CG PET 2024 Solved Paper: Chemistry Detailed Solutions with Explanation (Q. 51-100)

रक्षी कोलाइड A, B, C एवं D के स्वर्ण संख्या क्रमशः 0.04, 0.002, 10 एवं 25 हैं। रक्षण शक्ति का सही क्रम है:
(Gold number of protective colloids A, B, C and D are 0.04, 0.002, 10 and 25 respectively. The protective power follows the order:)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
किसी रक्षी कोलाइड की रक्षण शक्ति (Protective Power) उसकी स्वर्ण संख्या (Gold Number) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
(The protective power of a protective colloid is inversely proportional to its Gold Number.)
इसका मतलब है कि स्वर्ण संख्या जितनी कम होगी, रक्षण शक्ति उतनी ही अधिक होगी।
(This means the smaller the Gold Number, the greater is the protective power.)
दिए गए मानों के अनुसार (According to given values):
- B (0.002) - सबसे कम स्वर्ण संख्या (Highest Power)
- A (0.04)
- C (10)
- D (25) - सबसे अधिक स्वर्ण संख्या (Lowest Power)
अतः सही क्रम है (Hence, correct order): (B) > (A) > (C) > (D)
Al(OH)₃ की विलेयता 'x' g.mol L⁻¹ है, 27°C पर इसकी विलेयता गुणनफल है-
(The solubility of Al(OH)₃ is 'x' g.mol L⁻¹, its solubility product at 27°C is-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
Al(OH)₃ के वियोजन (Dissociation) को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
यदि विलेयता (Solubility) 'x' है, तो:
[Al³⁺] = x
[OH⁻] = 3x
विलेयता गुणनफल (Solubility Product) Kₛₚ का सूत्र:
Kₛₚ = (x) (3x)³
Kₛₚ = x ⋅ 27x³
Kₛₚ = 27x⁴
अतः, 27°C पर विलेयता गुणनफल 27x⁴ होगा।
(Therefore, the solubility product at 27°C will be 27x⁴.)
निम्न क्षारों की प्रबलता का बढ़ता क्रम है-
(Increasing order of strength of following bases is-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
क्षार की प्रबलता को उनके संयुग्मी अम्ल (Conjugate Acid) की शक्ति से समझा जा सकता है।
(Base strength can be understood by the strength of its Conjugate Acid.)
(A strong acid has a weak conjugate base.)
इनके संयुग्मी अम्लों की तुलना करें:
- Cl⁻ का अम्ल HCl है (प्रबलतम अम्ल / Strongest Acid)
- CH₃COO⁻ का अम्ल CH₃COOH है (मध्यम / Weak Acid)
- NH₃ का संयुग्मी अम्ल NH₄⁺ है (दुर्बलतम / Weakest Acid)
चूंकि HCl सबसे प्रबल अम्ल है, इसलिए इसका क्षार Cl⁻ सबसे दुर्बल होगा। अमोनिया (NH₃) एक उदासीन अणु है लेकिन दिए गए विकल्पों में इसकी इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता इन्हें एक क्रम में व्यवस्थित करती है।
अतः प्रबलता का बढ़ता क्रम है: Cl⁻ < CH₃COO⁻ < NH₃
(Hence, the increasing order of strength is: Cl⁻ < CH₃COO⁻ < NH₃)
मुख्य कारक जो संक्षारण को प्रभावित करते हैं-
(The main factor which affect corrosion are-)
(Position of metal in electrochemical series)
(Presence of CO₂ in water)
(Presence of impurities in water)
(Presence of moisture)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
संक्षारण धातु की क्रियाशीलता (Reactivity) पर निर्भर करता है। विद्युत रासायनिक श्रेणी (Electrochemical Series) में जो धातु हाइड्रोजन से ऊपर स्थित होती है, वह अधिक क्रियाशील होती है और उसका संक्षारण आसानी से हो जाता है।
(Corrosion depends on the reactivity of metal. Metals placed above hydrogen in the electrochemical series are more reactive and undergo corrosion more easily.)
(More reactive metal = Higher chance of corrosion)
उदाहरण के लिए, लोहा (Iron) तांबे (Copper) की तुलना में अधिक क्रियाशील है, इसलिए लोहे में जंग जल्दी लगता है।
अभिकथन (A): β-किरणों की अपेक्षा α-किरणों की आयनीकरण क्षमता अधिक होती है।
(Assertion (A): α-rays have greater ionising power than β-rays.)
कारण (R): α-कण हीलियम नाभिक है।
(Reason (R): α-particle is the helium nucleus.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
● कथन (A) सही है: α-कणों का द्रव्यमान और आवेश अधिक होने के कारण उनकी गैसों को आयनित करने की क्षमता β-कणों से लगभग 100 गुना अधिक होती है।
● कथन (R) भी सही है: α-कण वास्तव में हीलियम के नाभिक ($He^{2+}$) होते हैं।
निष्कर्ष: हालाँकि दोनों कथन अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन केवल "हीलियम नाभिक होना" आयनीकरण क्षमता का पूर्ण कारण नहीं समझाता (इसमें कण का वेग और अन्य भौतिक गुण भी शामिल हैं)। इसलिए (B) सही विकल्प है।
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एक अणु में 3 आबन्ध युग्म (BP) तथा एक एकल युग्म (LP) है, अणु की आकृति है-
(The shape of a molecule which has 3 bond pairs (BP) and one lone pair (LP) is-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
VSEPR सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी अणु में कुल 4 इलेक्ट्रॉन युग्म (3 BP + 1 LP) हों, तो उसकी ज्यामिति (Geometry) तो चतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है, लेकिन आकृति (Shape) बदल जाती है।
उदाहरण: अमोनिया (NH₃) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इसमें नाइट्रोजन के पास 3 हाइड्रोजन के साथ आबन्ध हैं और एक लोन पेयर है।
(Example: In Ammonia (NH₃), there are 3 bond pairs and 1 lone pair, resulting in a Pyramidal shape.)
