🎯 CG PET 2023 Physics Solved Paper
संपूर्ण व्याख्या और सटीक उत्तरों के साथ (Hindi & English Medium)
(Length of a metal wire is $L_1$ when tension in it is $T_1$, and is $L_2$ when the tension is $T_2$. Natural length of the wire is-)
📝 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
मान लीजिए तार की वास्तविक लंबाई (Natural Length) $L$ है और उसका Young's Modulus $Y$ तथा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A$ है।
हुक के नियम (Hooke's Law) के अनुसार, तनाव और लंबाई में परिवर्तन का संबंध इस प्रकार होता है:
$T = \frac{YA}{L} (L_{final} - L)$
स्थिति 1 के लिए ($T_1$ तनाव):
$T_1 = \frac{YA}{L} (L_1 - L)$ --- (समीकरण i)
स्थिति 2 के लिए ($T_2$ तनाव):
$T_2 = \frac{YA}{L} (L_2 - L)$ --- (समीकरण ii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) से भाग देने पर:
$\frac{T_1}{T_2} = \frac{L_1 - L}{L_2 - L}$
क्रॉस गुणा (Cross Multiplication) करने पर:
$T_1(L_2 - L) = T_2(L_1 - L)$
$T_1 L_2 - T_1 L = T_2 L_1 - T_2 L$
$T_2 L - T_1 L = T_2 L_1 - T_1 L_2$
$L(T_2 - T_1) = L_1 T_2 - L_2 T_1$
अतः तार की वास्तविक लंबाई:
$L = \frac{L_1 T_2 - L_2 T_1}{T_2 - T_1}$
(Let P and E denote the linear momentum and energy of photon. If the wavelength is decreased-)
🚀 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):
फोटॉन (Photon) के लिए ऊर्जा और संवेग के सूत्र तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के पदों में नीचे दिए गए हैं:
1. ऊर्जा (Energy, E): $E = \frac{hc}{\lambda}$
2. संवेग (Momentum, P): $P = \frac{h}{\lambda}$
यहाँ $h$ (प्लैंक नियतांक) और $c$ (प्रकाश की चाल) दोनों ही नियतांक (Constants) हैं।
अतः, $E \propto \frac{1}{\lambda}$ और $P \propto \frac{1}{\lambda}$
निष्कर्ष: चूँकि दोनों ही तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) हैं, इसलिए यदि तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) को कम किया जाता है, तो संवेग (P) और ऊर्जा (E) दोनों का मान बढ़ेगा।
λ ↓ $\implies$ P ↑ और E ↑
(Breaking stress of a wire depends on-)
💡 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):
तनाव प्रतिबल (Breaking Stress) वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे एक तार बिना टूटे सहन कर सकता है।
याद रखने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबल (Stress) तार की लंबाई, त्रिज्या या मोटाई पर निर्भर नहीं करता है।
यह केवल तार के पदार्थ (Nature of Material) की विशेषता है। अलग-अलग पदार्थों (जैसे लोहा, स्टील, तांबा) के लिए ब्रेकिंग स्ट्रेस का मान अलग-अलग होता है।
पदार्थ बदला $\implies$ ब्रेकिंग स्ट्रेस बदला!
(The speed of sound in a medium depends on-)
🌟 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):
किसी भी माध्यम में ध्वनि (Sound) की चाल दो मुख्य भौतिक गुणों पर निर्भर करती है:
- प्रत्यास्थता (Elasticity): माध्यम कितना लचीला है।
- जड़त्व (Inertia): माध्यम का घनत्व या भारीपन।
सूत्र (Formula): $v = \sqrt{\frac{E}{\rho}}$
यहाँ $E$ प्रत्यास्थता गुणांक (Elasticity) है और $\rho$ माध्यम का घनत्व (Inertia) है। अतः ध्वनि की चाल इन दोनों पर निर्भर करती है।
ध्वनि की चाल $\propto$ $\sqrt{Elasticity / Inertia}$
(A source of frequency $250\text{ Hz}$ is moving with velocity $V$ towards a stationary observer. If the apparent frequency heard by the observer is $270\text{ Hz}$ and velocity of sound in medium is $330\text{ m/s}$, the value of $V$ in $\text{m/s}$ is-)
🔢 हल (Detailed Solution):
यहाँ **डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)** का सूत्र लगेगा। जब स्रोत स्थिर प्रेक्षक की ओर बढ़ता है, तो आभासी आवृत्ति ($n'$) का सूत्र है:
$n' = n \left( \frac{v}{v - v_s} \right)$
दिया गया है (Given):
- वास्तविक आवृत्ति ($n$) = $250\text{ Hz}$
- आभासी आवृत्ति ($n'$) = $270\text{ Hz}$
- ध्वनी का वेग ($v$) = $330\text{ m/s}$
- स्रोत का वेग ($v_s$) = $V$ (हमें ज्ञात करना है)
गणना (Calculation):
$270 = 250 \left( \frac{330}{330 - V} \right)$
$\frac{27}{25} = \frac{330}{330 - V}$
$27(330 - V) = 25 \times 330$
$8910 - 27V = 8250$
$27V = 8910 - 8250$
$27V = 660$
$V = \frac{660}{27} \approx 24.444\text{ m/s}$
अतः $V = 24.44\text{ m/s}$ (लगभग)
(A ball of mass $m$ is dropped from height $h$ on a platform fixed at the top of a vertical spring. The platform is displaced by a distance $x$. The spring-constant of the spring is-)
⚙️ हल (Detailed Solution):
इस सवाल को हम ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) से हल करेंगे।
जब गेंद ऊँचाई से गिरती है और स्प्रिंग को $x$ दूरी तक दबाती है, तो गेंद द्वारा खोई गई कुल स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy), स्प्रिंग में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) के बराबर होगी।
गेंद द्वारा तय की गई कुल ऊर्ध्वाधर दूरी: $(h + x)$
$mg(h + x) = \frac{1}{2} kx^2$
यहाँ $k$ स्प्रिंग नियतांक (Spring Constant) है। अब हमें $k$ का मान निकालना है:
$2mg(h + x) = kx^2$
$k = \frac{2mg(h + x)}{x^2}$
(A body of mass $10\text{ kg}$ is moving with a velocity of $10\text{ m/s}$. A constant force is applied to it for $4$ seconds, giving it a velocity of $-2\text{ m/s}$. The work done by the force is-)
⚡ हल (Detailed Solution):
इस प्रश्न को हल करने के लिए हम कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) का उपयोग करेंगे।
किया गया कार्य ($W$) = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta K.E.$)
$W = \frac{1}{2}m(v^2 - u^2)$
दिया गया है (Given):
- द्रव्यमान ($m$) = $10\text{ kg}$
- प्रारंभिक वेग ($u$) = $10\text{ m/s}$
- अंतिम वेग ($v$) = $-2\text{ m/s}$
- समय ($t$) = $4\text{ s}$ (यहाँ कार्य निकालने के लिए समय की आवश्यकता नहीं है)
गणना (Calculation):
$W = \frac{1}{2} \times 10 \times [(-2)^2 - (10)^2]$
$W = 5 \times [4 - 100]$
$W = 5 \times [-96]$
$W = -480\text{ Joules}$
नोट: ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि बल ने गति के विपरीत दिशा में कार्य किया है (मंदक बल)।
(Which device is used to measure current?)
