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CG PET 2023 Physics Solved Paper: Step-by-Step Solutions & Full Analysis in Hindi & English

 

CG PET 2023 Physics Solutions with Detailed Step-by-Step Analysis and Solution

🎯 CG PET 2023 Physics Solved Paper


संपूर्ण व्याख्या और सटीक उत्तरों के साथ (Hindi & English Medium)

By: Way2 Study Smart Official
Question 01
एक धात्विक तार की लंबाई $L_1$ है जब उसमें तनाव $T_1$ है तथा $L_2$ है जब तनाव $T_2$ है। तार की अपनी लंबाई का मान होगा-
(Length of a metal wire is $L_1$ when tension in it is $T_1$, and is $L_2$ when the tension is $T_2$. Natural length of the wire is-)
A. $\frac{L_1 + L_2}{2}$
B. $\sqrt{L_1 L_2}$
C. $\frac{L_1 T_2 - L_2 T_1}{T_2 - T_1}$
D. $\frac{L_1 T_2 + L_2 T_1}{T_2 + T_1}$
✅ सही उत्तर: Option (C)

📝 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

मान लीजिए तार की वास्तविक लंबाई (Natural Length) $L$ है और उसका Young's Modulus $Y$ तथा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A$ है।

हुक के नियम (Hooke's Law) के अनुसार, तनाव और लंबाई में परिवर्तन का संबंध इस प्रकार होता है:

$T = \frac{YA}{L} (L_{final} - L)$

स्थिति 1 के लिए ($T_1$ तनाव):
$T_1 = \frac{YA}{L} (L_1 - L)$ --- (समीकरण i)

स्थिति 2 के लिए ($T_2$ तनाव):
$T_2 = \frac{YA}{L} (L_2 - L)$ --- (समीकरण ii)

समीकरण (i) को समीकरण (ii) से भाग देने पर:

$\frac{T_1}{T_2} = \frac{L_1 - L}{L_2 - L}$

क्रॉस गुणा (Cross Multiplication) करने पर:

$T_1(L_2 - L) = T_2(L_1 - L)$

$T_1 L_2 - T_1 L = T_2 L_1 - T_2 L$

$T_2 L - T_1 L = T_2 L_1 - T_1 L_2$

$L(T_2 - T_1) = L_1 T_2 - L_2 T_1$

अतः तार की वास्तविक लंबाई:

$L = \frac{L_1 T_2 - L_2 T_1}{T_2 - T_1}$

Question 02
माना P तथा E फोटॉन के रेखीय संवेग तथा ऊर्जा को दर्शाते हैं। यदि तरंग दैर्ध्य को कम कर दिया जाये-
(Let P and E denote the linear momentum and energy of photon. If the wavelength is decreased-)
A. P तथा E दोनों बढ़ेंगे (both P and E increases)
B. P बढ़ेगा तथा E कम होगा (P increases and E decreases)
C. P कम होगा तथा E बढ़ेगा (P decreases and E increases)
D. P एवं E दोनों कम होंगे (Both P and E decreases)
✅ सही उत्तर: Option (A)

🚀 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):

फोटॉन (Photon) के लिए ऊर्जा और संवेग के सूत्र तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के पदों में नीचे दिए गए हैं:

1. ऊर्जा (Energy, E): $E = \frac{hc}{\lambda}$

2. संवेग (Momentum, P): $P = \frac{h}{\lambda}$

यहाँ $h$ (प्लैंक नियतांक) और $c$ (प्रकाश की चाल) दोनों ही नियतांक (Constants) हैं।

अतः, $E \propto \frac{1}{\lambda}$ और $P \propto \frac{1}{\lambda}$

निष्कर्ष: चूँकि दोनों ही तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) हैं, इसलिए यदि तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) को कम किया जाता है, तो संवेग (P) और ऊर्जा (E) दोनों का मान बढ़ेगा

λ ↓ $\implies$ P ↑ और E ↑

Question 03
तार का तनाव प्रतिबल (ब्रेकिंग स्ट्रेस) निर्भर करता है-
(Breaking stress of a wire depends on-)
A. तार के पदार्थ पर (material of the wire)
B. तार की लंबाई पर (length of the wire)
C. तार की त्रिज्या पर (radius of the wire)
D. अनुप्रस्थ-काट की आकृति पर (shape of the cross-section)
✅ सही उत्तर: Option (A)

💡 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):

तनाव प्रतिबल (Breaking Stress) वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे एक तार बिना टूटे सहन कर सकता है।

याद रखने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबल (Stress) तार की लंबाई, त्रिज्या या मोटाई पर निर्भर नहीं करता है।

यह केवल तार के पदार्थ (Nature of Material) की विशेषता है। अलग-अलग पदार्थों (जैसे लोहा, स्टील, तांबा) के लिए ब्रेकिंग स्ट्रेस का मान अलग-अलग होता है।

पदार्थ बदला $\implies$ ब्रेकिंग स्ट्रेस बदला!

Question 04
किसी माध्यम में ध्वनि की चाल निर्भर करती है-
(The speed of sound in a medium depends on-)
A. प्रत्यास्थ गुणधर्म पर परंतु जड़त्वीय गुणधर्म पर नहीं (The elastic property but not on the inertia property)
B. जड़त्वीय गुणधर्म पर परंतु प्रत्यास्थ गुणधर्म पर नहीं (The inertia property but not on the elastic property)
C. प्रत्यास्थ गुणधर्म एवं जड़त्वीय गुणधर्म दोनों पर (The elastic property as well as the inertia property)
D. प्रत्यास्थ एवं जड़त्वीय दोनों गुणधर्म पर नहीं (Neither the elastic property nor the inertia property)
✅ सही उत्तर: Option (C)

🌟 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):

किसी भी माध्यम में ध्वनि (Sound) की चाल दो मुख्य भौतिक गुणों पर निर्भर करती है:

  • प्रत्यास्थता (Elasticity): माध्यम कितना लचीला है।
  • जड़त्व (Inertia): माध्यम का घनत्व या भारीपन।

सूत्र (Formula): $v = \sqrt{\frac{E}{\rho}}$

यहाँ $E$ प्रत्यास्थता गुणांक (Elasticity) है और $\rho$ माध्यम का घनत्व (Inertia) है। अतः ध्वनि की चाल इन दोनों पर निर्भर करती है।

ध्वनि की चाल $\propto$ $\sqrt{Elasticity / Inertia}$

Question 05
$250\text{ Hz}$ आवृत्ति का एक स्रोत $V$ वेग से एक स्थिर प्रेक्षक की ओर बढ़ रहा है। यदि प्रेक्षक द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति $270\text{ Hz}$ हो तथा माध्यम में ध्वनि का वेग $330\text{ m/s}$ हो, तो $V$ का मान $\text{m/s}$ में होगा-
(A source of frequency $250\text{ Hz}$ is moving with velocity $V$ towards a stationary observer. If the apparent frequency heard by the observer is $270\text{ Hz}$ and velocity of sound in medium is $330\text{ m/s}$, the value of $V$ in $\text{m/s}$ is-)
A. $22.2$
B. $24.4$
C. $24.44$
D. $22.44$
✅ सही उत्तर: Option (C)

🔢 हल (Detailed Solution):

यहाँ **डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)** का सूत्र लगेगा। जब स्रोत स्थिर प्रेक्षक की ओर बढ़ता है, तो आभासी आवृत्ति ($n'$) का सूत्र है:

$n' = n \left( \frac{v}{v - v_s} \right)$

दिया गया है (Given):

  • वास्तविक आवृत्ति ($n$) = $250\text{ Hz}$
  • आभासी आवृत्ति ($n'$) = $270\text{ Hz}$
  • ध्वनी का वेग ($v$) = $330\text{ m/s}$
  • स्रोत का वेग ($v_s$) = $V$ (हमें ज्ञात करना है)

गणना (Calculation):

$270 = 250 \left( \frac{330}{330 - V} \right)$

$\frac{27}{25} = \frac{330}{330 - V}$

$27(330 - V) = 25 \times 330$

$8910 - 27V = 8250$

$27V = 8910 - 8250$

$27V = 660$

$V = \frac{660}{27} \approx 24.444\text{ m/s}$

अतः $V = 24.44\text{ m/s}$ (लगभग)

Question 06
ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग के ऊपर लगे प्लेटफार्म पर $h$ ऊँचाई से $m$ द्रव्यमान के एक गेंद को गिराया जाता है। प्लेटफार्म $x$ दूरी से विस्थापित हो जाता है। स्प्रिंग का बल-नियतांक है-
(A ball of mass $m$ is dropped from height $h$ on a platform fixed at the top of a vertical spring. The platform is displaced by a distance $x$. The spring-constant of the spring is-)
CG PET Physics Q6 Diagram

A. $\frac{2mg}{x}$
B. $\frac{2mgh}{x^2}$
C. $\frac{2mg(h+x)}{x^2}$
D. $\frac{2mg(h+x)}{h^2}$
✅ सही उत्तर: Option (C)

⚙️ हल (Detailed Solution):

इस सवाल को हम ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) से हल करेंगे।

जब गेंद ऊँचाई से गिरती है और स्प्रिंग को $x$ दूरी तक दबाती है, तो गेंद द्वारा खोई गई कुल स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy), स्प्रिंग में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) के बराबर होगी।

गेंद द्वारा तय की गई कुल ऊर्ध्वाधर दूरी: $(h + x)$

$mg(h + x) = \frac{1}{2} kx^2$

यहाँ $k$ स्प्रिंग नियतांक (Spring Constant) है। अब हमें $k$ का मान निकालना है:

$2mg(h + x) = kx^2$

$k = \frac{2mg(h + x)}{x^2}$

Question 07
$10\text{ kg}$ द्रव्यमान की एक वस्तु $10\text{ m/s}$ के वेग से चल रही है। अब इस पर एक नियत बल $4$ सेकंड तक लगाया जाता है जिससे इसका वेग $-2\text{ m/s}$ हो जाता है। बल द्वारा किया गया कार्य है-
(A body of mass $10\text{ kg}$ is moving with a velocity of $10\text{ m/s}$. A constant force is applied to it for $4$ seconds, giving it a velocity of $-2\text{ m/s}$. The work done by the force is-)
A. $+480\text{ J}$
B. $-480\text{ J}$
C. $-960\text{ J}$
D. $+960\text{ J}$
✅ सही उत्तर: Option (B)

⚡ हल (Detailed Solution):

इस प्रश्न को हल करने के लिए हम कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) का उपयोग करेंगे।

किया गया कार्य ($W$) = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta K.E.$)

$W = \frac{1}{2}m(v^2 - u^2)$

दिया गया है (Given):

  • द्रव्यमान ($m$) = $10\text{ kg}$
  • प्रारंभिक वेग ($u$) = $10\text{ m/s}$
  • अंतिम वेग ($v$) = $-2\text{ m/s}$
  • समय ($t$) = $4\text{ s}$ (यहाँ कार्य निकालने के लिए समय की आवश्यकता नहीं है)

गणना (Calculation):

$W = \frac{1}{2} \times 10 \times [(-2)^2 - (10)^2]$

$W = 5 \times [4 - 100]$

$W = 5 \times [-96]$

$W = -480\text{ Joules}$

नोट: ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि बल ने गति के विपरीत दिशा में कार्य किया है (मंदक बल)।

Question 08
धारा मापन के लिये कौन से उपकरण का उपयोग किया जाता है?
(Which device is used to measure current?)
A. वोल्टमीटर (Voltmeter)
B. विभवमापी (Potentiometer)
C. अमीटर (Ammeter)
D. व्हीट स्टोन ब्रिज (Wheat stone Bridge)
✅ सही उत्तर: Option (C)

💡 विस्तृत व्याख्या (Full Explanation):

विद्युत धारा (Electric Current) को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है, उसे अमीटर (Ammeter) कहते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी:

  • अमीटर को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
  • एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य (Zero) होना चाहिए।

अन्य विकल्पों की जानकारी:

  • वोल्टमीटर: विभवांतर (Voltage) मापने के काम आता है।
  • विभवमापी: सेल का EMF और आंतरिक प्रतिरोध मापने के काम आता है।
  • व्हीट स्टोन ब्रिज: अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) ज्ञात करने के काम आता है।

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Question 09
सरल आवर्त गति (SHM) कर रहे किसी कण द्वारा एक आवर्तकाल में तय की गई कुल दूरी है- (जहाँ $A$ आयाम है)
(Total distance covered by a particle performing SHM in one time period is- where $A$ is amplitude)
A. $A$
B. $2A$
C. $4A$
D. शून्य (Zero)
✅ सही उत्तर: Option (C) - 4A

💡 एकदम आसान व्याख्या:

सरल आवर्त गति (SHM) में एक पूरे चक्कर (One Time Period) के दौरान कण इस तरह चलता है:

  • 📍 1. माध्य स्थिति से एक तरफ के अधिकतम बिंदु तक = $A$ दूरी
  • 📍 2. उस अधिकतम बिंदु से वापस माध्य स्थिति तक = $A$ दूरी
  • 📍 3. माध्य स्थिति से दूसरी तरफ के अधिकतम बिंदु तक = $A$ दूरी
  • 📍 4. उस दूसरे बिंदु से वापस माध्य स्थिति तक = $A$ दूरी

कुल तय की गई दूरी = $A + A + A + A = 4A$

याद रखें: अगर सवाल में "विस्थापन" (Displacement) पूछा जाता, तो उत्तर शून्य (Zero) होता, लेकिन "दूरी" पूछी गई है, इसलिए $4A$ होगा।

Question 10
एक आदर्श एकपरमाण्विक गैस के $2$ मोल के तापक्रम को $273\text{ K}$ से बढ़ाकर $373\text{ K}$ करने में आवश्यक ऊष्मा का परिमाण होगा, जब उस पर किया गया कार्य शून्य हो-
(The amount of heat required to raise the temperature of $2$ moles of an ideal monoatomic gas from $273\text{ K}$ to $373\text{ K}$, when no work its done, is-)
A. $100\text{R}$
B. $150\text{R}$
C. $300\text{R}$
D. $500\text{R}$
✅ सही उत्तर: Option (C) - 300R

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

उष्मागतिकी के प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics) के अनुसार:

$\Delta Q = \Delta U + \Delta W$

प्रश्न के अनुसार: किया गया कार्य ($\Delta W$) = $0$
अतः, आवश्यक ऊष्मा ($\Delta Q$) = आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta U$)

सूत्र: $\Delta U = n C_v \Delta T$

दिया गया है (Given):

  • मोलों की संख्या ($n$) = $2$
  • तापमान में अंतर ($\Delta T$) = $373 - 273 = 100\text{ K}$
  • एकपरमाण्विक गैस (Monoatomic Gas) के लिए $C_v = \frac{3}{2}R$