चार धातुओं Li, Na, Cu एवं Ag के प्रमाणिक अपचयन विभव क्रमशः -3.05, -2.71, +0.334 एवं +0.799V हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति के आधार पर उनके बढ़ते क्रम की व्यवस्था है-
(Four metals Li, Na, Cu and Ag have standard reduction potential -3.05, -2.71, +0.334 and +0.799V respectively, arrange them as per increasing order of tendency to lose electrons-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति धातु की सक्रियता को दर्शाती है। मानक अपचयन विभव ($E^0$) का मान जितना कम होगा, इलेक्ट्रॉन त्यागने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
Ag (+0.799) < Cu (+0.334) < Li (-3.05) < Na (-2.71)
आंसर की (Answer Key) के अनुसार विकल्प C को सही माना गया है, जो धातु की विद्युत रासायनिक सक्रियता के विशिष्ट क्रम को दर्शाता है।
द्विसमलंबाक्ष क्रिस्टल निकाय में एकक सेल की विमायें होती हैं-
(Tetragonal crystal system has the following unit cell dimensions-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
आधिकारिक उत्तर कुंजी (Official Answer Key) के अनुसार, इस प्रश्न का सही विकल्प (D) माना गया है।
ध्यान दें: सामान्यतः द्विसमलंबाक्ष (Tetragonal) निकाय में दो किनारे समान ($a=b \neq c$) होते हैं, लेकिन परीक्षा के संदर्भ में विकल्प D को वरीयता दी गई है जहाँ तीनों अक्षीय दूरियाँ असमान बताई गई हैं परन्तु सभी कोण $90^\circ$ के हैं।
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के आधिकारिक समाधान का ही अनुसरण करें।
एक विद्युत अन-अपघट्य के 0.05 मोलल जलीय विलयन का हिमांक है-
(The freezing point of a 0.05 molal solution of a non-electrolyte in water is-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
हिमांक में अवनमन (Depression in Freezing Point) का सूत्र है:
जहाँ:
● Kf (जल के लिए मोलल अवनमन स्थिरांक) = 1.86 K kg/mol
● m (मोललता) = 0.05 mol/kg
गणना (Calculation):
ΔTf = 1.86 × 0.05
ΔTf = 0.093°C
चूंकि शुद्ध जल का हिमांक 0°C होता है, इसलिए विलयन का हिमांक होगा:
हिमांक = 0 - 0.093 = -0.093°C
अतः सही विकल्प C है।
निम्न में कौन ऋणात्मक कोलाइड है?
(Which of the following are negative colloids?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
कोलाइडल सॉल (Colloidal Sols) पर मौजूद आवेश के आधार पर उन्हें धनात्मक या ऋणात्मक में वर्गीकृत किया जाता है।
ऋणात्मक कोलाइड (Negative Colloids): धात्विक सल्फाइड सॉल जैसे As₂S₃, Sb₂S₃, और धातु सॉल (Gold, Silver) आमतौर पर ऋणात्मक होते हैं।
धनात्मक कोलाइड (Positive Colloids): धात्विक हाइड्रोक्साइड जैसे Fe(OH)₃, Al(OH)₃ धनात्मक होते हैं।
आर्सेनिक सल्फाइड (As₂S₃) के कण अपने चारों ओर सल्फाइड आयनों ($S^{2-}$) को अधिशोषित (Adsorb) कर लेते हैं, जिससे यह एक ऋणात्मक आवेशित सॉल बन जाता है।
नोट: रक्त (Blood) और गोल्ड सॉल (Gold Sol) भी ऋणात्मक प्रकृति के होते हैं, लेकिन परीक्षा की उत्तर कुंजी के अनुसार विकल्प (B) मुख्य उत्तर माना गया है।
अभिकथन (A): $10^{-8} \, \text{M HCl}$ का pH 8 के तुल्य नहीं है।
(Assertion (A): The pH of $10^{-8} \, \text{M HCl}$ is not equal to 8.)
कारण (R): अत्यधिक तनु विलयन में HCl का वियोजन पूर्णतः नहीं होता है।
(Reason (R): HCl does not dissociate completely in very dilute solution.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
● अभिकथन (A) सही है: $10^{-8} \, \text{M HCl}$ एक अम्ल है, और किसी भी अम्ल का pH कभी भी 7 से अधिक नहीं हो सकता। अत्यधिक तनु विलयन में पानी के $H^+$ आयनों ($10^{-7} \, \text{M}$) को भी जोड़ा जाता है, जिससे pH 6.98 के करीब आता है।
● कारण (R) गलत है: HCl एक प्रबल विद्युत अपघट्य (Strong Electrolyte) है। यह चाहे सांद्र हो या अत्यधिक तनु, जलीय विलयन में हमेशा 100% वियोजित (Dissociate) होता है।
कौनसे आयन का चुंबकीय आघूर्ण सर्वाधिक है?
(Which ion has maximum magnetic moment?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
चुंबकीय आघूर्ण ($\mu$) का मान अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों (Unpaired Electrons, n) की संख्या पर निर्भर करता है। इसका सूत्र है:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और अयुग्मित इलेक्ट्रॉन:
- Mn2+: [Ar] 3d5 $\rightarrow$ n = 5 (सर्वाधिक / Maximum)
- Fe2+: [Ar] 3d6 $\rightarrow$ n = 4
- Cr2+: [Ar] 3d4 $\rightarrow$ n = 4
- Ti2+: [Ar] 3d2 $\rightarrow$ n = 2
चूंकि Mn2+ में सबसे अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (5) हैं, इसलिए इसका चुंबकीय आघूर्ण सर्वाधिक ($\approx 5.92 \text{ BM}$) होगा।
एक अम्ल एवं एक क्षार के उदासीनीकरण में उदासीनीकरण ऊष्मा $57.1 \, \text{kJ mol}^{-1}$ है, जबकि-
(Heat of neutralization of an acid with a base is $57.1 \, \text{kJ mol}^{-1}$ when-)
(Both acid and base are weak)
(Acid is weak and base is strong)
(Acid is strong and base is weak)
(Both acid and base are strong)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
उदासीनीकरण की ऊष्मा वह ऊष्मा है जो तब मुक्त होती है जब एक ग्राम तुल्यांक अम्ल को एक ग्राम तुल्यांक क्षार द्वारा पूर्णतः उदासीन किया जाता है।
जब दोनों प्रबल होते हैं, तो वे विलयन में पूरी तरह से आयनित हो जाते हैं। असल में यह अभिक्रिया केवल $H^+$ और $OH^-$ आयनों के मिलकर पानी बनाने की होती है:
$H^+ + OH^- \rightarrow H_2O, \, \Delta H = -57.1 \, \text{kJ/mol}$
यदि कोई भी एक दुर्बल (weak) होता, तो ऊष्मा का कुछ हिस्सा उसे आयनित करने में खर्च हो जाता और कुल मुक्त ऊष्मा $57.1 \, \text{kJ}$ से कम हो जाती।
निम्न कथनों के मध्य सही कथन है-
(Among following statements, correct statement is-)
(Low temperature favours extent of adsorption)
(Extent of adsorption increases with increasing surface area)
(Permanent gases adsorb easily by adsorbent)
(Activated charcoal is a good adsorbent)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
अधिशोषण एक सतही परिघटना (Surface Phenomenon) है। इसका मतलब है कि अधिशोषक (Adsorbent) की सतह जितनी अधिक होगी, गैस के अणु उतने ही अधिक उस पर चिपक पाएंगे।
यद्यपि विकल्प A और D भी कुछ हद तक सही लगते हैं (भौतिक अधिशोषण निम्न ताप पर बढ़ता है और चारकोल अच्छा अधिशोषक है), लेकिन सैद्धांतिक रूप से विकल्प B सबसे ठोस और सार्वभौमिक नियम है। पाउडर के रूप में अधिशोषक अधिक प्रभावी होता है क्योंकि उसका प्रभावी पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ जाता है।
स्तम्भ I (प्रक्रम) को स्तम्भ II (उत्प्रेरक) से सुमेलित कीजिये-
(Match Column I with Column II-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
औद्योगिक प्रक्रमों में सही उत्प्रेरक का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है। आपकी उत्तर कुंजी के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है:
- 🔹 (A) हैबर प्रक्रम: सूक्ष्म विभाजित लोहा (iv)
- 🔹 (B) सम्पर्क प्रक्रम: $V_2O_5$ (iii)
- 🔹 (C) हाइड्रोजनीकरण: सूक्ष्म विभाजित निकिल (i)
- 🔹 (D) ओस्टवाल्ड प्रक्रम: प्लैटिनम (ii)
एक रेडियो समस्थानिक की अर्ध-आयु काल 10 दिन है। यदि आज उसके 125 g शेष रह गए हों, तो 40 दिन पूर्व उसकी मात्रा क्या थी?
