फ एक है: (इसे याद रखना सबसे आसान है !)

  3. पश्च स्वर (Back Vowels): जिन्हें बोलने में जीभ का पिछला हिस्सा काम करता है।

    • ये हैं: आ, उ, ऊ, ओ, औ, ऑ

👅 जीभ के आधार पर स्वरों का जादू

अग्र स्वर
इ, ई, ए, ऐ
मध्य स्वर
पश्च स्वर
आ, उ, ऊ, ओ, औ


मुख-विवर (मुँह खुलने) के आधार पर स्वरों के भेद

स्वर को बोलते समय हमारा मुँह कितना खुलता है, उस आधार पर ये 4 प्रकार के होते हैं:

  1. विवृत (Open): जिन स्वरों के उच्चारण में मुँह पूरा खुलता है।

    • जैसे: (बोल कर देखिए, मुँह पूरा खुल जाता है!)

  2. अर्ध-विवृत (Half-Open): जिनमें मुँह आधा खुलता है।

    • जैसे: अ, ऐ, ओ, ऑ

  3. अर्ध-संवृत (Half-Close): जिनमें मुँह आधे से कम खुलता है।

    • जैसे: ए, ओ

  4. संवृत (Close): जिन स्वरों के उच्चारण में मुँह लगभग बंद रहता है।

    • जैसे: इ, ई, उ, ऊ

👄 मुख खुलने के आधार पर स्वर

विवृत (Open)
अर्ध-विवृत
अ, ऐ, औ
अर्ध-संवृत
ए, ओ
संवृत (Close)
इ, ई, उ, ऊ
अयोगवाह (Ayogwah): 
स्वर और व्यंजन के बीच की कड़ी, अयोगवाह वे वर्ण होते हैं जो न तो पूरी तरह 'स्वर' हैं और न ही 'व्यंजन'। इनका 'योग' किसी के साथ नहीं होता, फिर भी ये अर्थ 'वहन' (Carry) करते हैं, इसीलिए इन्हें 'अयोगवाह' कहते हैं। ये मुख्य रूप से 2 होते हैं: अनुस्वार (अं): इसका उच्चारण नाक से होता है। (जैसे: अं-गुर, कं-गन)। विसर्ग (अः): इसका उच्चारण 'ह' की तरह आधा होता है। (जैसे: प्रातः, अतः)।
🤔 अयोगवाह: (न स्वर, न व्यंजन)
अं

अनुस्वार

(जैसे: अंगूर, कंगन)
अः

विसर्ग

(जैसे: प्रातः, स्वतः)
*याद रखिये: इनकी गिनती स्वरों के साथ की जाती है, पर इनके गुण व्यंजनों जैसे होते हैं।*
1. अनुस्वार (ं) - 

"बिंदी" जब किसी वर्ण को बोलते समय हवा केवल नाक से निकलती है, तो वहाँ बिंदी (अनुस्वार) लगाई जाती है। उदाहरण: कंगन, मंदिर, पंख, चंचल। इसमें आवाज़ थोड़ी भारी होती है। 

 2. अनुनासिक (ँ) - 

"चंद्रबिंदी" जब किसी वर्ण को बोलते समय हवा नाक और मुँह दोनों से निकलती है, तो उसे चाँद (चंद्रबिंदी) कहते हैं। उदाहरण: चाँद, हँसना, गाँव, पाँव। इसकी आवाज़ नाक और मुँह दोनों के मेल से कोमल हो जाती है।

🎯 विशेष अंतर: अनुस्वार (ं) vs अनुनासिक (ँ)

चिह्न व्याकरणिक नाम हवा का निकास उदाहरण
अनुस्वार (बिंदी) केवल नाक से गन, पखा
अनुनासिक (चाँद) नाक + मुँह दोनों से ाँद, गाँ

🔥 ज़रूरी नियम: अगर शब्द के ऊपर पहले से कोई मात्रा (जैसे- ई, ए, ऐ, ओ, औ) लगी हो, तो वहाँ चंद्रबिंदी की जगह सिर्फ बिंदी का प्रयोग किया जाता है। जैसे: नहीं, मैं, गोंद।

व्यंजन
स्वर जहाँ स्वतंत्र होते हैं, वहीं व्यंजन थोड़े "सहारे" के शौकीन होते हैं।

परिभाषा: वे वर्ण जिनका उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। बिना स्वर के व्यंजन को बोलना असंभव है।

  • उदाहरण के लिए: जब हम 'क' बोलते हैं, तो उसमें 'अ' की ध्वनि छिपी होती है।

    • क = क् + अ

    • ख = ख् + अ

यदि किसी व्यंजन में स्वर न लगा हो, तो उसके नीचे एक तिरछी रेखा खींची जाती है जिसे 'हलन्त' (्) कहते हैं (जैसे- क्, ख्, ग्)।

व्यंजन के बारे में 3 महत्वपूर्ण बातें (Exam Points):

  1. मूल संख्या: हिन्दी वर्णमाला में मूल व्यंजनों की संख्या 33 है।

  2. कुल संख्या: यदि संयुक्त और द्विगुण व्यंजनों को भी जोड़ लिया जाए, तो इनकी संख्या 39 हो जाती है।

  3. उच्चारण: इन्हें बोलते समय फेफड़ों से निकलने वाली हवा मुँह के किसी न किसी हिस्से (कंठ, तालु, दाँत आदि) से टकराकर बाहर आती है।


 

💡 याद रखने वाली बात: व्यंजन हमेशा 'अ' स्वर की सहायता से बोले जाते हैं। बिना स्वर के व्यंजन अधूरा होता है जिसे 'हलन्त' लगाकर दिखाया जाता है।