💡 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):
विद्युत धारा (Electric Current) को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है, उसे अमीटर (Ammeter) कहते हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी:
- अमीटर को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
- एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य (Zero) होना चाहिए।
अन्य विकल्पों की जानकारी:
- वोल्टमीटर: विभवांतर (Voltage) मापने के काम आता है।
- विभवमापी: सेल का EMF और आंतरिक प्रतिरोध मापने के काम आता है।
- व्हीट स्टोन ब्रिज: अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) ज्ञात करने के काम आता है।
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(Total distance covered by a particle performing SHM in one time period is- where $A$ is amplitude)
💡 एकदम आसान व्याख्या:
सरल आवर्त गति (SHM) में एक पूरे चक्कर (One Time Period) के दौरान कण इस तरह चलता है:
- 📍 1. माध्य स्थिति से एक तरफ के अधिकतम बिंदु तक = $A$ दूरी
- 📍 2. उस अधिकतम बिंदु से वापस माध्य स्थिति तक = $A$ दूरी
- 📍 3. माध्य स्थिति से दूसरी तरफ के अधिकतम बिंदु तक = $A$ दूरी
- 📍 4. उस दूसरे बिंदु से वापस माध्य स्थिति तक = $A$ दूरी
कुल तय की गई दूरी = $A + A + A + A = 4A$
याद रखें: अगर सवाल में "विस्थापन" (Displacement) पूछा जाता, तो उत्तर शून्य (Zero) होता, लेकिन "दूरी" पूछी गई है, इसलिए $4A$ होगा।
(The amount of heat required to raise the temperature of $2$ moles of an ideal monoatomic gas from $273\text{ K}$ to $373\text{ K}$, when no work its done, is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
उष्मागतिकी के प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics) के अनुसार:
$\Delta Q = \Delta U + \Delta W$
प्रश्न के अनुसार: किया गया कार्य ($\Delta W$) = $0$
अतः, आवश्यक ऊष्मा ($\Delta Q$) = आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta U$)
सूत्र: $\Delta U = n C_v \Delta T$
दिया गया है (Given):
- मोलों की संख्या ($n$) = $2$
- तापमान में अंतर ($\Delta T$) = $373 - 273 = 100\text{ K}$
- एकपरमाण्विक गैस (Monoatomic Gas) के लिए $C_v = \frac{3}{2}R$
गणना (Calculation):
$\Delta Q = 2 \times \left( \frac{3}{2}R \right) \times 100$
$\Delta Q = 3 \times R \times 100$
$\Delta Q = 300\text{R}$
(Capacitance of three condensers are $1, 2$ and $3 \mu f$. Second and third condensers are connected in series and then connected in parallel with first condenser. Combined capacitance of three condensers will be-)
🔍 हल (Detailed Solution):
दिया गया है (Given):
- $C_1 = 1 \mu f$
- $C_2 = 2 \mu f$
- $C_3 = 3 \mu f$
Step 1: दूसरे ($C_2$) और तीसरे ($C_3$) को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ने पर:
$\frac{1}{C_{series}} = \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{5}{6}$
$\implies C_{series} = \frac{6}{5} = 1.2 \mu f$
Step 2: अब इस $C_{series}$ को पहले ($C_1$) के साथ समान्तर (Parallel) में जोड़ने पर:
$C_{total} = C_1 + C_{series}$
$C_{total} = 1 + 1.2$
संयुक्त धारिता ($C_{total}$) = $2.2 \mu f$
(Masses of blocks A, B and C are $m_A = 4\text{ kg}, m_B = 2\text{ kg}, m_C = 3\text{ kg}$. Mass of movable pulley is $1\text{ kg}$. The acceleration of block A is-)
🔍 विस्तृत हल:
इस सिस्टम में चलायमान पुली का द्रव्यमान $1\text{ kg}$ है, जिसे हम समीकरणों में $m_p$ मानेंगे।
ब्लॉकों के त्वरण और डोरी के तनाव (T) के बीच के संबंधों को हल करने पर, ब्लॉक A का त्वरण प्राप्त होता है:
$a_A = \frac{9g}{49}$
(The slits in a Young’s double slit experiment have equal width and source is placed symmetrically with respect to the slits. The intensity at the central fringe is $I_0$. If one of the slit is closed, then the intensity at this point will be-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
मान लीजिए कि प्रत्येक स्लिट से निकलने वाली तरंग की व्यक्तिगत तीव्रता $I'$ है।
1. जब दोनों स्लिट खुली हों:
केन्द्रीय फ्रिंज पर अधिकतम तीव्रता ($I_0$) का सूत्र है:
यहाँ से हमें मिला: $I' = I_0 / 4$ --- (समीकरण 1)
2. जब एक स्लिट बंद कर दी जाए:
व्यतिकरण (Interference) समाप्त हो जाएगा और पर्दे पर केवल एक ही स्लिट की तीव्रता दिखाई देगी।
अतः, नई तीव्रता = $I'$
समीकरण (1) से मान रखने पर:
नई तीव्रता = $I_0 / 4$
निष्कर्ष: एक स्लिट बंद करने पर आयाम आधा हो जाता है और तीव्रता एक चौथाई ($1/4$) हो जाती है।
(The intensity of magnetic field due to current $i$ in a long straight wire will be proportional to-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
एक लंबे सीधे धारावाही चालक (long straight current-carrying wire) के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ($B$) का सूत्र **बायो-सेवर्ट नियम** या **ऐम्पियर के परिपथीय नियम** से दिया जाता है:
$B = \frac{\mu_0 i}{2\pi r}$
यहाँ:
- $B$ = चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता
- $i$ = तार में प्रवाहित विद्युत धारा
- $r$ = तार से बिंदु की दूरी
निष्कर्ष: उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है कि चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता प्रवाहित धारा के **सीधे समानुपाती (Directly Proportional)** होती है।
$B \propto i$
(Two simple pendulums begin to swing simultaneously. The first pendulum makes 9 oscillations when the other makes 7 oscillations. Ratio of the lengths is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Explanation):
1. मुख्य सूत्र (Basic Formula):
सरल लोलक के आवर्तकाल ($T$) और लंबाई ($l$) का संबंध होता है:
$T = 2\pi\sqrt{\frac{l}{g}}$
यानी $l \propto T^2$ --- (i)
2. आवर्तकाल और दोलनों का संबंध:
आवर्तकाल ($T$) दोलनों की संख्या ($n$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
$T = \frac{t}{n} \implies T \propto \frac{1}{n}$ --- (ii)
3. लंबाई और दोलनों का फाइनल संबंध:
समीकरण (i) और (ii) को मिलाने पर:
$l \propto \frac{1}{n^2}$
दिया है: $n_1 = 9$ और $n_2 = 7$
$\frac{l_1}{l_2} = \left( \frac{n_2}{n_1} \right)^2$
$\frac{l_1}{l_2} = \left( \frac{7}{9} \right)^2$
$\frac{l_1}{l_2} = \frac{49}{81}$
याद रखें: जिसकी दोलनों की संख्या ज्यादा होती है, उसकी लंबाई कम होती है। चूँकि पहले लोलक ने 9 दोलन (ज्यादा) किए, इसलिए उसकी लंबाई $l_1$ छोटी (49) होगी।
(Transformer is used in-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
ट्राँसफॉर्मर एक ऐसी स्थिर युक्ति (static device) है जो **अन्योण्य प्रेरण (Mutual Induction)** के सिद्धांत पर कार्य करती है।
यह केवल AC में ही क्यों काम करता है?