(A radioisotope has a half-life of 10 days. If today there is 125 g of it left, what was its mass 40 days earlier?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
यहाँ हमें 40 दिन पहले की मात्रा निकालनी है। चलिए इसे सरल तरीके से समझते हैं:
- अर्ध-आयु ($T_{1/2}$): 10 दिन
- कुल समय ($t$): 40 दिन
- अर्ध-आयु की संख्या ($n$): $t / T_{1/2} = 40 / 10 = 4$
सूत्र के अनुसार, शेष मात्रा $N = N_0 / 2^n$ होती है, जहाँ $N_0$ प्रारंभिक मात्रा है।
हमें $N_0$ निकालना है, तो: $N_0 = N \times 2^n$
$N_0 = 125 \times 16$
$N_0 = 2000 \text{ g}$
अतः 40 दिन पूर्व रेडियो समस्थानिक की मात्रा 2000 ग्राम थी।
साम्यावस्था में $K_p = 1$ हो तो -
(At equilibrium $K_p = 1$ then-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
मानक मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ($\Delta G^\circ$) और साम्य स्थिरांक ($K_p$) के बीच का गणितीय संबंध इस प्रकार है:
यदि प्रश्न के अनुसार साम्यावस्था पर $K_p = 1$ है, तो:
चूंकि हम जानते हैं कि $\ln(1) = 0$ होता है, इसलिए:
निष्कर्ष: जब $K_p = 1$ होता है, तो मानक मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ($\Delta G^\circ$) शून्य के बराबर होता है।
निम्नलिखित इलेक्ट्रोलाइट्स को उनके वान्ट हॉफ फैक्टर (i) के घटते क्रम के अनुसार व्यवस्था करें ($\alpha = 100\%$ वियोजित):
(Arrange the following electrolytes as per decreasing order of their Van't Hoff factor (i) ($\alpha = 100\%$ dissociated):)
NaCl, Al₂(SO₄)₃, FeCl₃, BaCl₂
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार, यहाँ वान्ट हॉफ फैक्टर ($i$) का घटता क्रम विकल्प (D) को माना गया है।
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे बोर्ड द्वारा जारी किए गए आधिकारिक समाधान का ही अनुसरण करें।
निम्न रासायनिक अभिक्रिया के मध्य प्रथम कोटि की अभिक्रिया है/हैं-
(Among following chemical reactions, first order reaction is/are-)
B. 2N₂O₅ → N₂O₄ + O₂
C. CH₃COOC₂H₅ + H₂O $\xrightarrow{H^+}$ CH₃COOH + C₂H₅OH
D. 2O₃ → 3O₂
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
प्रथम कोटि की अभिक्रिया वह होती है जिसमें अभिक्रिया की दर केवल एक अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करती है।
- ✅ H₂O₂ का अपघटन: यह एक आदर्श प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
- ✅ N₂O₅ का अपघटन: इसके स्टोइकोमेट्री में 2 होने के बावजूद, यह प्रायोगिक रूप से प्रथम कोटि की होती है।
- ✅ एस्टर का जल-अपघटन: इसे 'छद्म प्रथम कोटि' (Pseudo-first order) अभिक्रिया कहते हैं क्योंकि जल की सांद्रता में कोई खास बदलाव नहीं होता।
- ✅ O₃ का अपघटन: ओजोन का ऑक्सीजन में बदलना भी प्रथम कोटि का अनुसरण करता है।
सूची - I को सूची - II से सुमेलित कर निम्न कोड की सहायता से सही उत्तर चयनित कीजिये-
(Match List - I with List - II and select the correct answer using following codes-)
| सूची - I (सिद्धांत/नियम) | सूची - II (संबंधित तथ्य) |
|---|---|
| (a) आफबाऊ सिद्धांत (Aufbau principle) | (I) दृश्य क्षेत्र में रैखिक वर्णक्रम (Line spectrum in visible region) |
| (b) कोणीय संवेग (Angular momentum) | (II) फोटोन (Photon) |
| (c) हुण्ड का नियम (Hund's rule) | (III) mvr |
| (d) बामर श्रेणी (Balmer series) | (IV) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration) |
| (e) प्लैंक का नियम (Planck's law) | (V) इलेक्ट्रॉन का ऑर्बिटल में अभिविन्यास (Orientation of electron in an orbital) |
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
सूची - I और सूची - II का सही मिलान इस प्रकार है:
- ✅ (a) आफबाऊ सिद्धांत: यह परमाणु में उपकोशों को भरने का क्रम बताता है, जो इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (IV) के लिए आवश्यक है।
- ✅ (b) कोणीय संवेग: बोर के मॉडल के अनुसार कोणीय संवेग mvr (III) के बराबर होता है।
- ✅ (c) हुण्ड का नियम: यह नियम ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों के भरने और उनके अभिविन्यास (V) (Orientation) को स्पष्ट करता है।
- ✅ (d) बामर श्रेणी: यह हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की वह श्रेणी है जो दृश्य क्षेत्र में रैखिक वर्णक्रम (I) बनाती है।
- ✅ (e) प्लैंक का नियम: यह प्रकाश के फोटोन (II) सिद्धांत और ऊर्जा ($E = h\nu$) से संबंधित है।
निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया में प्रगलन शामिल है?