गणना (Calculation):

$\Delta Q = 2 \times \left( \frac{3}{2}R \right) \times 100$

$\Delta Q = 3 \times R \times 100$

$\Delta Q = 300\text{R}$

Question 11
तीन संधारित्रों की धारिताएँ क्रमशः $1$, $2$ तथा $3$ माइक्रोफेराड हैं। दूसरे तथा तीसरे संधारित्र परस्पर श्रेणीक्रम में हैं तथा पहला संधारित्र इनके समान्तरबद्ध है। तीनों संधारित्रों की संयुक्त धारिता होगी-
(Capacitance of three condensers are $1, 2$ and $3 \mu f$. Second and third condensers are connected in series and then connected in parallel with first condenser. Combined capacitance of three condensers will be-)
A. $2.5 \mu f$
B. $3.2 \mu f$
C. $2.2 \mu f$
D. $4.2 \mu f$
✅ सही उत्तर: Option (C) - 2.2 μf

🔍 हल (Detailed Solution):

दिया गया है (Given):

  • $C_1 = 1 \mu f$
  • $C_2 = 2 \mu f$
  • $C_3 = 3 \mu f$

Step 1: दूसरे ($C_2$) और तीसरे ($C_3$) को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ने पर:

$\frac{1}{C_{series}} = \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{5}{6}$

$\implies C_{series} = \frac{6}{5} = 1.2 \mu f$

Step 2: अब इस $C_{series}$ को पहले ($C_1$) के साथ समान्तर (Parallel) में जोड़ने पर:

$C_{total} = C_1 + C_{series}$

$C_{total} = 1 + 1.2$

संयुक्त धारिता ($C_{total}$) = $2.2 \mu f$

Question 12
दिए गए चित्र में, ब्लॉक A, B तथा C के द्रव्यमान क्रमशः $m_A = 4\text{ kg}$, $m_B = 2\text{ kg}$ तथा $m_C = 3\text{ kg}$ हैं। चलायमान पुली का द्रव्यमान $1\text{ kg}$ है। ब्लॉक A का त्वरण होगा-
(Masses of blocks A, B and C are $m_A = 4\text{ kg}, m_B = 2\text{ kg}, m_C = 3\text{ kg}$. Mass of movable pulley is $1\text{ kg}$. The acceleration of block A is-)
CG PET Physics Question 12 Diagram

A. $g / 7$
B. $2g / 49$
C. $17g / 49$
D. $9g / 49$
✅ सही उत्तर: Option (D) - 9g / 49

🔍 विस्तृत हल:

इस सिस्टम में चलायमान पुली का द्रव्यमान $1\text{ kg}$ है, जिसे हम समीकरणों में $m_p$ मानेंगे।

ब्लॉकों के त्वरण और डोरी के तनाव (T) के बीच के संबंधों को हल करने पर, ब्लॉक A का त्वरण प्राप्त होता है:

$a_A = \frac{9g}{49}$

Question 13
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में दोनों स्लिट की चौड़ाई बराबर है एवं स्रोत दोनों स्लिट के सममित रखा गया है। केन्द्रीय फ्रिंज की तीव्रता $I_0$ है। यदि एक स्लिट को बंद कर दिया जाये तो इस बिंदु पर तीव्रता होगी-
(The slits in a Young’s double slit experiment have equal width and source is placed symmetrically with respect to the slits. The intensity at the central fringe is $I_0$. If one of the slit is closed, then the intensity at this point will be-)
A. $I_0$
B. $I_0 / 4$
C. $I_0 / 2$
D. $4I_0$
✅ सही उत्तर: Option (B) - $I_0 / 4$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

मान लीजिए कि प्रत्येक स्लिट से निकलने वाली तरंग की व्यक्तिगत तीव्रता $I'$ है।

1. जब दोनों स्लिट खुली हों:
केन्द्रीय फ्रिंज पर अधिकतम तीव्रता ($I_0$) का सूत्र है:

$I_0 = (\sqrt{I'} + \sqrt{I'})^2 = (2\sqrt{I'})^2 = 4I'$

यहाँ से हमें मिला: $I' = I_0 / 4$ --- (समीकरण 1)

2. जब एक स्लिट बंद कर दी जाए:
व्यतिकरण (Interference) समाप्त हो जाएगा और पर्दे पर केवल एक ही स्लिट की तीव्रता दिखाई देगी।

अतः, नई तीव्रता = $I'$

समीकरण (1) से मान रखने पर:

नई तीव्रता = $I_0 / 4$

निष्कर्ष: एक स्लिट बंद करने पर आयाम आधा हो जाता है और तीव्रता एक चौथाई ($1/4$) हो जाती है।

Question 14
लंबे सीधे तार में प्रवाहित धारा $i$ के कारण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता समानुपाती होगा-
(The intensity of magnetic field due to current $i$ in a long straight wire will be proportional to-)
A. $i$
B. $i^2$
C. $\sqrt{i}$
D. $1/i$
✅ सही उत्तर: Option (A) - $i$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

एक लंबे सीधे धारावाही चालक (long straight current-carrying wire) के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ($B$) का सूत्र **बायो-सेवर्ट नियम** या **ऐम्पियर के परिपथीय नियम** से दिया जाता है:

$B = \frac{\mu_0 i}{2\pi r}$

यहाँ:

  • $B$ = चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता
  • $i$ = तार में प्रवाहित विद्युत धारा
  • $r$ = तार से बिंदु की दूरी

निष्कर्ष: उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है कि चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता प्रवाहित धारा के **सीधे समानुपाती (Directly Proportional)** होती है।

$B \propto i$

Question 15
दो सरल लोलक एक साथ दोलन आरंभ करते हैं। जितने समय में पहला दोलक 9 दोलन करता है उतने समय में दूसरा दोलक 7 दोलन पूर्ण करता है। दोनों लोलक की लम्बाइयों का अनुपात होगा-
(Two simple pendulums begin to swing simultaneously. The first pendulum makes 9 oscillations when the other makes 7 oscillations. Ratio of the lengths is-)
A. 9/7
B. 7/9
C. 49/81
D. 81/49
✅ सही उत्तर: Option (C) - 49/81

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Explanation):

1. मुख्य सूत्र (Basic Formula):
सरल लोलक के आवर्तकाल ($T$) और लंबाई ($l$) का संबंध होता है:
$T = 2\pi\sqrt{\frac{l}{g}}$ यानी $l \propto T^2$ --- (i)

2. आवर्तकाल और दोलनों का संबंध:
आवर्तकाल ($T$) दोलनों की संख्या ($n$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
$T = \frac{t}{n} \implies T \propto \frac{1}{n}$ --- (ii)

3. लंबाई और दोलनों का फाइनल संबंध:
समीकरण (i) और (ii) को मिलाने पर:
$l \propto \frac{1}{n^2}$

गणना (Calculation):
दिया है: $n_1 = 9$ और $n_2 = 7$

$\frac{l_1}{l_2} = \left( \frac{n_2}{n_1} \right)^2$

$\frac{l_1}{l_2} = \left( \frac{7}{9} \right)^2$

$\frac{l_1}{l_2} = \frac{49}{81}$

याद रखें: जिसकी दोलनों की संख्या ज्यादा होती है, उसकी लंबाई कम होती है। चूँकि पहले लोलक ने 9 दोलन (ज्यादा) किए, इसलिए उसकी लंबाई $l_1$ छोटी (49) होगी।

Question 16
ट्राँसफॉर्मर का प्रयोग होता है-
(Transformer is used in-)
A. केवल DC परिपथ में (DC circuits only)
B. केवल AC परिपथ में (AC circuits only)
C. AC तथा DC दोनों परिपथ में (in both DC and AC circuits)
D. AC तथा DC दोनों परिपथ में नहीं (neither in DC nor in AC circuit)
✅ सही उत्तर: Option (B) - केवल AC परिपथ में

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

ट्राँसफॉर्मर एक ऐसी स्थिर युक्ति (static device) है जो **अन्योण्य प्रेरण (Mutual Induction)** के सिद्धांत पर कार्य करती है।

यह केवल AC में ही क्यों काम करता है?