- प्रेरण (Induction) के लिए चुंबकीय फ्लक्स में निरंतर परिवर्तन होना आवश्यक है।
- प्रत्यावर्ती धारा (AC) की दिशा और मान लगातार बदलते रहते हैं, जिससे चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और द्वितीयक कुंडली में प्रेरित EMF उत्पन्न होता है।
- दिष्ट धारा (DC) का मान नियत (constant) होता है, इसलिए यह कोई बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र पैदा नहीं कर पाती, जिससे ट्रांसफॉर्मर काम नहीं करता।
चेतावनी: यदि किसी ट्रांसफॉर्मर को DC सप्लाई से जोड़ दिया जाए, तो प्राथमिक कुंडली में अत्यधिक धारा प्रवाहित होगी जिससे वह जल सकती है।
(The electric potential at a point due to point charge is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. सूत्र (Formula):
किसी बिंदु आवेश ($Q$) से $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत विभव ($V$) का सूत्र निम्न है:
$V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{Q}{r}$
2. संबंध (Relationship):
उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है कि विभव ($V$), दूरी ($r$) के **व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional)** होता है।
$V \propto \frac{1}{r}$
नोट: अक्सर छात्र विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E \propto 1/r^2$) और विभव ($V \propto 1/r$) में कंफ्यूज हो जाते हैं। याद रखें, विभव में दूरी का वर्ग नहीं होता।
(A block of mass 'm' is placed on a smooth wedge of inclination $\theta$. The whole system is accelerated horizontally so that the block doesn't slip on the wedge. Force exerted by the wedge on the block has a magnitude-)
🔍 विस्तृत हल (Detailed Explanation):
जब वेज को क्षैतिज दिशा में $a$ त्वरण से त्वरित किया जाता है, तो ब्लॉक पर एक **छद्म बल (Pseudo Force)** $ma$ पीछे की ओर कार्य करता है।
1. बलों का संतुलन (Balancing Forces):
ब्लॉक वेज पर नहीं फिसलता, इसका मतलब है कि वेज के अनुदिश (along the incline) नेट बल शून्य है:
$mg \sin \theta = ma \cos \theta \implies a = g \tan \theta$
2. वेज द्वारा लगाया गया बल (Normal Force $N$):
वेज द्वारा ब्लॉक पर लगाया गया बल 'अभिलंब प्रतिक्रिया बल' ($N$) होता है। वेज के लंबवत दिशा में बलों को संतुलित करने पर:
$N = mg \cos \theta + ma \sin \theta$
3. अंतिम गणना (Final Step):
$a = g \tan \theta$ का मान रखने पर:
- $N = mg \cos \theta + m(g \tan \theta) \sin \theta$
- $N = mg \cos \theta + mg \frac{\sin^2 \theta}{\cos \theta}$
- $N = mg \left( \frac{\cos^2 \theta + \sin^2 \theta}{\cos \theta} \right)$
- $N = mg \left( \frac{1}{\cos \theta} \right) = \mathbf{mg \sec \theta}$
छोटा तरीका: ऊर्ध्वाधर (Vertical) दिशा में $N \cos \theta = mg$ होता है, जहाँ से सीधे $N = mg / \cos \theta = mg \sec \theta$ मिल जाता है।
(The change in frequency due to Doppler effect does not depends on-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब स्रोत (source) और प्रेक्षक (observer) के बीच सापेक्ष गति (relative motion) होती है, तो आभासी आवृत्ति ($f'$) बदल जाती है।
डॉप्लर प्रभाव का सामान्य सूत्र:
$f' = f \left( \frac{v \pm v_o}{v \mp v_s} \right)$
सूत्र से स्पष्ट है कि आवृत्ति में परिवर्तन निम्न पर निर्भर करता है:
- स्रोत की मूल आवृत्ति ($f$)
- प्रेक्षक की चाल ($v_o$)
- स्रोत की चाल ($v_s$)
महत्वपूर्ण बिंदु: डॉप्लर प्रभाव केवल सापेक्ष वेग पर निर्भर करता है। स्रोत और प्रेक्षक एक-दूसरे से कितनी दूरी पर हैं, इससे आवृत्ति में होने वाले परिवर्तन पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step):
1. स्थिति को समझें:
कण पृथ्वी की सतह से $R$ ऊँचाई पर है। अतः पृथ्वी के केंद्र से इसकी दूरी $r = R + R = 2R$ होगी।
2. ऊर्जा का समीकरण:
पलायन करने के लिए, दी गई गतिज ऊर्जा ($K.E.$), उस बिंदु पर बंधन ऊर्जा (Binding Energy) के बराबर होनी चाहिए।
उस बिंदु पर गुरुत्वीय विभव (Potential Energy) $= -\frac{GMm}{r} = -\frac{GMm}{2R}$
3. गणना:
कण को मुक्त करने के लिए आवश्यक वेग $v$ है, तो:
$\frac{1}{2}mv^2 = \frac{GMm}{2R}$ (लेकिन यहाँ त्वरण $g$ के रूप में उत्तर चाहिए)
चूँकि सतह पर $g = \frac{GM}{R^2}$, तो हम $GM = gR^2$ लिख सकते हैं।
$v^2 = \frac{gR^2}{R} \times \text{पलायन की शर्त के अनुसार}$
$v = \sqrt{\frac{gR}{2}}$
निष्कर्ष: केंद्र से दूरी दोगुनी ($2R$) होने पर, पलायन वेग सतह के पलायन वेग का $\frac{1}{\sqrt{2}}$ गुना हो जाता है।
(A junction transistor is called bipolar device because in it-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
संधि ट्रांजिस्टर (Junction Transistor) को अक्सर BJT (Bipolar Junction Transistor) कहा जाता है।
इसे 'द्विध्रुवी' (Bipolar) क्यों कहते हैं?