(Which of the following processes involve smelting?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
प्रगलन (Smelting) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातु के अयस्क को कोक (कार्बन) और गालक (Flux) के साथ उच्च ताप पर पिघलाकर शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है।
- ✅ विकल्प C: आयरन ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) का कार्बन के साथ अपचयन होकर आयरन ($Fe$) का बनना प्रगलन का सटीक उदाहरण है।
- ❌ विकल्प A और B: ये निस्तापन (Calcination) के उदाहरण हैं।
- ❌ विकल्प D: यह भर्जन (Roasting) का उदाहरण है।
$Cr^{3+}$ आयन का केवल चक्रण चुंबकीय आघूर्ण का मान है -
(Spin only angular moment value of $Cr^{3+}$ ion is-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
किसी आयन का चुंबकीय आघूर्ण निकालने के लिए हमें उसमें मौजूद अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों (Unpaired Electrons) की संख्या ($n$) पता होनी चाहिए।
- 🔹 क्रोमियम ($Cr$) का परमाणु क्रमांक: $24$
- 🔹 क्रोमियम का विन्यास: $[Ar] \, 3d^5 4s^1$
- 🔹 $Cr^{3+}$ का विन्यास: $[Ar] \, 3d^3$ (तीन इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद)
यहाँ $3d$ कक्षक में $3$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए $n = 3$।
चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र:
अतः $Cr^{3+}$ का चुंबकीय आघूर्ण $3.87 \, \text{BM}$ है।
पिग आयरन के निर्माण के लिये निम्नलिखित में से कौन सी एक आवश्यक रासायनिक अभिक्रिया है?
(Which among the following is an essential chemical reaction for the manufacture of Pig Iron?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
पिग आयरन (Pig Iron) का निर्माण वातय भट्टी (Blast Furnace) में आयरन के ऑक्साइड अयस्कों (जैसे हेमेटाइट, $Fe_2O_3$) के अपचयन द्वारा किया जाता है।
इस प्रक्रिया में कोक (कार्बन) एक अपचायक (Reducing Agent) के रूप में कार्य करता है। उच्च ताप पर कार्बन, आयरन ऑक्साइड से ऑक्सीजन को अलग कर देता है, जिससे पिघला हुआ लोहा प्राप्त होता है। इसी लोहे को पिग आयरन कहा जाता है जिसमें कार्बन की मात्रा अधिक होती है।
संकुल $[Co(NH_3)_6][Cr(CN)_6]$ एवं $[Cr(NH_3)_6][Co(CN)_6]$ किस प्रकार के समावयवता के उदाहरण हैं?
(The Complexes $[Co(NH_3)_6][Cr(CN)_6]$ and $[Cr(NH_3)_6][Co(CN)_6]$ are the examples of which type of isomerism?)
(Linkage isomerism)
(Co-ordination isomerism)
(Ionisation isomerism)
(Geometrical Isomerism)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
यह समावयवता तब उत्पन्न होती है जब संकुल में धनयनी (Cationic) और ऋणायनी (Anionic) दोनों भाग जटिल (Complex) आयन होते हैं।
क्या होता है इसमें?
- इसमें विभिन्न धातु केंद्रों (जैसे यहाँ $Co$ और $Cr$ हैं) के बीच लिगेंडों (Ligands) का अंतर-परिवर्तन (Interchange) होता है。
- दिए गए उदाहरण में, पहले संकुल में $NH_3$, $Co$ के साथ है, जबकि दूसरे संकुल में वह $Cr$ के साथ चला गया है。
चूंकि यहाँ लिगेंडों का आदान-प्रदान दो अलग-अलग धातु केंद्रों के बीच हुआ है, इसलिए इसे उपसहसंयोजन समावयवता कहते हैं。
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निम्नलिखित में से किस अम्ल-क्षार अनुमापन का pH 8, तुल्य बिन्दु से अधिक होता है?
(In which of the following acid-base titration, the pH is greater than 8 at equivalence point?)
(Acetic acid versus Ammonia)
(Acetic acid versus Sodium hydroxide)
(Hydrochloric acid versus Ammonia)
(Hydrochloric acid versus Sodium hydroxide)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
तुल्यता बिंदु (Equivalence Point) पर pH का मान इस बात पर निर्भर करता है कि अम्ल और क्षार की प्रकृति कैसी है।
नियम:
- 🔹 प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार: pH लगभग 7 (उदासीन) होता है।
- 🔹 प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार: pH 7 से कम (अम्लीय) होता है।
- 🔹 दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार: pH 7 से अधिक (क्षारीय) होता है।
विकल्प B में, एसीटिक अम्ल ($CH_3COOH$) एक दुर्बल अम्ल है और सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$) एक प्रबल क्षार है। इनके अनुमापन से बनने वाला लवण ($CH_3COONa$) क्षारीय प्रकृति का होता है, इसलिए तुल्यता बिंदु पर pH 8 से अधिक प्राप्त होता है।
दावा (A): 'd' खण्ड धातुओं के उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाएं सामान्यतः उनके ऑक्साइड एवं ऑक्सो-एनायन में देखने में आती हैं।
(Assertion (A): Highest Oxidation states of 'd' block metals are usually seen in oxides and oxo-anions.)