व्यंजन के मुख्य प्रकार (Types of Consonants), व्यंजनों को मुख्य रूप से इन तीन श्रेणियों में रखा जाता है:

1. स्पर्श व्यंजन (Spersh Vyanjan):

इन्हें बोलते समय जीभ मुँह के किसी न किसी हिस्से (कंठ, तालु, मूर्धा, दाँत या होंठ) को 'स्पर्श' करती है।

  • संख्या: इनकी संख्या 25 है (क-वर्ग से म-वर्ग तक)।

  • उदाहरण: क, ख, ग, घ, च, छ, ज... आदि।

2. अंतस्थ व्यंजन (Antastha Vyanjan):

इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच का सा होता है।

  • संख्या: इनकी संख्या 4 है।

  • वर्ण: य, र, ल, व।

3. ऊष्म व्यंजन (Ushm Vyanjan):

इन्हें बोलते समय मुँह से हवा रगड़ खाकर निकलती है, जिससे हल्की 'गर्मी' (ऊष्मा) पैदा होती है।

  • संख्या: इनकी संख्या भी 4 है।

  • वर्ण: श, ष, स, ह।





 

📊 व्यंजन का वर्गीकरण

व्यंजन का नाम कुल संख्या वर्ण
1. स्पर्श व्यंजन 25 क से म तक
2. अंतस्थ व्यंजन 04 य, र, ल, व
3. ऊष्म व्यंजन 04 श, ष, स, ह

कुल मूल व्यंजन = 33

आफताब सर की स्पेशल क्लास - Way2 Study Smart Official
वर्ग व्यंजन समूह उच्चारण स्थान ट्रिक कोड
क-वर्ग क, ख, ग, घ, ङ कंठ (Gala) K
च-वर्ग च, छ, ज, झ, ञ तालु (Mouth Top) T
ट-वर्ग ट, ठ, ड, ढ, ण मूर्धा (Murdha) M
त-वर्ग त, थ, द, ध, न दंत (Teeth) D
प-वर्ग प, फ, ब, भ, म ओष्ठ (Lips) O
2. अंतस्थ व्यंजन (Antastha Vyanjan) 

'अंतस्थ' का अर्थ होता है 'बीच में स्थित'। ये वे व्यंजन हैं जिनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच का सा होता है। संख्या: ये 4 होते हैं। वर्ण: य, र, ल, व।

 3. ऊष्म व्यंजन (Ushm Vyanjan) 

इन्हें बोलते समय मुँह से हवा रगड़ खाकर निकलती है, जिससे एक तरह की गर्माहट (ऊष्मा) पैदा होती है। संख्या: ये भी 4 होते हैं। वर्ण: श, ष, स, ह।

🌟 अंतस्थ व्यंजन

य, र, ल, व

(संख्या: 04)

🔥 ऊष्म व्यंजन

श, ष, स, ह

(संख्या: 04)

4. संयुक्त व्यंजन (Joint Consonants)
 
जैसा कि नाम से पता चलता है, ये 'दो' अलग-अलग व्यंजनों के मेल से बनते हैं। इनकी संख्या 4 है।
✨ संयुक्त व्यंजन: मेल और निर्माण (संख्या: 04)
क्ष
क् + ष
(जैसे: क्षमा, रक्षा)
त्र
त् + र
(जैसे: त्रिशूल, पत्र)
ज्ञ
ज् + ञ
(जैसे: ज्ञान, यज्ञ)
श्र
श् + र
(जैसे: श्री, श्रमिक)
*ध्यान दें: इसमें पहला व्यंजन हमेशा आधा (हलन्त वाला) होता है।*




5. द्विगुण या उच्छिप्त व्यंजन (Binary Consonants) 

इन्हें 'उच्छिप्त' इसलिए कहते हैं क्योंकि इन्हें बोलते समय जीभ झटके से नीचे गिरती है।
🥁 द्विगुण / उच्छिप्त व्यंजन (संख्या: 02)

जैसे: स

जैसे: पना

🔥 स्मार्ट टिप: इन दो वर्णों से कभी भी किसी शब्द की शुरुआत नहीं होती। ये हमेशा शब्द के बीच में या अंत में आते हैं।
Complete Hindi Varnmala Chart: एक ही नज़र में याद करें अ से ज्ञ तक के सभी वर्ण

                                                               स्वर
अं अः (कुल 11 स्वर + अयोगवाह)

2. व्यंजन (Consonants)

अन्तःस्थ
ऊष्म
क्ष त्र ज्ञ श्र संयुक्त

नोट: ड़ और ढ़ को द्विगुण व्यंजन कहा जाता है।

📚 आज की क्लास का सारांश

प्यारे साथियों, आज हमने हिन्दी व्याकरण की नींव 'वर्ण और वर्णमाला' को पूरी गहराई से समझा। हमने सीखा कि कैसे 11 स्वर और 41 व्यंजनों को मिलाकर हमारी समृद्ध 52 वर्णों की वर्णमाला बनती है। "KTM-DO" जैसी ट्रिक्स की मदद से अब आपको उच्चारण स्थान याद रखने में कभी दिक्कत नहीं होगी।

✅ हमने क्या-क्या कवर किया:

  • वर्ण और वर्णमाला की परिभाषा
  • स्वरों का वर्गीकरण (जीभ और मुख के आधार पर)
  • स्पर्श, अंतस्थ और ऊष्म व्यंजन
  • संयुक्त और द्विगुण व्यंजनों की पहचान

📢 आपको यह क्लास कैसी लगी? कमेंट में जरूर बताएं!

अगली क्लास में हम 'शब्द विचार' पर चर्चा करेंगे। तब तक के लिए पढ़ते रहें और स्मार्ट बनते रहें!

— आपका अपना, आफताब सर

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