- किसी भी अर्धचालक युक्ति में आवेश वाहक (charge carriers) दो प्रकार के होते हैं: मुक्त इलेक्ट्रॉन (negative) और होल्स (positive)।
- ट्रांजिस्टर के अंदर धारा का प्रवाह इन दोनों—इलेक्ट्रॉन और होल—के कारण होता है।
- चूँकि यहाँ दो प्रकार के 'ध्रुव' (Polarities) वाले वाहक काम कर रहे हैं, इसलिए इसे 'द्विध्रुवी' कहा जाता है।
तुलना: इसके विपरीत, FET (Field Effect Transistor) को 'एकध्रुवी' (Unipolar) कहा जाता है क्योंकि उसमें धारा केवल एक ही प्रकार के वाहक (या तो इलेक्ट्रॉन या होल) के कारण बहती है।
(A particle moves on x-axis according to the equation $x = A + B \sin \omega t$. The motion is SHM with amplitude-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. समीकरण का विश्लेषण:
दिया गया समीकरण है: $x = A + B \sin \omega t$
2. आयाम की परिभाषा:
सरल आवर्त गति (SHM) में, आयाम (Amplitude) वह **अधिकतम विस्थापन** होता है जो कण अपनी **माध्य स्थिति (Mean Position)** से तय करता है।
3. माध्य स्थिति की पहचान:
यहाँ $x$ का मान $A$ के चारों ओर बदल रहा है।
जब $\sin \omega t = 0$, तो $x = A$ (यही कण की माध्य स्थिति है)।
4. अधिकतम विस्थापन (आयाम):
$\sin \omega t$ का अधिकतम मान $+1$ और न्यूनतम मान $-1$ होता है।
अतः, $x$ का अधिकतम मान $= A + B(1) = A + B$
माध्य स्थिति से अधिकतम दूरी $= (A + B) - A = \mathbf{B}$
अतः, SHM का आयाम $B$ है।
सावधानी: छात्र अक्सर $A$ को आयाम मान लेते हैं, लेकिन यहाँ $A$ केवल माध्य स्थिति का स्थान (Shift) दर्शा रहा है, आयाम नहीं।
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(Moment of inertia of a solid sphere of radius 'R' and density 'ρ' about its diameter is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. जड़त्व-आघूर्ण का मूल सूत्र:
एक ठोस गोले का उसके व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण ($I$) होता है:
$I = \frac{2}{5} M R^2$ --- (i)
2. द्रव्यमान और घनत्व का संबंध:
द्रव्यमान ($M$) = आयतन ($V$) $\times$ घनत्व ($\rho$)
ठोस गोले का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3$
अतः, $M = \frac{4}{3} \pi R^3 \rho$ --- (ii)
3. अंतिम गणना:
समीकरण (ii) का मान (i) में रखने पर:
$I = \frac{2}{5} \left( \frac{4}{3} \pi R^3 \rho \right) R^2$
$I = \frac{8}{15} \pi \rho R^5$
4. $\pi$ का मान रखने पर:
$\pi \approx \frac{22}{7}$ लेने पर:
$I = \frac{8}{15} \times \frac{22}{7} \times \rho R^5$
$I = \frac{176}{105} \rho R^5$
अतः, सही विकल्प (A) है।
टिप: ऐसे सवालों में अक्सर छात्र $R^2$ और $R^5$ में कंफ्यूज हो जाते हैं। जब घनत्व दिया हो, तो हमेशा $R^5$ वाला विकल्प ही सही होगा।
(The work function of metal is $h\nu_0$. Light of frequency $\nu$ falls on this metal. The photoelectric effect will take place only if-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
1. कार्य फलन (Work Function) क्या है?
किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक **न्यूनतम ऊर्जा** को कार्य फलन ($W_0$) कहते हैं। इसे निम्न प्रकार से लिखा जाता है:
$W_0 = h\nu_0$
जहाँ $\nu_0$ देहली आवृत्ति (Threshold Frequency) है।
2. आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण:
आपतित प्रकाश की कुल ऊर्जा ($E = h\nu$) दो भागों में खर्च होती है:
(i) इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने में (कार्य फलन $h\nu_0$)
(ii) इलेक्ट्रॉन को गतिज ऊर्जा प्रदान करने में ($K.E.$)
$h\nu = h\nu_0 + K.E.$
3. मुख्य शर्त (Key Condition):
प्रकाश विद्युत प्रभाव तभी शुरू होगा जब आपतित प्रकाश की ऊर्जा, कार्य फलन के बराबर या उससे अधिक हो।
$h\nu \geq h\nu_0 \implies \nu \geq \nu_0$
निष्कर्ष: यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति, देहली आवृत्ति से कम ($\nu < \nu_0$) है, तो चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो, इलेक्ट्रॉन बाहर नहीं निकलेंगे।
(The arrow marked in the symbolic representation of transistor represent-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
ट्रांजिस्टर के प्रतीक में तीर का निशान हमेशा उत्सर्जक (Emitter) पर लगा होता है।
यह तीर क्या दर्शाता है?
- इलेक्ट्रॉनिक्स में मानक परिपाटी के अनुसार, तीर हमेशा पारंपरिक धारा (Conventional Current) की दिशा को दर्शाता है।
- पारंपरिक धारा की दिशा वही होती है जो धनात्मक आवेशों (Holes) के प्रवाह की दिशा होती है।
- इसलिए, उत्सर्जक पर बना तीर उत्सर्जक क्षेत्र में होल्स के प्रवाह की दिशा बताता है।
याद रखने की ट्रिक:
• PNP: तीर अंदर की ओर (Pointing iN)
• NPN: तीर बाहर की ओर (Not Pointing iN)
(A particle of mass 'm' is moving in a horizontal circle of radius 'r' under a centripetal force equal to $-\frac{k}{r^2}$, where k is constant. Total energy of the particle is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) निकालना:
अभिकेंद्र बल $F = \frac{mv^2}{r}$ होता है। प्रश्न के अनुसार:
$\frac{mv^2}{r} = \frac{k}{r^2} \implies mv^2 = \frac{k}{r}$
अतः गतिज ऊर्जा ($K.E.$) $= \frac{1}{2}mv^2 = \frac{k}{2r}$
2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) निकालना:
बल और स्थितिज ऊर्जा का संबंध: $F = -\frac{dU}{dr}$
$-\frac{k}{r^2} = -\frac{dU}{dr} \implies dU = \frac{k}{r^2} dr$
समाकलन (Integration) करने पर: $U = -\frac{k}{r}$
3. कुल ऊर्जा (Total Energy):
कुल ऊर्जा ($E$) = गतिज ऊर्जा ($K.E.$) + स्थितिज ऊर्जा ($U$)
याद रखें: एक परिबद्ध तंत्र (bound system) में कुल ऊर्जा हमेशा ऋणात्मक (negative) होती है।
(The ends of rods of length 'L' and radius 'r' of same material are kept at same temperature. Which one of the following rods conducts most heat per second?)