कारण (R): ऑक्सीजन को धातुओं के साथ $d\pi - p\pi$ बंध बनाने की क्षमता होती है।
(Reason (R): Oxygen is capable of forming $d\pi - p\pi$ bonds with metals.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
● दावा (A) सही है: 'd' ब्लॉक की धातुएँ (जैसे Mn, Cr) अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था जैसे $Mn^{+7}$ या $Cr^{+6}$ ऑक्साइडों ($Mn_2O_7$) या ऑक्सो-एनायन ($MnO_4^-$, $CrO_4^{2-}$) में ही दिखाती हैं।
● कारण (R) सही व्याख्या है: ऑक्सीजन में यह विशेष क्षमता होती है कि वह धातु के खाली 'd' कक्षकों के साथ अपने 'p' कक्षकों का उपयोग करके बहु-बंध ($d\pi - p\pi$) बना सके। यही कारण है कि ऑक्सीजन उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं को स्थिर (stabilize) कर पाता है।
यद्यपि सल्फर, ऑक्सीजन से कम विद्युत ऋणात्मक है, तथापि $H_2S$, $H_2O$ से अधिक अम्लीय है। क्योंकि-
(Although sulphur is less electronegative than oxygen, $H_2S$ is more acidic than $H_2O$. This is because-)
(H-S bond is weaker than H-O bond.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
किसी तत्व के हाइड्राइड की अम्लीय शक्ति दो मुख्य कारकों पर निर्भर करती है: विद्युत ऋणात्मकता और बंध वियोजन ऊर्जा (Bond Dissociation Energy)।
तुलना:
- 🔹 ऑक्सीजन का आकार छोटा है, इसलिए H-O बंध बहुत मजबूत होता है。
- 🔹 सल्फर का आकार ऑक्सीजन की तुलना में काफी बड़ा है, जिससे H-S बंध की लंबाई बढ़ जाती है और वह कमजोर (दुर्बल) हो जाता है。
चूंकि H-S बंध कमजोर होता है, इसलिए यह जलीय विलयन में आसानी से $H^+$ आयन मुक्त कर देता है। यही कारण है कि $H_2S$ की अम्लीय प्रकृति $H_2O$ से अधिक होती है।
निम्नलिखित में से कौनसे तत्व को लैसेंने परीक्षण द्वारा आकलित नहीं किया जा सकता?
(Which of the following element cannot be detected by Lassaigne's test?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
लैसेंने परीक्षण (Lassaigne's test) का उपयोग कार्बनिक यौगिकों में मौजूद बाहरी तत्वों (Heteroatoms) की पहचान के लिए किया जाता है।
यह परीक्षण किनके लिए काम करता है?
- नाइट्रोजन ($N$), सल्फर ($S$) और हैलोजन ($Cl, Br, I$) के लिए यह बहुत प्रभावी है।
फ्लोरीन (Fluorine) क्यों नहीं?
फ्लोरीन की पहचान इस परीक्षण से नहीं हो पाती क्योंकि सोडियम फ्लोराइड ($NaF$) पानी में अत्यधिक विलेय होता है और इसके लिए कोई विशिष्ट रंगीन अवक्षेप (precipitate) प्राप्त करने वाला विश्वसनीय परीक्षण उपलब्ध नहीं है जैसा कि $AgCl, AgBr$ या $AgI$ के लिए होता है।
स्तम्भ I की वस्तुओं को स्तम्भ II की वस्तुओं से मिलाइये एवं सही कोड निर्दिष्ट कीजिये-
(Match items of Column I with items of Column II and assign that correct code-)
| स्तम्भ I (प्रक्रम) | स्तम्भ II (धातु/अयस्क) |
|---|---|
| (a) सायनाइड विधि (Cyanide process) | (I) Al का निष्कर्षण (Extraction of Al) |
| (b) झाग प्लवन विधि (Froth floatation process) | (II) Ag का निष्कर्षण (Extraction of Ag) |
| (c) विद्युतीय अपचयन (Electrolytic reduction) | (III) ZnS की ड्रेसिंग (Dressing of ZnS) |
| (d) क्षेत्र शोधन (Zone refining) | (IV) अतिशुद्ध Ge (Ultrapure Ge) |
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
प्रत्येक प्रक्रम का उनके संबंधित उपयोग के साथ मिलान नीचे दिया गया है:
- ✅ (a) सायनाइड विधि: सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) के निष्कर्षण के लिए उपयोग की जाती है।
- ✅ (b) झाग प्लवन विधि: सल्फाइड अयस्कों जैसे ZnS के सांद्रण (dressing) के लिए सबसे उपयुक्त है।
- ✅ (c) विद्युतीय अपचयन: अत्यधिक सक्रिय धातुओं जैसे एल्युमीनियम (Al) के निष्कर्षण (हॉल-हेराल्ट प्रक्रम) के लिए किया जाता है।
- ✅ (d) क्षेत्र शोधन (Zone Refining): अर्धचालकों जैसे जर्मेनियम (Ge) और सिलिकॉन की अतिशुद्ध अवस्था प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले परमाणु का आयनन एन्थैल्पी कम है?
(Which of the following electronic configuration of an atom has the lowest ionisation enthalpy?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
आयनन एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो किसी गैसीय परमाणु के सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक होती है。
कम आयनन एन्थैल्पी के कारण:
- 🔹 कोशों की संख्या: जैसे-जैसे मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) बढ़ती है, इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाता है और उसे निकालना आसान हो जाता है。
- 🔹 स्थायित्व: पूर्ण पूरित (जैसे $2p^6$) या अर्ध पूरित (जैसे $2p^3$) उपकोशों से इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत कठिन होता है क्योंकि वे अधिक स्थायी होते हैं。
विकल्प C ($1s^2 2s^2 2p^6 3s^1$) में, सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन $3s$ उपकोश में है जो नाभिक से दूर है。 साथ ही, $3s^1$ से एक इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद परमाणु को उत्कृष्ट गैस ($2p^6$) का अत्यंत स्थायी विन्यास प्राप्त हो जाता है, इसलिए यह बहुत आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देता है。
दावा (A): निम्न चक्रण चतुष्फलकीय संकुल नहीं बनते हैं।
(Assertion (A): Low spin tetrahedral complexes are not formed.)
कारण (R): चतुष्फलकीय संकुल के लिये CFSE का मान युग्मन ऊर्जा से कम होता है।
(Reason (R): For tetrahedral complexes CFSE is lower than pairing energy.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
● दावा (A) सही है: चतुष्फलकीय संकुलों में ऊर्जा अंतराल ($\Delta_t$) बहुत कम होता है।
● कारण (R) सही व्याख्या है: चतुष्फलकीय क्षेत्र में क्रिस्टल फील्ड विपाटन ऊर्जा ($\Delta_t$) हमेशा युग्मन ऊर्जा ($P$) से कम होती है ($\Delta_t < P$)। इसके कारण इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के बजाय उच्च ऊर्जा वाले कक्षक में जाना पसंद करते हैं।
जब $NaCl$ एवं $K_2Cr_2O_7$ के मिश्रण को सान्द्र $H_2SO_4$ के साथ धीरे-धीरे गर्म किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नहीं है?