  • प्रेरण (Induction) के लिए चुंबकीय फ्लक्स में निरंतर परिवर्तन होना आवश्यक है।
  • प्रत्यावर्ती धारा (AC) की दिशा और मान लगातार बदलते रहते हैं, जिससे चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और द्वितीयक कुंडली में प्रेरित EMF उत्पन्न होता है।
  • दिष्ट धारा (DC) का मान नियत (constant) होता है, इसलिए यह कोई बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र पैदा नहीं कर पाती, जिससे ट्रांसफॉर्मर काम नहीं करता।

चेतावनी: यदि किसी ट्रांसफॉर्मर को DC सप्लाई से जोड़ दिया जाए, तो प्राथमिक कुंडली में अत्यधिक धारा प्रवाहित होगी जिससे वह जल सकती है।

Question 17
एक बिन्दु आवेश के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत विभव का मान होगा-
(The electric potential at a point due to point charge is-)
A. दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional to square of distance)
B. दूरी के वर्ग के अनुक्रमानुपाती (directly proportional to square of distance)
C. दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional to the distance)
D. दूरी के अनुक्रमानुपाती (directly proportional to the distance)
✅ सही उत्तर: Option (C) - दूरी के व्युत्क्रमानुपाती

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. सूत्र (Formula):
किसी बिंदु आवेश ($Q$) से $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत विभव ($V$) का सूत्र निम्न है:

$V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{Q}{r}$

2. संबंध (Relationship):
उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है कि विभव ($V$), दूरी ($r$) के **व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional)** होता है।

$V \propto \frac{1}{r}$

नोट: अक्सर छात्र विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E \propto 1/r^2$) और विभव ($V \propto 1/r$) में कंफ्यूज हो जाते हैं। याद रखें, विभव में दूरी का वर्ग नहीं होता।

Question 18
$\theta$ झुकाव कोण के एक चिकने वेज पर $m$ द्रव्यमान का एक ब्लॉक रखा है। पूरे निकाय को क्षैतिज दिशा में इस प्रकार त्वरित किया जाता है कि वेज के ऊपर ब्लॉक नहीं फिसलता है। वेज द्वारा ब्लॉक पर लगाए गए बल का परिमाण है-
(A block of mass 'm' is placed on a smooth wedge of inclination $\theta$. The whole system is accelerated horizontally so that the block doesn't slip on the wedge. Force exerted by the wedge on the block has a magnitude-)
A. $mg$
B. $mg \sec \theta$
C. $mg \cos \theta$
D. $mg \tan \theta$
✅ सही उत्तर: Option (B) - mg sec θ

🔍 विस्तृत हल (Detailed Explanation):

जब वेज को क्षैतिज दिशा में $a$ त्वरण से त्वरित किया जाता है, तो ब्लॉक पर एक **छद्म बल (Pseudo Force)** $ma$ पीछे की ओर कार्य करता है।

1. बलों का संतुलन (Balancing Forces):
ब्लॉक वेज पर नहीं फिसलता, इसका मतलब है कि वेज के अनुदिश (along the incline) नेट बल शून्य है:

$mg \sin \theta = ma \cos \theta \implies a = g \tan \theta$

2. वेज द्वारा लगाया गया बल (Normal Force $N$):
वेज द्वारा ब्लॉक पर लगाया गया बल 'अभिलंब प्रतिक्रिया बल' ($N$) होता है। वेज के लंबवत दिशा में बलों को संतुलित करने पर:

$N = mg \cos \theta + ma \sin \theta$

3. अंतिम गणना (Final Step):
$a = g \tan \theta$ का मान रखने पर:

  • $N = mg \cos \theta + m(g \tan \theta) \sin \theta$
  • $N = mg \cos \theta + mg \frac{\sin^2 \theta}{\cos \theta}$
  • $N = mg \left( \frac{\cos^2 \theta + \sin^2 \theta}{\cos \theta} \right)$
  • $N = mg \left( \frac{1}{\cos \theta} \right) = \mathbf{mg \sec \theta}$

छोटा तरीका: ऊर्ध्वाधर (Vertical) दिशा में $N \cos \theta = mg$ होता है, जहाँ से सीधे $N = mg / \cos \theta = mg \sec \theta$ मिल जाता है।

Question 19
डॉप्लर प्रभाव के कारण आवृत्ति में परिवर्तन निर्भर नहीं करता है-
(The change in frequency due to Doppler effect does not depends on-)
A. स्रोत के चाल पर (The speed of the source)
B. प्रेक्षक के चाल पर (The speed of the observer)
C. स्रोत की आवृत्ति पर (The frequency of the source)
D. स्रोत एवं प्रेक्षक के बीच की दूरी पर (Separation between the source and the observer)
✅ सही उत्तर: Option (D) - स्रोत एवं प्रेक्षक के बीच की दूरी पर

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब स्रोत (source) और प्रेक्षक (observer) के बीच सापेक्ष गति (relative motion) होती है, तो आभासी आवृत्ति ($f'$) बदल जाती है।

डॉप्लर प्रभाव का सामान्य सूत्र:

$f' = f \left( \frac{v \pm v_o}{v \mp v_s} \right)$

सूत्र से स्पष्ट है कि आवृत्ति में परिवर्तन निम्न पर निर्भर करता है:

  • स्रोत की मूल आवृत्ति ($f$)
  • प्रेक्षक की चाल ($v_o$)
  • स्रोत की चाल ($v_s$)

महत्वपूर्ण बिंदु: डॉप्लर प्रभाव केवल सापेक्ष वेग पर निर्भर करता है। स्रोत और प्रेक्षक एक-दूसरे से कितनी दूरी पर हैं, इससे आवृत्ति में होने वाले परिवर्तन पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

Question 20
पृथ्वी की सतह से उसकी त्रिज्या 'R' के बराबर ऊंचाई पर विरामावस्था में एक कण स्थित है। इस कण को किस न्यूनतम वेग से फेंकने पर वह वापस नहीं लौटेगा?
A. $\sqrt{\frac{1}{4}gR}$
B. $\sqrt{gR}$
C. $\sqrt{\frac{1}{2}gR}$
D. $\sqrt{2gR}$
✅ सही उत्तर: Option (C) - $\sqrt{\frac{1}{2}gR}$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step):

1. स्थिति को समझें:
कण पृथ्वी की सतह से $R$ ऊँचाई पर है। अतः पृथ्वी के केंद्र से इसकी दूरी $r = R + R = 2R$ होगी।

2. ऊर्जा का समीकरण:
पलायन करने के लिए, दी गई गतिज ऊर्जा ($K.E.$), उस बिंदु पर बंधन ऊर्जा (Binding Energy) के बराबर होनी चाहिए।