🔍 विस्तृत हल (Detailed Explanation):
1. ऊष्मा प्रवाह की दर का सूत्र:
प्रति सेकंड संचारित ऊष्मा (Heat flow rate) $Q/t$ का सूत्र है:
$\frac{Q}{t} = \frac{KA \Delta T}{L}$
2. संबंधों का विश्लेषण:
चूँकि पदार्थ ($K$) और तापांतर ($\Delta T$) समान हैं, तो:
- $\frac{Q}{t} \propto \frac{A}{L}$
- जहाँ $A = \pi r^2$ (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल)
- अतः, $\frac{Q}{t} \propto \frac{r^2}{L}$
3. विकल्पों की तुलना:
हमें वह छड़ ढूँढनी है जिसके लिए $r^2/L$ का मान **सर्वाधिक** हो:
- (A) $1^2 / 1 = 1$
- (B) $1^2 / 2 = 0.5$
- (C) $2^2 / 2 = 2$
- (D) $2^2 / 1 = \mathbf{4}$ (सर्वाधिक)
निष्कर्ष: ऊष्मा का प्रवाह तब सबसे तेज़ होता है जब छड़ **मोटी** (ज्यादा $r$) और **छोटी** (कम $L$) हो। अतः $L = 1\text{m}$ और $r = 2\text{cm}$ वाली छड़ सर्वाधिक ऊष्मा संचारित करेगी।
(Total internal reflection can take place if-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) के घटित होने के लिए दो अनिवार्य शर्तें होती हैं:
1. माध्यम की शर्त (Sahi Option):
प्रकाश की किरण हमेशा सघन माध्यम (Denser Medium) से विरल माध्यम (Rarer Medium) की ओर जानी चाहिए। (जैसे पानी से हवा में या कांच से हवा में)।
2. आपतन कोण की शर्त:
आपतन कोण (Angle of incidence, $i$) का मान उस माध्यम के लिए क्रांतिक कोण (Critical Angle, $i_c$) से अधिक होना चाहिए।
TIR के लिए: $i > i_c$
याद रखें: यदि प्रकाश विरल से सघन में जाता है, तो वह हमेशा अभिलंब की ओर झुकता है और कभी भी परावर्तित होकर उसी माध्यम में वापस नहीं आ सकता।
(The magnetic susceptibility is negative for-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
चुम्बकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) हमें यह बताती है कि कोई पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर कितनी आसानी से चुम्बकित हो जाता है।
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Materials) के लिए:
- जब इन पदार्थों को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये क्षेत्र की **विपरीत दिशा** में हल्का सा चुम्बकत्व विकसित कर लेते हैं।
- विपरीत दिशा में चुम्बकित होने के कारण इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति हमेशा ऋणात्मक (Negative) होती है।
- इनके लिए $\chi_m < 0$ होता है।
अन्य पदार्थों के लिए तुलना:
• अनुचुम्बकीय (Paramagnetic): $\chi_m$ धनात्मक लेकिन कम होता है।
• लौहचुम्बकीय (Ferromagnetic): $\chi_m$ धनात्मक और बहुत अधिक होता है।
(Heat energy absorbed by a gaseous system in going through a cyclic process, shown in fig., is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. मुख्य सिद्धांत:
किसी चक्रीय प्रक्रम (Cyclic Process) में, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य होता है ($\Delta U = 0$)। अतः ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:
अवशोषित ऊष्मा ($Q$) = किया गया कार्य ($W$)
चक्रीय प्रक्रम में किया गया कार्य P-V ग्राफ के **घेरे गए क्षेत्रफल** के बराबर होता है।
2. ग्राफ का विश्लेषण:
ग्राफ एक वृत्त (circle) है।
• दाब का व्यास ($2R_p$) = $30 - 10 = 20\text{ kPa} = 20 \times 10^3\text{ Pa}$
• आयतन का व्यास ($2R_v$) = $30 - 10 = 20\text{ Litres} = 20 \times 10^{-3}\text{ m}^3$
अतः त्रिज्याएँ होंगी:
$R_p = 10 \times 10^3\text{ Pa}$ तथा $R_v = 10 \times 10^{-3}\text{ m}^3$
3. क्षेत्रफल की गणना:
वृत्त का क्षेत्रफल $= \pi \times R_p \times R_v$
$Q = \pi \times 10 \times 10 = \mathbf{100\pi}$ या $\mathbf{10^2\pi}$ **जूल**
ध्यान दें: यहाँ मात्रकों (units) का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। लीटर को $m^3$ में और kPa को Pa में बदलना अनिवार्य है।
(A car is moving with a speed of 30 m/s on a circular path of radius 500 m. Its speed is increasing at the rate 2 m/s². What is the acceleration of the car?)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
जब कोई कार वृत्ताकार पथ पर अपनी चाल बदलती है, तो उसमें दो प्रकार के त्वरण होते हैं:
1. स्पर्शरेखीय त्वरण (Tangential Acceleration, $a_t$):
यह चाल के बदलने की दर है। प्रश्न के अनुसार:
$a_t = 2\text{ m/s}^2$
2. अभिकेंद्र त्वरण (Centripetal Acceleration, $a_c$):
यह दिशा परिवर्तन के कारण होता है। इसका सूत्र है:
$a_c = \frac{v^2}{r} = \frac{(30)^2}{500} = \frac{900}{500} = \mathbf{1.8\text{ m/s}^2}$
3. कुल त्वरण (Total Acceleration, $a$):
चूँकि $a_t$ और $a_c$ एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, इसलिए कुल त्वरण होगा:
$a = \sqrt{2^2 + 1.8^2} = \sqrt{4 + 3.24}$
$a = \sqrt{7.24} \approx \mathbf{2.69\text{ m/s}^2}$
निष्कर्ष: लगभग मान लेने पर उत्तर **2.7 m/s²** आता है।
(A particle of mass 'm' is moving in a circular path of radius 'r' such that its centripetal acceleration $a_c$ is varying with time as $a_c = k^2 r t^2$, where k is a constant. Power delivered to the particle by the forces acting on it is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. वेग (Velocity) निकालना:
अभिकेंद्र त्वरण का सूत्र $a_c = v^2 / r$ होता है। प्रश्न के अनुसार:
$v^2 / r = k^2 r t^2 \implies v^2 = k^2 r^2 t^2$
दोनों ओर वर्गमूल लेने पर: $v = k r t$
2. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) निकालना:
$K.E. = \frac{1}{2} m v^2$
$K.E. = \frac{1}{2} m (k r t)^2 = \frac{1}{2} m k^2 r^2 t^2$
3. शक्ति (Power) की गणना:
शक्ति, कार्य करने की दर या ऊर्जा में परिवर्तन की दर होती है ($P = dW/dt$ या $dK.E./dt$)।
$P = \frac{1}{2} m k^2 r^2 \frac{d}{dt} (t^2)$
$P = \frac{1}{2} m k^2 r^2 (2t)$
$P = m k^2 r^2 t$
विशेष टिप: यहाँ केवल स्पर्शरेखीय बल (Tangential force) ही कार्य करता है और शक्ति प्रदान करता है। अभिकेंद्र बल हमेशा वेग के लंबवत होता है, इसलिए उसके द्वारा किया गया कार्य और शक्ति शून्य होती है।
(If a charged particle is moved along a magnetic field, then magnetic force on the particle will be-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
1. चुम्बकीय बल का सूत्र:
जब कोई 'q' आवेश वाला कण 'v' वेग से 'B' तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर लगने वाला बल ($F$) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$F = qvB \sin \theta$
यहाँ $\theta$ कण के वेग ($v$) और चुम्बकीय क्षेत्र ($B$) की दिशा के बीच का कोण है।
2. प्रश्न की स्थिति:
प्रश्न में कहा गया है कि कण "चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में" गति कर रहा है। इसका मतलब है कि वेग और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों एक ही दिशा में (Parallel) हैं।
अतः, $\theta = 0^\circ$
3. गणना:
चूँकि $\sin 0^\circ = 0$ होता है, इसलिए:
$F = qvB \sin 0^\circ = qvB \times 0 = \mathbf{0}$
निष्कर्ष: यदि कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के समांतर (Parallel) या प्रति-समांतर (Anti-parallel, $180^\circ$) गति करता है, तो उस पर लगने वाला चुम्बकीय बल हमेशा शून्य होता है।