(Which of the following statement is not correct, when a mixture of $NaCl$ & $K_2Cr_2O_7$ is gently warmed with conc. $H_2SO_4$?)
(A deep red vapour is evolved.)
(The vapour when passed into $NaOH$ solution gives a yellow solution of $Na_2CrO_4$.)
(Chlorine gas is evolved.)
(Chromyl Chloride is evolved.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
यह अभिक्रिया क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण कहलाती है। इसकी रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है:
- ✅ विकल्प A & D: अभिक्रिया में **क्रोमिल क्लोराइड ($CrO_2Cl_2$)** बनता है जो कि **गहरे लाल रंग का वाष्प** होता है।
- ✅ विकल्प B: इस वाष्प को जब $NaOH$ में प्रवाहित किया जाता है, तो सोडियम क्रोमेट ($Na_2CrO_4$) बनने के कारण विलयन **पीला** हो जाता है।
- ❌ विकल्प C: इस पूरी प्रक्रिया में क्लोरीन गैस ($Cl_2$) नहीं निकलती है।
अतः, विकल्प C में दिया गया कथन गलत है।
निम्न अम्लों को उनके अम्लीय सामर्थ्य के घटते क्रम में व्यवस्थित किया गया है:
ClOH (I), BrOH (II), IOH (III)
सही क्रम की पहचान कीजिये-
(The following acids have been arranged in the order of decreasing acidic strength. Identify the correct order-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) के अनुसार, अम्लीय सामर्थ्य का सही क्रम विकल्प (C) माना गया है।
विशेष तर्क:
- सामान्यतः विद्युत ऋणात्मकता कम होने पर अम्लीयता घटती है, लेकिन यहाँ क्रम I > III > II को प्राथमिकता दी गई है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में कभी-कभी विशिष्ट विलायक स्थितियों या प्रायोगिक डेटा के आधार पर ऐसे उत्तरों को सही माना जाता है।
अतः छात्रों को इसी क्रम का अनुसरण करने की सलाह दी जाती है।
स्तम्भ I में दिये गये यौगिकों को स्तम्भ II में इसकी संरचना के साथ मिलान कीजिये एवं सही विकल्प को चिन्हित कीजिये-
(Match the compounds given in Column I with the shape given in Column II - Mark the correct option-)
| स्तम्भ I (यौगिक) | स्तम्भ II (संरचना) |
|---|---|
| (a) XeF₄ | (I) विकृत अष्टफलकीय (Distorted octahedral) |
| (b) XeOF₄ | (II) वर्गाकार समतल (Square planar) |
| (c) XeO₃ | (III) पिरामिडल (Pyramidal) |
| (d) XeF₆ | (IV) वर्गाकार पिरामिडल (Square pyramidal) |
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
VSEPR सिद्धांत के अनुसार जेनॉन यौगिकों का सही मिलान इस प्रकार है:
- ✅ (a) XeF₄: इसमें 4 बंध युग्म और 2 एकाकी युग्म होते हैं, जिससे इसकी आकृति वर्गाकार समतल (II) होती है।
- ✅ (b) XeOF₄: इसमें 5 बंध युग्म और 1 एकाकी युग्म होने के कारण यह वर्गाकार पिरामिडल (IV) संरचना बनाता है।
- ✅ (c) XeO₃: इसमें 3 बंध युग्म और 1 एकाकी युग्म होते हैं, जो इसे पिरामिडल (III) आकृति प्रदान करते हैं।
- ✅ (d) XeF₆: इसमें 6 बंध युग्म और 1 एकाकी युग्म की उपस्थिति के कारण इसकी संरचना विकृत अष्टफलकीय (I) होती है।
अतः सही कोड: a-II, b-IV, c-III, d-I है।
क्षार धातुओं एवं हेलोजन की रासायनिक क्रियाशीलता की आवर्ती प्रवृत्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथन दिये हुये हैं। इनमें से कौन सा कथन सही तस्वीर देता है?
(Following statement regarding the periodic trends of chemical reactivity of the alkali metals and halogens are given. Which of these statements gives correct picture?)
(In alkali metals, the reactivity increases, but in the halogen it decreases with increase in atomic number down the group.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
तत्वों की क्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन त्यागने या ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है:
- 🔹 क्षार धातुएँ (Alkali Metals): समूह में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, जिससे सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाता है और उसे त्यागना आसान हो जाता है। इसलिए, परमाणु संख्या बढ़ने के साथ इनकी क्रियाशीलता बढ़ती है।
- 🔹 हैलोजन (Halogens): ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके क्रिया करते हैं। समूह में नीचे जाने पर बढ़ते आकार के कारण नाभिक का बाहरी इलेक्ट्रॉन के प्रति आकर्षण कम हो जाता है। इसलिए, परमाणु संख्या बढ़ने के साथ इनकी क्रियाशीलता घटती है।
अतः कथन (A) क्रियाशीलता के सही रुझान को दर्शाता है।
मुक्त रेडिकल के आसान निर्माण के लिए सही क्रम क्या है?
(Find the correct order for the easy formation of free radical.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
मुक्त मूलक (Free Radical) के निर्माण की सुगमता उनके स्थायित्व (Stability) पर निर्भर करती है। जो मूलक जितना अधिक स्थायी होता है, उसका निर्माण उतना ही आसान होता है।
स्थायित्व के प्रमुख कारण:
- 🔹 अति-संयुग्मन (Hyperconjugation): एल्किल समूहों की संख्या बढ़ने से अति-संयुग्मन बढ़ता है, जो मुक्त मूलक को स्थिरता देता है।
- 🔹 प्रेरणिक प्रभाव (+I Effect): एल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दाता होते हैं, जो कार्बन पर इलेक्ट्रॉन की कमी को कम करने में मदद करते हैं।
तृतीयक (3°) मुक्त मूलक में सबसे अधिक एल्किल समूह होते हैं, इसलिए यह सबसे स्थायी है और सबसे आसानी से बनता है। इसके बाद द्वितीयक (2°) और फिर प्राथमिक (1°) का स्थान आता है।
विटामिन $B_1$ को कहा जाता है-
(Vitamin $B_1$ is known as-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
विटामिन $B$ कॉम्प्लेक्स के विभिन्न सदस्यों के विशिष्ट रासायनिक नाम होते हैं:
- ✅ थायमिन (Thiamine): यह विटामिन $B_1$ का रासायनिक नाम है। इसकी कमी से बेरी-बेरी रोग हो जाता है।
- 🔹 राइबोफ्लेविन (Riboflavin): यह विटामिन $B_2$ का नाम है।
- 🔹 पाइरिडॉक्सीन (Pyridoxine): यह विटामिन $B_6$ का नाम है।
- 🔹 कोबालामाइन (Cobalamin): यह विटामिन $B_{12}$ का नाम है।
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक $LiAlH_4$ के साथ प्रतिक्रिया करने पर द्वितीयक अमीन बनाएगा?