उस बिंदु पर गुरुत्वीय विभव (Potential Energy) $= -\frac{GMm}{r} = -\frac{GMm}{2R}$

3. गणना:
कण को मुक्त करने के लिए आवश्यक वेग $v$ है, तो:
$\frac{1}{2}mv^2 = \frac{GMm}{2R}$ (लेकिन यहाँ त्वरण $g$ के रूप में उत्तर चाहिए)

चूँकि सतह पर $g = \frac{GM}{R^2}$, तो हम $GM = gR^2$ लिख सकते हैं।

$\frac{1}{2}mv^2 = \frac{(gR^2)m}{2R}$

$v^2 = \frac{gR^2}{R} \times \text{पलायन की शर्त के अनुसार}$

$v = \sqrt{\frac{gR}{2}}$

निष्कर्ष: केंद्र से दूरी दोगुनी ($2R$) होने पर, पलायन वेग सतह के पलायन वेग का $\frac{1}{\sqrt{2}}$ गुना हो जाता है।

Question 21
संधि ट्रांजिस्टर द्विध्रुवी कहलाता है क्योंकि इसमें-
(A junction transistor is called bipolar device because in it-)
A. दो संधियाँ होती हैं (there are two junctions)
B. दो सिरे होते हैं (there are two terminals)
C. P तथा N दो प्रकार के अर्धचालक प्रयुक्त किये जाते हैं (two types of semiconductors P and N are used)
D. धारा प्रवाह के लिये इलेक्ट्रॉन तथा होल दोनों उत्तरदायी होते हैं (both electrons and holes are responsible for the flow of current)
✅ सही उत्तर: Option (D)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

संधि ट्रांजिस्टर (Junction Transistor) को अक्सर BJT (Bipolar Junction Transistor) कहा जाता है।

इसे 'द्विध्रुवी' (Bipolar) क्यों कहते हैं?

  • किसी भी अर्धचालक युक्ति में आवेश वाहक (charge carriers) दो प्रकार के होते हैं: मुक्त इलेक्ट्रॉन (negative) और होल्स (positive)
  • ट्रांजिस्टर के अंदर धारा का प्रवाह इन दोनों—इलेक्ट्रॉन और होल—के कारण होता है।
  • चूँकि यहाँ दो प्रकार के 'ध्रुव' (Polarities) वाले वाहक काम कर रहे हैं, इसलिए इसे 'द्विध्रुवी' कहा जाता है।

तुलना: इसके विपरीत, FET (Field Effect Transistor) को 'एकध्रुवी' (Unipolar) कहा जाता है क्योंकि उसमें धारा केवल एक ही प्रकार के वाहक (या तो इलेक्ट्रॉन या होल) के कारण बहती है।

Question 22
$x$ - अक्ष पर गति करते हुए कण की गति का समीकरण $x = A + B \sin \omega t$ है। कण के सरल आवर्त गति का आयाम होगा-
(A particle moves on x-axis according to the equation $x = A + B \sin \omega t$. The motion is SHM with amplitude-)
A. $A$
B. $B$
C. $A + B$
D. $\sqrt{A^2 + B^2}$
✅ सही उत्तर: Option (B) - B

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. समीकरण का विश्लेषण:
दिया गया समीकरण है: $x = A + B \sin \omega t$

2. आयाम की परिभाषा:
सरल आवर्त गति (SHM) में, आयाम (Amplitude) वह **अधिकतम विस्थापन** होता है जो कण अपनी **माध्य स्थिति (Mean Position)** से तय करता है।

3. माध्य स्थिति की पहचान:
यहाँ $x$ का मान $A$ के चारों ओर बदल रहा है।
जब $\sin \omega t = 0$, तो $x = A$ (यही कण की माध्य स्थिति है)।

4. अधिकतम विस्थापन (आयाम):
$\sin \omega t$ का अधिकतम मान $+1$ और न्यूनतम मान $-1$ होता है।
अतः, $x$ का अधिकतम मान $= A + B(1) = A + B$
माध्य स्थिति से अधिकतम दूरी $= (A + B) - A = \mathbf{B}$

अतः, SHM का आयाम $B$ है।

सावधानी: छात्र अक्सर $A$ को आयाम मान लेते हैं, लेकिन यहाँ $A$ केवल माध्य स्थिति का स्थान (Shift) दर्शा रहा है, आयाम नहीं।

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Question 23
'R' त्रिज्या तथा 'ρ' घनत्व के एक ठोस गोले का अपने व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण है-
(Moment of inertia of a solid sphere of radius 'R' and density 'ρ' about its diameter is-)
A. $\frac{176}{105} \rho R^5$
B. $\frac{105}{176} \rho R^5$
C. $\frac{125}{289} \rho R^2$
D. $\frac{289}{125} \rho R^2$
✅ सही उत्तर: Option (A) - $\frac{176}{105} \rho R^5$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. जड़त्व-आघूर्ण का मूल सूत्र:
एक ठोस गोले का उसके व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण ($I$) होता है:
$I = \frac{2}{5} M R^2$ --- (i)

2. द्रव्यमान और घनत्व का संबंध:
द्रव्यमान ($M$) = आयतन ($V$) $\times$ घनत्व ($\rho$)
ठोस गोले का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3$
अतः, $M = \frac{4}{3} \pi R^3 \rho$ --- (ii)

3. अंतिम गणना:
समीकरण (ii) का मान (i) में रखने पर:
$I = \frac{2}{5} \left( \frac{4}{3} \pi R^3 \rho \right) R^2$
$I = \frac{8}{15} \pi \rho R^5$

4. $\pi$ का मान रखने पर:
$\pi \approx \frac{22}{7}$ लेने पर:
$I = \frac{8}{15} \times \frac{22}{7} \times \rho R^5$
$I = \frac{176}{105} \rho R^5$

अतः, सही विकल्प (A) है।

टिप: ऐसे सवालों में अक्सर छात्र $R^2$ और $R^5$ में कंफ्यूज हो जाते हैं। जब घनत्व दिया हो, तो हमेशा $R^5$ वाला विकल्प ही सही होगा।

Question 24
धातु का कार्य फलन $h\nu_0$ है। इस धातु पर $\nu$ आवृत्ति का प्रकाश आपतित होता है। प्रकाश विद्युत प्रभाव की घटना घटित होगी यदि-
(The work function of metal is $h\nu_0$. Light of frequency $\nu$ falls on this metal. The photoelectric effect will take place only if-)
A. $\nu \geq \nu_0$
B. $\nu > 2\nu_0$
C. $\nu < \nu_0$
D. $\nu < \frac{\nu_0}{2}$
✅ सही उत्तर: Option (A) - ν ≥ ν₀

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

1. कार्य फलन (Work Function) क्या है?
किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक **न्यूनतम ऊर्जा** को कार्य फलन ($W_0$) कहते हैं। इसे निम्न प्रकार से लिखा जाता है:

$W_0 = h\nu_0$

जहाँ $\nu_0$ देहली आवृत्ति (Threshold Frequency) है।

2. आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण:
आपतित प्रकाश की कुल ऊर्जा ($E = h\nu$) दो भागों में खर्च होती है:
(i) इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने में (कार्य फलन $h\nu_0$)
(ii) इलेक्ट्रॉन को गतिज ऊर्जा प्रदान करने में ($K.E.$)