(A uniform ring of radius 'r' and mass per units length 'λ' is spun about its axis with uniform angular velocity 'ω'. The increase in tension in the ring is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. स्थिति का विश्लेषण:
मान लीजिए वलय का एक छोटा सा हिस्सा (element) $dl$ है जो केंद्र पर $d\theta$ कोण बनाता है।
इस हिस्से का द्रव्यमान $dm = \lambda \cdot dl = \lambda (r \cdot d\theta)$ होगा।
2. बल संतुलन:
जब वलय घूमता है, तो उसके दोनों सिरों पर लगने वाला तनाव ($T$) केंद्र की ओर एक नेट बल लगाता है जो अभिकेंद्र बल ($F_c$) प्रदान करता है।
छोटे कोण $d\theta$ के लिए, केंद्र की ओर नेट बल $2T \sin(d\theta/2) \approx T \cdot d\theta$ होता है।
3. सूत्र की स्थापना:
अभिकेंद्र बल $F_c = (dm) \cdot \omega^2 r$
$T \cdot d\theta = (\lambda r d\theta) \cdot \omega^2 r$
$T = \lambda \omega^2 r^2$
निष्कर्ष: वलय में उत्पन्न तनाव रेखीय द्रव्यमान घनत्व ($\lambda$), कोणीय वेग के वर्ग ($\omega^2$) और त्रिज्या के वर्ग ($r^2$) के गुणनफल के बराबर होता है।
(A normal eye is not able to see objects closer than 25 cm because-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
मानव नेत्र में किसी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के लिए आँख की सिलियरी मांसपेशियां (Ciliary Muscles) लेंस की वक्रता को बदलकर उसकी फोकस दूरी को नियंत्रित करती हैं। इसे समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहते हैं।
मुख्य कारण:
- जब वस्तु आँख के बहुत पास (25 cm से कम) आती है, तो मांसपेशियों को लेंस को बहुत अधिक मोटा करना पड़ता है ताकि फोकस दूरी घट सके।
- सिलियरी मांसपेशियों के सिकुड़ने की एक न्यूनतम सीमा होती है। इस सीमा के बाद वे लेंस को और अधिक मोटा नहीं कर सकतीं।
- चूँकि फोकस दूरी एक निश्चित सीमा से कम नहीं हो पाती, इसलिए वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बन पाता और वह धुंधली दिखाई देती है।
निष्कर्ष: 25 cm वह न्यूनतम दूरी है जहाँ तक आँख की मांसपेशियाँ बिना किसी तनाव के फोकस दूरी को एडजस्ट कर सकती हैं।
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(Two spheres of equal radii 'r' are touching each-other. Gravitational force of attraction F between them is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम:
दो गोलों के बीच बल का सूत्र है: $F = \frac{G M_1 M_2}{d^2}$
चूँकि दोनों गोले स्पर्श कर रहे हैं, उनके केंद्रों के बीच की दूरी $d = r + r = 2r$ होगी।
2. द्रव्यमान (Mass) को त्रिज्या के रूप में लिखना:
द्रव्यमान = आयतन $\times$ घनत्व
$M = \left( \frac{4}{3} \pi r^3 \right) \cdot \rho$
अतः, $M \propto r^3$
3. बल और त्रिज्या का संबंध:
सूत्र में $M$ और $d$ का मान रखने पर:
$F \propto \frac{r^3 \cdot r^3}{(2r)^2}$
$F \propto \frac{r^6}{r^2}$
$F \propto r^4$
सावधानी: छात्र अक्सर केवल $1/r^2$ को देखकर Option (B) लगा देते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि त्रिज्या बदलने पर गोलों का द्रव्यमान ($M$) भी $r^3$ के अनुसार बदल जाता है।
(Dimension of $\frac{e^2}{\epsilon_0 hc}$ is (where notations have their usual meanings)-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. व्यंजक को पहचानें:
दिया गया व्यंजक $\frac{e^2}{\epsilon_0 hc}$ भौतिकी में **सूक्ष्म संरचना नियतांक (Fine Structure Constant)** के नाम से जाना जाता है।
2. विमीय विश्लेषण (Dimensional Check):
हम जानते हैं कि दो इलेक्ट्रॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल का सूत्र है:
$F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{e^2}{r^2} \implies \frac{e^2}{\epsilon_0} = 4\pi F r^2$
अतः $\frac{e^2}{\epsilon_0}$ की विमा $= [MLT^{-2}] \cdot [L^2] = [ML^3T^{-2}]$
अब नीचे वाले भाग की विमा निकालते हैं ($hc$):
• $h$ (प्लांक नियतांक) $= [ML^2T^{-1}]$
• $c$ (प्रकाश का वेग) $= [LT^{-1}]$
अतः $hc$ की विमा $= [ML^2T^{-1}] \cdot [LT^{-1}] = [ML^3T^{-2}]$
3. अंतिम परिणाम:
दोनों भागों की विमाओं को भाग देने पर:
$\frac{[ML^3T^{-2}]}{[ML^3T^{-2}]} = [M^0 L^0 T^0 A^0]$
निष्कर्ष: यह एक **विमाहीन राशि (Dimensionless Quantity)** है। भौतिकी में इसका मान लगभग $1/137$ होता है।
(At absolute zero an intrinsic semiconductor-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
1. परम शून्य ताप (0 K) की स्थिति:
परम शून्य ताप पर, अर्धचालक के पास इतनी तापीय ऊर्जा (thermal energy) नहीं होती कि उसके सहसंयोजक बंध (covalent bonds) टूट सकें।
2. बैंड सिद्धांत के अनुसार:
• संयोजी बैंड (Valence Band) पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनों से भरा होता है।
• चालन बैंड (Conduction Band) पूरी तरह से खाली होता है।
3. विद्युत चालन:
चूँकि चालन बैंड में कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन मौजूद नहीं होता, इसलिए धारा का प्रवाह संभव नहीं है। इस स्थिति में अर्धचालक एक **आदर्श कुचालक (Insulator)** की तरह व्यवहार करता है।
नोट: जैसे-जैसे तापमान बढ़ाया जाता है, तापीय ऊर्जा के कारण कुछ इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में चले जाते हैं और अर्धचालक में चालकता (conductivity) आने लगती है।
(A cubical block of mass 'M' and edge 'a' slides down a rough inclined plane of inclination $\theta$ with a uniform velocity. Torque of the normal force on the block about its centre has a magnitude-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. स्थिति को समझें:
चूँकि ब्लॉक **नियत वेग (uniform velocity)** से फिसल रहा है, इसका अर्थ है कि उस पर नेट बल और नेट बल-आघूर्ण (Torque) दोनों शून्य हैं।
2. केंद्र के परितः बलों का संतुलन:
ब्लॉक के केंद्र के परितः तीन मुख्य बल लग रहे हैं:
- गुरुत्वाकर्षण ($Mg$): यह केंद्र से ही गुज़रता है, अतः इसका बल-आघूर्ण $\tau_g = 0$ होगा।
- घर्षण बल ($f$): यह सतह पर पीछे की ओर लगता है। केंद्र से इसकी लम्बवत दूरी $a/2$ है।
$\tau_f = f \times (a/2) = (Mg \sin \theta) \times (a/2)$ - अभिलंब बल ($N$): यह नत तल द्वारा ऊपर की ओर लगता है।
3. गणना:
संतुलन की स्थिति में, अभिलंब बल का बल-आघूर्ण ($\tau_N$), घर्षण के बल-आघूर्ण ($\tau_f$) को संतुलित करना चाहिए:
$\tau_N = \tau_f$
$\tau_N = (Mg \sin \theta) \cdot \frac{a}{2} = \frac{1}{2} Mga \sin \theta$
विशेष टिप: यहाँ अभिलंब बल (Normal force) केंद्र से थोड़ा विस्थापित होकर लगता है ताकि वह ब्लॉक को पलटने (toppling) से बचा सके।
(X-ray beam can be deflected-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
X-किरणों के गुण:
- X-किरणें **विद्युत-चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic waves)** होती हैं।
- इन पर कोई भी **विद्युत आवेश (Electric charge)** नहीं होता, यानी ये उदासीन (neutral) होती हैं।
- चूँकि केवल आवेशित कण ही विद्युत या चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपित होते हैं, इसलिए X-किरणें इन क्षेत्रों से प्रभावित नहीं होतीं।
निष्कर्ष: X-किरणें विद्युतीय और चुम्बकीय दोनों क्षेत्रों में बिना विक्षेपित हुए सीधी निकल जाती हैं।
(The phenomenon of beats can take place-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
1. विस्पंद (Beats) क्या है?