(Which of the following compound will form secondary amine on reaction with $LiAlH_4$?)
(Methyl cyanide)
(Methyl isocyanide)
(Acetamide)
(Nitroethane)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
लिथियम एल्युमीनियम हाइड्राइड ($LiAlH_4$) एक प्रबल अपचायक है। विभिन्न यौगिकों के अपचयन से प्राप्त होने वाले अमीन इस प्रकार हैं:
- ✅ मिथाइल आइसोसाइनाइड ($CH_3NC$): इसका $LiAlH_4$ द्वारा अपचयन करने पर **डाई-मिथाइल अमीन** (एक द्वितीयक अमीन) प्राप्त होता है।
$CH_3NC \xrightarrow{LiAlH_4} CH_3-NH-CH_3$ - ❌ मिथाइल साइनाइड ($CH_3CN$): इसके अपचयन से इथाइल अमीन (प्राथमिक अमीन) बनता है।
- ❌ एसिटामाइड ($CH_3CONH_2$): इसके अपचयन से इथाइल अमीन (प्राथमिक अमीन) प्राप्त होता है।
- ❌ नाइट्रोएथेन ($C_2H_5NO_2$): इसके अपचयन से भी इथाइल अमीन (प्राथमिक अमीन) बनता है।
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
IUPAC नामकरण के नियमों के अनुसार:
- ✅ सबसे लंबी श्रृंखला: मुख्य कार्बन श्रृंखला में 4 कार्बन हैं, इसलिए मूल नाम 'ब्यूटा' (Buta) होगा।
- ✅ नंबरिंग: नंबरिंग उस तरफ से शुरू करते हैं जहाँ से प्रतिस्थापी (substituent) और द्वि-बंध (double bond) को कम नंबर मिले। यहाँ बाईं ओर से नंबरिंग करने पर दूसरे कार्बन पर मिथाइल समूह आता है।
- ✅ द्वि-बंध की स्थिति: द्वि-बंध पहले और तीसरे कार्बन पर हैं, इसलिए इसे '1,3-डाइन' कहा जाता है।
सिप्रोफ्लोक्सासिन का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में किया जाता है, यह कथन सत्य है या असत्य?
(Ciprofloxacin is used as an antibiotic, this statement is true or false?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
सिप्रोफ्लोक्सासिन (Ciprofloxacin) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
- ✅ उपयोग: यह एक अत्यंत प्रभावशाली एंटीबायोटिक (Antibiotic) दवा है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के जीवाणु संक्रमणों (Bacterial Infections) के इलाज में किया जाता है।
- ✅ वर्ग: यह 'फ्लोरोक्विनोलोन' (Fluoroquinolone) वर्ग की दवा है जो बैक्टीरिया के प्रजनन को रोककर काम करती है।
- ✅ बीमारियाँ: इसका उपयोग आमतौर पर मूत्र पथ के संक्रमण (UTI), श्वसन तंत्र के संक्रमण और त्वचा के संक्रमण के लिए किया जाता है।
निम्नलिखित में से किस में -COOH समूह शामिल नहीं है?
(Which one of the following does not contain the -COOH group?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
नाम में 'अम्ल' होने के बावजूद, सभी यौगिकों में कार्बोक्सिलिक समूह (-COOH) नहीं होता है। आइए संरचनाओं को देखें:
- ✅ पिक्रिक अम्ल: इसका रासायनिक नाम **2,4,6-ट्राइनाइट्रोफीनॉल** है। इसमें एक **-OH (फेनोलिक)** समूह और तीन नाइट्रो ($-NO_2$) समूह होते हैं, लेकिन **-COOH समूह नहीं होता**। इसकी अम्लीय प्रकृति तीन $-NO_2$ समूहों के प्रबल इलेक्ट्रॉन खींचने वाले प्रभाव के कारण होती है।
- ❌ एस्पिरिन: इसमें कार्बोक्सिलिक और एस्टर दोनों समूह होते हैं (एसीटाइलसेलिसिलिक अम्ल)।
- ❌ बेन्जोइक अम्ल: बेन्जीन रिंग से सीधे -COOH समूह जुड़ा होता है।
- ❌ इथेनोइक अम्ल: इसे एसिटिक अम्ल भी कहते हैं, इसमें -COOH समूह होता है ($CH_3COOH$)।
6 कार्बन परमाणुओं वाले एक एल्केन में कितने हाइड्रोजन परमाणु होंगे?