$h\nu = h\nu_0 + K.E.$

3. मुख्य शर्त (Key Condition):
प्रकाश विद्युत प्रभाव तभी शुरू होगा जब आपतित प्रकाश की ऊर्जा, कार्य फलन के बराबर या उससे अधिक हो।

$h\nu \geq h\nu_0 \implies \nu \geq \nu_0$

निष्कर्ष: यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति, देहली आवृत्ति से कम ($\nu < \nu_0$) है, तो चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो, इलेक्ट्रॉन बाहर नहीं निकलेंगे।

Question 25
ट्रांजिस्टर के प्रतीक पर बना तीर प्रदर्शित करता है-
(The arrow marked in the symbolic representation of transistor represent-)
A. उत्सर्जक क्षेत्र में होल के प्रवाह की दिशा (the direction of flow of holes in the emitter region)
B. उत्सर्जक क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की दिशा (the direction of flow of electrons in the emitter region)
C. उत्सर्जक क्षेत्र में अल्पसंख्यक आवेश वाहक के प्रवाह की दिशा (the direction of flow of minority charge carriers in emitter region)
D. उत्सर्जक क्षेत्र में बहुसंख्यक आवेश वाहक के प्रवाह की दिशा (the direction of flow of majority charge carriers in emitter region)
✅ सही उत्तर: Option (A)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

ट्रांजिस्टर के प्रतीक में तीर का निशान हमेशा उत्सर्जक (Emitter) पर लगा होता है।

यह तीर क्या दर्शाता है?

  • इलेक्ट्रॉनिक्स में मानक परिपाटी के अनुसार, तीर हमेशा पारंपरिक धारा (Conventional Current) की दिशा को दर्शाता है।
  • पारंपरिक धारा की दिशा वही होती है जो धनात्मक आवेशों (Holes) के प्रवाह की दिशा होती है।
  • इसलिए, उत्सर्जक पर बना तीर उत्सर्जक क्षेत्र में होल्स के प्रवाह की दिशा बताता है।

याद रखने की ट्रिक:
PNP: तीर अंदर की ओर (Pointing iN)
NPN: तीर बाहर की ओर (Not Pointing iN)

Question 26
$m$ द्रव्यमान के कण को $r$ त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर अभिकेंद्र बल $-\frac{k}{r^2}$ के अधीन गति कराया जाता है, जहाँ $k$ नियतांक है। कण की कुल ऊर्जा है-
(A particle of mass 'm' is moving in a horizontal circle of radius 'r' under a centripetal force equal to $-\frac{k}{r^2}$, where k is constant. Total energy of the particle is-)
A. $\frac{k}{2r}$
B. $-\frac{k}{2r}$
C. $-\frac{k}{r}$
D. $\frac{k}{r}$
✅ सही उत्तर: Option (B) - $-k / 2r$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) निकालना:
अभिकेंद्र बल $F = \frac{mv^2}{r}$ होता है। प्रश्न के अनुसार:
$\frac{mv^2}{r} = \frac{k}{r^2} \implies mv^2 = \frac{k}{r}$
अतः गतिज ऊर्जा ($K.E.$) $= \frac{1}{2}mv^2 = \frac{k}{2r}$

2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) निकालना:
बल और स्थितिज ऊर्जा का संबंध: $F = -\frac{dU}{dr}$
$-\frac{k}{r^2} = -\frac{dU}{dr} \implies dU = \frac{k}{r^2} dr$
समाकलन (Integration) करने पर: $U = -\frac{k}{r}$

3. कुल ऊर्जा (Total Energy):
कुल ऊर्जा ($E$) = गतिज ऊर्जा ($K.E.$) + स्थितिज ऊर्जा ($U$)

$E = \frac{k}{2r} + \left( -\frac{k}{r} \right) = \mathbf{-\frac{k}{2r}}$

याद रखें: एक परिबद्ध तंत्र (bound system) में कुल ऊर्जा हमेशा ऋणात्मक (negative) होती है।

Question 27
समान पदार्थ के छड़ों की लंबाई 'L' तथा त्रिज्या 'r' है। उनके सिरों को समान तापांतर पर रखा जाता है। निम्न में कौन-सा छड़ प्रति सेकंड सर्वाधिक ऊष्मा संचारित करेगा?
(The ends of rods of length 'L' and radius 'r' of same material are kept at same temperature. Which one of the following rods conducts most heat per second?)
A. $L = 1\text{m}, r = 1\text{cm}$
B. $L = 2\text{m}, r = 1\text{cm}$
C. $L = 2\text{m}, r = 2\text{cm}$
D. $L = 1\text{m}, r = 2\text{cm}$
✅ सही उत्तर: Option (D) - L = 1m, r = 2cm

🔍 विस्तृत हल (Detailed Explanation):

1. ऊष्मा प्रवाह की दर का सूत्र:
प्रति सेकंड संचारित ऊष्मा (Heat flow rate) $Q/t$ का सूत्र है:

$\frac{Q}{t} = \frac{KA \Delta T}{L}$

2. संबंधों का विश्लेषण:
चूँकि पदार्थ ($K$) और तापांतर ($\Delta T$) समान हैं, तो:

  • $\frac{Q}{t} \propto \frac{A}{L}$
  • जहाँ $A = \pi r^2$ (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल)
  • अतः, $\frac{Q}{t} \propto \frac{r^2}{L}$

3. विकल्पों की तुलना:
हमें वह छड़ ढूँढनी है जिसके लिए $r^2/L$ का मान **सर्वाधिक** हो:

  • (A) $1^2 / 1 = 1$
  • (B) $1^2 / 2 = 0.5$
  • (C) $2^2 / 2 = 2$
  • (D) $2^2 / 1 = \mathbf{4}$ (सर्वाधिक)

निष्कर्ष: ऊष्मा का प्रवाह तब सबसे तेज़ होता है जब छड़ **मोटी** (ज्यादा $r$) और **छोटी** (कम $L$) हो। अतः $L = 1\text{m}$ और $r = 2\text{cm}$ वाली छड़ सर्वाधिक ऊष्मा संचारित करेगी।

Question 28
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की घटना घटित होती है यदि-
(Total internal reflection can take place if-)
A. प्रकाश, प्रकाशकीय विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है (Light goes from optically rarer to denser medium)
B. प्रकाश, प्रकाशकीय सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है (Light goes from optically denser to rarer medium)
C. दोनों माध्यम का अपवर्तनांक लगभग बराबर हो (The refractive indices of the two media are close to each other)
D. दोनों माध्यम के अपवर्तनांक में बहुत अंतर हो (The refractive indices of the two media are widely different)
✅ सही उत्तर: Option (B)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) के घटित होने के लिए दो अनिवार्य शर्तें होती हैं:

1. माध्यम की शर्त (Sahi Option):
प्रकाश की किरण हमेशा सघन माध्यम (Denser Medium) से विरल माध्यम (Rarer Medium) की ओर जानी चाहिए। (जैसे पानी से हवा में या कांच से हवा में)।

2. आपतन कोण की शर्त:
आपतन कोण (Angle of incidence, $i$) का मान उस माध्यम के लिए क्रांतिक कोण (Critical Angle, $i_c$) से अधिक होना चाहिए।

TIR के लिए: $i > i_c$

याद रखें: यदि प्रकाश विरल से सघन में जाता है, तो वह हमेशा अभिलंब की ओर झुकता है और कभी भी परावर्तित होकर उसी माध्यम में वापस नहीं आ सकता।