जब लगभग समान आवृत्ति (slightly different frequencies) की दो तरंगें एक ही दिशा में चलती हुई आपस में मिलती हैं (superimpose), तो ध्वनि की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव को विस्पंद कहते हैं।
2. विस्पंद की मुख्य शर्त:
विस्पंद उत्पन्न होने के लिए तरंगों का **अध्यारोपण (Superposition)** होना ज़रूरी है। यह तरंगों का एक सामान्य गुण है।
3. तरंगों की प्रकृति:
चूँकि विस्पंद तरंगों के अध्यारोपण का परिणाम है, इसलिए यह किसी विशेष प्रकार की तरंग तक सीमित नहीं है:
- यह **अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves)** जैसे ध्वनि तरंगों में भी होता है।
- यह **अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves)** जैसे प्रकाश या डोरी की तरंगों में भी देखा जा सकता है।
निष्कर्ष: विस्पंद की घटना अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों में घटित हो सकती है।
(A series AC circuit has a resistance of $4\,\Omega$ and a reactance of $3\,\Omega$. The impedance of the circuit will be-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. दिए गए मान (Given Values):
• प्रतिरोध ($R$) = $4\,\Omega$
• प्रतिघात ($X$) = $3\,\Omega$
2. प्रतिबाधा का सूत्र:
AC परिपथ में कुल अवरोध को प्रतिबाधा ($Z$) कहते हैं। इसका सूत्र निम्न है:
$Z = \sqrt{R^2 + X^2}$
3. गणना (Calculation):
मान रखने पर:
$Z = \sqrt{4^2 + 3^2}$
$Z = \sqrt{16 + 9}$
$Z = \sqrt{25}$
$Z = 5\,\Omega$
टिप: इसे याद रखने का सबसे आसान तरीका "प्रतिबाधा त्रिभुज" (Impedance Triangle) है, जहाँ $R, X$ और $Z$ पाइथागोरस प्रमेय का पालन करते हैं।
(1 mole of a monoatomic gas and 1 mole of a diatomic ideal gas are mixed. This mixture is suddenly compressed to 1/8th of its original volume. Its temperature increases by a factor of-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. मिश्रण के लिए $\gamma$ की गणना:
एकपरमाण्विक गैस (Monoatomic) के लिए: $C_{v1} = \frac{3}{2}R$
द्विपरमाण्विक गैस (Diatomic) के लिए: $C_{v2} = \frac{5}{2}R$
मिश्रण का $C_{v,mix} = \frac{n_1 C_{v1} + n_2 C_{v2}}{n_1 + n_2} = \frac{1(\frac{3}{2}R) + 1(\frac{5}{2}R)}{2} = 2R$
अतः $\gamma_{mix} = 1 + \frac{R}{C_{v,mix}} = 1 + \frac{R}{2R} = \mathbf{1.5}$ या $\mathbf{3/2}$
2. रुद्धोष्म संबंध (Adiabatic Relation):
अचानक संपीडन के लिए ताप ($T$) और आयतन ($V$) का संबंध:
$T_1 V_1^{\gamma-1} = T_2 V_2^{\gamma-1}$
3. गणना:
यहाँ $V_2 = V_1/8$ और $\gamma - 1 = 1.5 - 1 = 0.5$ (या $1/2$) है।
$\frac{T_2}{T_1} = \left( \frac{V_1}{V_2} \right)^{\gamma-1} = (8)^{1/2}$
निष्कर्ष: चूँकि मिश्रण का $\gamma$ ठीक 1.5 आता है, इसलिए तापमान में वृद्धि का कारक $8^{1/2}$ होगा।
(The relationship between electric field $\vec{E}$ and potential difference $V$ is-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
[Image showing the electric field as the negative gradient of electric potential]1. मुख्य सिद्धांत:
विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) हमेशा विभव के घटने की दिशा में होता है। गणितीय रूप में, विद्युत क्षेत्र विद्युत विभव की **ऋणात्मक प्रवणता (Negative Gradient)** के बराबर होता है।
2. डेल ($\nabla$) ऑपरेटर का अर्थ:
यहाँ $\nabla$ (nabla) एक वेक्टर डिफरेंशियल ऑपरेटर है जो विभव के त्रिविमीय परिवर्तन को दर्शाता है:
$\vec{E} = -\left( \hat{i}\frac{\partial V}{\partial x} + \hat{j}\frac{\partial V}{\partial y} + \hat{k}\frac{\partial V}{\partial z} \right)$
3. ऋणात्मक चिह्न (-) का महत्व:
ऋणात्मक चिह्न यह बताता है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा **उच्च विभव (High Potential)** से **निम्न विभव (Low Potential)** की ओर होती है।
सरल शब्दों में: जैसे पानी ऊँचाई से ढलान की ओर बहता है, वैसे ही विद्युत क्षेत्र विभव की "ढलान" (gradient) की विपरीत दिशा में काम करता है।
(A tangent galvanometer is connected directly to an ideal battery. If the number of turns in the coil is doubled, the deflection will-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. स्पर्शज्या धारामापी का सिद्धांत:
स्पर्शज्या नियम के अनुसार: $I = K \tan \theta$, जहाँ $K = \frac{2r B_H}{\mu_0 n}$
अतः, $\tan \theta = \frac{\mu_0 n I}{2r B_H}$
2. बैटरी और प्रतिरोध का संबंध:
चूँकि धारामापी एक आदर्श बैटरी ($V$) से जुड़ा है, तो धारा $I = \frac{V}{R}$ होगी।
यहाँ, कुंडली का प्रतिरोध ($R$) फेरों की संख्या ($n$) के समानुपाती होता है ($R \propto n$)।
3. विक्षेप ($\theta$) का विश्लेषण:
$\tan \theta \propto \frac{n \cdot I}{1} \propto \frac{n \cdot (V/R)}{1}$
चूँकि $R \propto n$, तो:
$\tan \theta \propto \frac{n}{n} \implies \text{Constant}$
जब $n$ बढ़ता है, तो प्रतिरोध भी उसी अनुपात में बढ़ता है जिससे धारा ($I$) घट जाती है। दोनों प्रभाव एक-दूसरे को खत्म कर देते हैं।
निष्कर्ष: फेरों की संख्या दुगनी करने पर भी विक्षेप ($\theta$) **अपरिवर्तित** रहेगा।
(The output of a two input 'OR' gate is zero only when-)
🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):
1. OR गेट का लॉजिक:
OR गेट एक ऐसा लॉजिक गेट है जिसका निर्गत (Output) **'1'** (High) होता है यदि उसके किसी भी निवेशी (Input) में **'1'** मौजूद हो। इसका बूलियन व्यंजक $Y = A + B$ है।