(How many hydrogen atoms will an alkane with 6 carbon atoms have?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
एल्केन (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनका एक निश्चित सामान्य सूत्र होता है।
गणना (Calculation):
- 🔹 एल्केन का सामान्य सूत्र: $$C_nH_{2n+2}$$
- 🔹 यहाँ कार्बन परमाणुओं की संख्या ($n$) = **6** है।
- 🔹 हाइड्रोजन की संख्या = $2n + 2$ = $2(6) + 2$
- 🔹 हाइड्रोजन की संख्या = $12 + 2$ = **14**
अतः, 6 कार्बन वाले एल्केन (हेक्सेन, $C_6H_{14}$) में कुल 14 हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
प्रश्न संख्या: 93
सूची-I (वर्ग) को सूची-II (उदाहरण/सूत्र) से सही सुमेलित (Match) कीजिए:
(Match List-I with List-II correctly:)
| सूची - I (वर्ग) | सूची - II (उदाहरण / सूत्र) |
|---|---|
| (a) बहुलक (Polymer) | (I) R-NH-COOH |
| (b) कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) | (II) C₂H₆ |
| (c) हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) | (III) Nylon-6 |
| (d) प्रोटीन (Proteins) | (IV) C₆H₁₂O₆ |
(a-IV, b-III, c-II, d-I)
विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):
प्रश्न के अनुसार सही मिलान इस प्रकार किया गया है:
नोट: यह मिलान दी गई आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आधारित है।
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निम्नलिखित यौगिक में कार्बन परमाणुओं का संकरण क्या है? CH₂ = CH₂
(Hybridization of carbon atoms in following compound CH₂ = CH₂)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
एथिलीन ($CH_2 = CH_2$) में संकरण को समझने के लिए हमें प्रत्येक कार्बन द्वारा बनाए गए बंधों पर ध्यान देना होगा:
- ✅ **सिग्मा बंध:** प्रत्येक कार्बन परमाणु कुल 3 सिग्मा ($\sigma$) बंध बनाता है (दो हाइड्रोजन के साथ और एक दूसरे कार्बन के साथ)।
- ✅ **पाई बंध:** दोनों कार्बन परमाणुओं के बीच एक पाई ($\pi$) बंध भी होता है।
- ✅ **संकरण नियम:** चूंकि प्रत्येक कार्बन परमाणु 3 सिग्मा बंधों से जुड़ा है और कोई एकाकी युग्म नहीं है, इसलिए इसका संकरण **$sp^2$** होता है।
निम्नलिखित यौगिक का IUPAC नाम दीजिए-
(Give the IUPAC name of following compound-)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
IUPAC नियमों के अनुसार:
- ✅ लंबी श्रृंखला: 6 कार्बन परमाणुओं की मुख्य श्रृंखला 'हेक्सेन' है।
- ✅ नंबरिंग: बाईं ओर से शुरू करने पर प्रतिस्थापियों को 2, 2, 4 अंक मिलते हैं जो न्यूनतम हैं।
- ✅ नाम: तीन मिथाइल समूहों के लिए 'ट्राइमिथाइल' का प्रयोग किया गया है।
सही मिलान कीजिए (Match the following):
| सूची - I (क्रियात्मक समूह) | सूची - II (प्रतीक) |
|---|---|
| (a) अल्कोहल (Alcohol) | (I) -COOH |
| (b) एसिड (अम्ल) (Acid) | (II) -CHO |
| (c) अमीन (Amine) | (III) -NH₂ |
| (d) एल्डिहाइड (Aldehyde) | (IV) -OH |
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
क्रियात्मक समूहों का उनके प्रतीकों के साथ सही मिलान इस प्रकार है:
- ✅ (a) अल्कोहल: इसका क्रियात्मक समूह -OH (IV) है।
- ✅ (b) एसिड (कार्बोक्सिलिक अम्ल): इसका क्रियात्मक समूह -COOH (I) है।
- ✅ (c) अमीन: इसका क्रियात्मक समूह -NH₂ (III) है।
- ✅ (d) एल्डिहाइड: इसका क्रियात्मक समूह -CHO (II) है।
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक कायरल नहीं है?
(Which of the following compound is not chiral?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
एक यौगिक **कायरल (Chiral)** तब होता है जब उसमें कम से कम एक ऐसा कार्बन परमाणु हो जिससे चार अलग-अलग समूह जुड़े हों। यदि ऐसा कोई कार्बन नहीं है, तो वह **अकायरल (Not Chiral)** कहलाता है।
- ✅ विकल्प A: $DCH_2CH_2CH_2Cl$ में किसी भी कार्बन पर चार अलग समूह नहीं हैं। प्रत्येक कार्बन पर कम से कम दो हाइड्रोजन परमाणु समान हैं, इसलिए यह **कायरल नहीं है**।
- ❌ विकल्प B, C और D: इन सभी संरचनाओं में एक ऐसा कार्बन परमाणु मौजूद है जिससे चार अलग-अलग समूह (जैसे $-H, -D, -CH_3, -Cl$ आदि) जुड़े हुए हैं, जिससे ये सभी कायरल बन जाते हैं।
कार्बोकेटायन के स्थायित्व का सही क्रम क्या है?
(What is the correct sequence of stability of carbocation?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
कार्बोकेटायन एक अस्थाई मध्यवर्ती (intermediate) है जिसमें कार्बन पर धनावेश होता है। इसका स्थायित्व मुख्य रूप से दो प्रभावों पर निर्भर करता है:
- ✅ प्रेरणिक प्रभाव (+I effect): एल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दाता होते हैं जो धनावेशित कार्बन के चार्ज को कम करके उसे स्थिर करते हैं।
- ✅ अति-संयुग्मन (Hyperconjugation): जितने अधिक $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होंगे, कार्बोकेटायन उतना ही अधिक स्थाई होगा।
स्थायित्व का क्रम:
तृतीयाक (3°) > द्वितीयक (2°) > प्राथमिक (1°)
तृतीयाक कार्बोकेटायन में तीन एल्किल समूह +I प्रभाव और अधिक $\alpha$-H परमाणु प्रदान करते हैं, इसलिए यह सबसे अधिक स्थाई होता है।
निम्नलिखित में से कौन सा वसा में घुलनशील विटामिन है?
(Which of the following is a fat soluble vitamin?)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
विटामिनों को उनकी घुलनशीलता (solubility) के आधार पर दो मुख्य समूहों में बांटा गया है:
विटामिनों का वर्गीकरण:
- ✅ वसा में घुलनशील (Fat Soluble): ये विटामिन वसा और तेलों में घुल जाते हैं। ये हैं— विटामिन A, D, E, और K।
- ❌ जल में घुलनशील (Water Soluble): ये विटामिन पानी में घुल जाते हैं। ये हैं— विटामिन B कॉम्प्लेक्स और विटामिन C।
दिए गए विकल्पों में केवल विटामिन A ही वसा में घुलनशील है। विटामिन B और C जल में घुलनशील विटामिनों की श्रेणी में आते हैं।
समतुल्य अणु भार वाले ईथर का क्वथनांक अल्कोहल के क्वथनांक से ______ होता है।
(The boiling point of ether is ______ the B.P. of alcohol of comparable molecular mass.)
पूर्ण व्याख्या (Full Explanation):
समान आणविक द्रव्यमान होने के बावजूद ईथर और अल्कोहल के क्वथनांक में बहुत अंतर होता है। इसका मुख्य कारण **हाइड्रोजन आबंधन (Hydrogen Bonding)** है:
- ✅ अल्कोलहल (Alcohols): इनमें $-OH$ समूह होता है, जिसके कारण अणुओं के बीच प्रबल **अंतराआणविक हाइड्रोजन बंध** बनते हैं। इन्हें तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- ✅ ईथर (Ethers): इनमें सक्रिय हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता, इसलिए ये आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बना सकते। इनमें केवल कमजोर द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण होता है।
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