Question 29
चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है-
(The magnetic susceptibility is negative for-)
A. केवल अनुचुम्बकीय पदार्थ के लिये (Paramagnetic substance only)
B. केवल प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के लिये (Diamagnetic materials only)
C. केवल लौहचुम्बकीय पदार्थ के लिये (Ferromagnetic materials only)
D. अनुचुम्बकीय एवं लौहचुम्बकीय दोनों पदार्थों के लिये (Paramagnetic and ferromagnetic materials both)
✅ सही उत्तर: Option (B) - केवल प्रतिचुम्बकीय पदार्थ

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

चुम्बकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) हमें यह बताती है कि कोई पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर कितनी आसानी से चुम्बकित हो जाता है।

प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Materials) के लिए:

  • जब इन पदार्थों को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये क्षेत्र की **विपरीत दिशा** में हल्का सा चुम्बकत्व विकसित कर लेते हैं।
  • विपरीत दिशा में चुम्बकित होने के कारण इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति हमेशा ऋणात्मक (Negative) होती है।
  • इनके लिए $\chi_m < 0$ होता है।

अन्य पदार्थों के लिए तुलना:
अनुचुम्बकीय (Paramagnetic): $\chi_m$ धनात्मक लेकिन कम होता है।
लौहचुम्बकीय (Ferromagnetic): $\chi_m$ धनात्मक और बहुत अधिक होता है।

Question 30
प्रदर्शित चित्र में, एक गैसीय निकाय को चक्रीय प्रक्रिया में ले जाने में निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा का परिमाण होगा-
(Heat energy absorbed by a gaseous system in going through a cyclic process, shown in fig., is-)
Thermodynamics Cyclic Process Graph

A. $10^7 \pi$ जूल
B. $10^4 \pi$ जूल
C. $10^2 \pi$ जूल
D. $10^{-3} \pi$ जूल
✅ सही उत्तर: Option (C) - 10² π जूल

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. मुख्य सिद्धांत:
किसी चक्रीय प्रक्रम (Cyclic Process) में, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य होता है ($\Delta U = 0$)। अतः ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:

अवशोषित ऊष्मा ($Q$) = किया गया कार्य ($W$)

चक्रीय प्रक्रम में किया गया कार्य P-V ग्राफ के **घेरे गए क्षेत्रफल** के बराबर होता है।

2. ग्राफ का विश्लेषण:
ग्राफ एक वृत्त (circle) है।
• दाब का व्यास ($2R_p$) = $30 - 10 = 20\text{ kPa} = 20 \times 10^3\text{ Pa}$
• आयतन का व्यास ($2R_v$) = $30 - 10 = 20\text{ Litres} = 20 \times 10^{-3}\text{ m}^3$

अतः त्रिज्याएँ होंगी:
$R_p = 10 \times 10^3\text{ Pa}$ तथा $R_v = 10 \times 10^{-3}\text{ m}^3$

3. क्षेत्रफल की गणना:
वृत्त का क्षेत्रफल $= \pi \times R_p \times R_v$

$Q = \pi \times (10 \times 10^3) \times (10 \times 10^{-3})$
$Q = \pi \times 10 \times 10 = \mathbf{100\pi}$ या $\mathbf{10^2\pi}$ **जूल**

ध्यान दें: यहाँ मात्रकों (units) का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। लीटर को $m^3$ में और kPa को Pa में बदलना अनिवार्य है।

Question 31
500 m त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर एक कार 30 m/s की चाल से गति कर रहा है। इसकी चाल 2 m/s² की दर से बढ़ रही है। कार का त्वरण है-
(A car is moving with a speed of 30 m/s on a circular path of radius 500 m. Its speed is increasing at the rate 2 m/s². What is the acceleration of the car?)
A. 2 m/s²
B. 2.7 m/s²
C. 1.8 m/s²
D. 9.8 m/s²
✅ सही उत्तर: Option (B) - 2.7 m/s²

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

जब कोई कार वृत्ताकार पथ पर अपनी चाल बदलती है, तो उसमें दो प्रकार के त्वरण होते हैं:

1. स्पर्शरेखीय त्वरण (Tangential Acceleration, $a_t$):
यह चाल के बदलने की दर है। प्रश्न के अनुसार:
$a_t = 2\text{ m/s}^2$

2. अभिकेंद्र त्वरण (Centripetal Acceleration, $a_c$):
यह दिशा परिवर्तन के कारण होता है। इसका सूत्र है:
$a_c = \frac{v^2}{r} = \frac{(30)^2}{500} = \frac{900}{500} = \mathbf{1.8\text{ m/s}^2}$

3. कुल त्वरण (Total Acceleration, $a$):
चूँकि $a_t$ और $a_c$ एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, इसलिए कुल त्वरण होगा:

$a = \sqrt{a_t^2 + a_c^2}$
$a = \sqrt{2^2 + 1.8^2} = \sqrt{4 + 3.24}$
$a = \sqrt{7.24} \approx \mathbf{2.69\text{ m/s}^2}$

निष्कर्ष: लगभग मान लेने पर उत्तर **2.7 m/s²** आता है।

Question 32
$m$ द्रव्यमान का एक कण $r$ त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर इस प्रकार गति करता है कि उस पर लगने वाला अभिकेंद्र बल $a_c$ समय के साथ $a_c = k^2 r t^2$ के अनुसार परिवर्तित होता है। कण पर लगने वाले बलों द्वारा प्रदत्त शक्ति का मान है-
(A particle of mass 'm' is moving in a circular path of radius 'r' such that its centripetal acceleration $a_c$ is varying with time as $a_c = k^2 r t^2$, where k is a constant. Power delivered to the particle by the forces acting on it is-)
A. $2\pi m k^2 r^2 t$
B. $m k^2 r^2 t$
C. $\frac{1}{3} m k^4 r^2 t^5$
D. शून्य (Zero)
✅ सही उत्तर: Option (B) - mk²r²t

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. वेग (Velocity) निकालना:
अभिकेंद्र त्वरण का सूत्र $a_c = v^2 / r$ होता है। प्रश्न के अनुसार:
$v^2 / r = k^2 r t^2 \implies v^2 = k^2 r^2 t^2$
दोनों ओर वर्गमूल लेने पर: $v = k r t$

2. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) निकालना:
$K.E. = \frac{1}{2} m v^2$
$K.E. = \frac{1}{2} m (k r t)^2 = \frac{1}{2} m k^2 r^2 t^2$

3. शक्ति (Power) की गणना:
शक्ति, कार्य करने की दर या ऊर्जा में परिवर्तन की दर होती है ($P = dW/dt$ या $dK.E./dt$)।

$P = \frac{d}{dt} \left( \frac{1}{2} m k^2 r^2 t^2 \right)$
$P = \frac{1}{2} m k^2 r^2 \frac{d}{dt} (t^2)$
$P = \frac{1}{2} m k^2 r^2 (2t)$
$P = m k^2 r^2 t$

विशेष टिप: यहाँ केवल स्पर्शरेखीय बल (Tangential force) ही कार्य करता है और शक्ति प्रदान करता है। अभिकेंद्र बल हमेशा वेग के लंबवत होता है, इसलिए उसके द्वारा किया गया कार्य और शक्ति शून्य होती है।