2. सत्यता सारणी (Truth Table):
| Input A | Input B | Output Y |
|---|---|---|
| 0 | 0 | 0 |
| 0 | 1 | 1 |
| 1 | 0 | 1 |
| 1 | 1 | 1 |
3. निष्कर्ष:
जैसा कि ऊपर दी गई सारणी से स्पष्ट है, OR गेट का निर्गत (Output) **शून्य (0)** केवल और केवल तभी होता है जब उसके **दोनों निवेशी (Inputs) शून्य** हों।
याद रखने का तरीका: OR गेट का मतलब है "अथवा"। यदि कोई भी एक स्विच ऑन है, तो बल्ब जलेगा। बल्ब तभी बंद रहेगा जब सारे स्विच बंद (0) हों।
(A particle moves with constant velocity parallel to x-axis. Its angular momentum with respect to origin is-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. कोणीय संवेग का सूत्र:
किसी कण का मूलबिन्दु (Origin) के परितः कोणीय संवेग ($\vec{L}$) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$L = mvr \sin \theta$ या $L = mv \times r_{\perp}$
यहाँ $r_{\perp}$ मूलबिन्दु से कण की गति की रेखा (line of motion) की **लम्बवत दूरी** है।
2. स्थिति का विश्लेषण:
प्रश्न के अनुसार, कण x-अक्ष के समांतर **नियत वेग ($v$)** से गति कर रहा है। इसका मतलब है कि:
- द्रव्यमान ($m$) नियत है।
- वेग ($v$) नियत है।
- मूलबिन्दु से उस रेखा की लम्बवत दूरी ($r_{\perp}$) भी हमेशा एक समान (नियत) रहेगी।
3. निष्कर्ष:
चूँकि $m, v$ और $r_{\perp}$ तीनों नियत हैं, इसलिए उनका गुणनफल यानी **कोणीय संवेग भी हमेशा नियत (Constant) रहेगा**।
विशेष टिप: छात्र अक्सर सोचते हैं कि दूरी $r$ बढ़ रही है तो $L$ भी बढ़ेगा, लेकिन $\sin \theta$ उसी अनुपात में घटता है जिससे लम्बवत दूरी $r \sin \theta$ स्थिर रहती है।
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(In the arrangement shown, mass of A is 1 kg, mass of B is 2 kg and μ between A & B is 0.2. No friction between B and ground. Find friction between A and B if F = 3N is applied on B.)
🔍 स्टेप-बाय-स्टेप हल (Full Explanation):
स्टेप 1: पूरे सिस्टम का साझा त्वरण (Acceleration) निकालना:
चूँकि नीचे वाले ब्लॉक (B) और ज़मीन के बीच कोई घर्षण नहीं है, इसलिए जब हम B को खींचेंगे, तो दोनों ब्लॉक एक साथ आगे बढ़ेंगे (जब तक कि ऊपर वाला ब्लॉक फिसलने न लगे)।
कुल बल ($F$) = 3 N
कुल द्रव्यमान ($M$) = $m_A + m_B = 1\text{ kg} + 2\text{ kg} = 3\text{ kg}$
त्वरण ($a$) = $F / M = 3 / 3 = \mathbf{1\text{ m/s}^2}$
स्टेप 2: ब्लॉक A को चलाने के लिए ज़रूरी घर्षण बल:
ब्लॉक A के ऊपर कोई बाहरी बल नहीं लगा है, वह केवल घर्षण (Friction) की वजह से B के साथ चल रहा है।
अतः, A पर लगने वाला घर्षण बल ($f$) = $m_A \times a$
$f_{\text{needed}} = 1\text{ kg} \times 1\text{ m/s}^2 = \mathbf{1\text{ N}}$
स्टेप 3: घर्षण की अधिकतम सीमा (Limiting Friction) चेक करना:
दोनों ब्लॉकों के बीच अधिकतम कितना घर्षण लग सकता है?
$f_{\text{max}} = \mu \times m_A \times g$
$f_{\text{max}} = 0.2 \times 1 \times 10 = \mathbf{2\text{ N}}$
💡 अंतिम निष्कर्ष:
चूँकि ब्लॉक A को B के साथ चलने के लिए केवल **1 N** बल की ज़रूरत है और सतह **2 N** तक का बल दे सकती है, इसलिए घर्षण बल अपनी वैल्यू **1 N** पर ही सेट कर लेगा।याद रखें: घर्षण एक स्व-समायोज्य (Self-adjusting) बल है।
(The equivalent resistance of the network shown in figure between points A and B will be-)
🔍 विस्तृत हल (Full Explanation):
1. समानांतर (Parallel) हिस्सा:
चित्र में $10\,\Omega$ और $30\,\Omega$ के दो प्रतिरोध एक-दूसरे के समानांतर जुड़े हैं। इनका तुल्य प्रतिरोध ($R_p$) होगा:
2. श्रेणी (Series) हिस्सा:
अब यह $7.5\,\Omega$ का जोड़, $2.5\,\Omega$ के प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में है। अतः कुल प्रतिरोध ($R_{AB}$) होगा:
निष्कर्ष: बिन्दु A और B के बीच का कुल तुल्य प्रतिरोध **10 Ω** है। अतः सही विकल्प **(A)** है।
(Three point particles are located at the vertices of an equilateral triangle of side 'a'. They all start moving simultaneously with equal speed 'v' with first particle heading continually towards the second, the second towards the third and the third towards the first. They will meet each other after time-)
🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):
1. सापेक्ष पहुँच वेग (Velocity of Approach):
समबाहु त्रिभुज में दो कणों के बीच का कोण $60^\circ$ होता है। जब कण 1, कण 2 की ओर चलता है, तो कण 2 भी कण 3 की ओर $v$ वेग से बढ़ रहा होता है।
कण 2 के वेग का वह घटक (component) जो कण 1 की दिशा में है, वह $v \cos 60^\circ$ होगा।
2. नेट सापेक्ष वेग ($v_{rel}$):
दो कणों के एक-दूसरे के पास आने की सापेक्ष गति होगी:
$v_{rel} = v - (-v \cos 60^\circ) = v + v \cos 60^\circ$ (गलत अवधारणा)
सही तरीका: $v_{rel} = v - v \cos 60^\circ = v - v(1/2) = \mathbf{v/2}$
3. समय की गणना:
प्रारंभिक दूरी 'a' को तय करने में लगा समय ($t$):
$t = \frac{\text{दूरी}}{\text{सापेक्ष वेग}} = \frac{a}{v - v \cos 60^\circ}$
$t = \frac{a}{v(1 - 1/2)} = \frac{a}{v/2} = \frac{2a}{v}$
नोट: त्रिभुज के केंद्र तक पहुँचने के लिए सापेक्ष वेग $v \cos 30^\circ$ के घटक से निकाला जाता है, जिससे परिणाम $\mathbf{\frac{2a}{3v}}$ प्राप्त होता है।
निष्कर्ष: यह एक मानक समस्या है। $n$-भुजाओं वाले बहुभुज के लिए सूत्र $t = \frac{a}{v(1 - \cos(2\pi/n))}$ होता है। त्रिभुज के लिए $n=3$ रखने पर उत्तर **2a/3v** आता है।
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