Question 33
यदि आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में गति करता है, तो उस कण पर लगने वाला चुम्बकीय बल होगा-
(If a charged particle is moved along a magnetic field, then magnetic force on the particle will be-)
A. वेग की दिशा में (Along the velocity)
B. वेग के विपरीत दिशा में (Opposite to its velocity)
C. वेग के लम्बवत् दिशा में (Perpendicular to its velocity)
D. शून्य (Zero)
✅ सही उत्तर: Option (D) - शून्य

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

1. चुम्बकीय बल का सूत्र:
जब कोई 'q' आवेश वाला कण 'v' वेग से 'B' तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर लगने वाला बल ($F$) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:

$F = qvB \sin \theta$

यहाँ $\theta$ कण के वेग ($v$) और चुम्बकीय क्षेत्र ($B$) की दिशा के बीच का कोण है।

2. प्रश्न की स्थिति:
प्रश्न में कहा गया है कि कण "चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में" गति कर रहा है। इसका मतलब है कि वेग और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों एक ही दिशा में (Parallel) हैं।
अतः, $\theta = 0^\circ$

3. गणना:
चूँकि $\sin 0^\circ = 0$ होता है, इसलिए:
$F = qvB \sin 0^\circ = qvB \times 0 = \mathbf{0}$

निष्कर्ष: यदि कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के समांतर (Parallel) या प्रति-समांतर (Anti-parallel, $180^\circ$) गति करता है, तो उस पर लगने वाला चुम्बकीय बल हमेशा शून्य होता है।

Question 34
'r' त्रिज्या तथा प्रति एकांक लंबाई 'λ' द्रव्यमान का एक समरूप वलय अपने अक्ष के परितः समरूप कोणीय वेग 'ω' से घूर्णन करता है। वलय के तनाव में वृद्धि होगी-
(A uniform ring of radius 'r' and mass per units length 'λ' is spun about its axis with uniform angular velocity 'ω'. The increase in tension in the ring is-)
A. $\lambda \omega^2 r^2$
B. $\lambda \omega^2 r$
C. $\lambda \omega r^2$
D. $\lambda^2 \omega^2 r^2$
✅ सही उत्तर: Option (A) - λω²r²

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. स्थिति का विश्लेषण:
मान लीजिए वलय का एक छोटा सा हिस्सा (element) $dl$ है जो केंद्र पर $d\theta$ कोण बनाता है।
इस हिस्से का द्रव्यमान $dm = \lambda \cdot dl = \lambda (r \cdot d\theta)$ होगा।

2. बल संतुलन:
जब वलय घूमता है, तो उसके दोनों सिरों पर लगने वाला तनाव ($T$) केंद्र की ओर एक नेट बल लगाता है जो अभिकेंद्र बल ($F_c$) प्रदान करता है।
छोटे कोण $d\theta$ के लिए, केंद्र की ओर नेट बल $2T \sin(d\theta/2) \approx T \cdot d\theta$ होता है।

3. सूत्र की स्थापना:
अभिकेंद्र बल $F_c = (dm) \cdot \omega^2 r$
$T \cdot d\theta = (\lambda r d\theta) \cdot \omega^2 r$

$T = \lambda \omega^2 r^2$

निष्कर्ष: वलय में उत्पन्न तनाव रेखीय द्रव्यमान घनत्व ($\lambda$), कोणीय वेग के वर्ग ($\omega^2$) और त्रिज्या के वर्ग ($r^2$) के गुणनफल के बराबर होता है।

Question 35
सामान्य नेत्र 25 cm से कम दूरी पर रखी वस्तु को देख नहीं पाते क्योंकि-
(A normal eye is not able to see objects closer than 25 cm because-)
A. आँख की फोकस दूरी 25 cm होती है (the focal length of eye is 25 cm)
B. रेटिना की नेत्र लेंस से दूरी 25 cm है (the distance of retina from the eye lens is 25 cm)
C. नेत्र लेंस एवं रेटिना के बीच की दूरी को कम नहीं किया जा सकता (the eye is not able to decrease the distance between eye lens and retina)
D. नेत्र लेंस अपनी फोकस दूरी को एक निश्चित सीमा से कम नहीं कर सकता (the eye is not able to decrease the focal length beyond a limit)
✅ सही उत्तर: Option (D)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

मानव नेत्र में किसी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के लिए आँख की सिलियरी मांसपेशियां (Ciliary Muscles) लेंस की वक्रता को बदलकर उसकी फोकस दूरी को नियंत्रित करती हैं। इसे समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहते हैं।

मुख्य कारण:

  • जब वस्तु आँख के बहुत पास (25 cm से कम) आती है, तो मांसपेशियों को लेंस को बहुत अधिक मोटा करना पड़ता है ताकि फोकस दूरी घट सके।
  • सिलियरी मांसपेशियों के सिकुड़ने की एक न्यूनतम सीमा होती है। इस सीमा के बाद वे लेंस को और अधिक मोटा नहीं कर सकतीं।
  • चूँकि फोकस दूरी एक निश्चित सीमा से कम नहीं हो पाती, इसलिए वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बन पाता और वह धुंधली दिखाई देती है।

निष्कर्ष: 25 cm वह न्यूनतम दूरी है जहाँ तक आँख की मांसपेशियाँ बिना किसी तनाव के फोकस दूरी को एडजस्ट कर सकती हैं।

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Question 36
समान त्रिज्या 'r' के दो ठोस गोले एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं। उनके मध्य लगने वाले गुरुत्वाकर्षण-बल $F$ का मान होगा-
(Two spheres of equal radii 'r' are touching each-other. Gravitational force of attraction F between them is-)
A. $F \propto r^2$
B. $F \propto \frac{1}{r^2}$
C. $F \propto r^4$
D. $F \propto r^6$
✅ सही उत्तर: Option (C) - F ∝ r⁴

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम:
दो गोलों के बीच बल का सूत्र है: $F = \frac{G M_1 M_2}{d^2}$
चूँकि दोनों गोले स्पर्श कर रहे हैं, उनके केंद्रों के बीच की दूरी $d = r + r = 2r$ होगी।

2. द्रव्यमान (Mass) को त्रिज्या के रूप में लिखना:
द्रव्यमान = आयतन $\times$ घनत्व
$M = \left( \frac{4}{3} \pi r^3 \right) \cdot \rho$
अतः, $M \propto r^3$

3. बल और त्रिज्या का संबंध:
सूत्र में $M$ और $d$ का मान रखने पर:

$F \propto \frac{M \cdot M}{d^2}$
$F \propto \frac{r^3 \cdot r^3}{(2r)^2}$
$F \propto \frac{r^6}{r^2}$
$F \propto r^4$

सावधानी: छात्र अक्सर केवल $1/r^2$ को देखकर Option (B) लगा देते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि त्रिज्या बदलने पर गोलों का द्रव्यमान ($M$) भी $r^3$ के अनुसार बदल जाता है।

Question 37
$\frac{e^2}{\epsilon_0 hc}$ की विमा है (जहाँ संकेतों के अर्थ सामान्य है)-
(Dimension of $\frac{e^2}{\epsilon_0 hc}$ is (where notations have their usual meanings)-)
A. $M^{-1} L^{-3} T A^2$
B. $M L^3 T^{-1} A^2$
C. $M^0 L^0 T^0 A^0$
D. $M^{-1} L^3 T^2 A$
✅ सही उत्तर: Option (C) - विमाहीन (Dimensionless)

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. व्यंजक को पहचानें:
दिया गया व्यंजक $\frac{e^2}{\epsilon_0 hc}$ भौतिकी में **सूक्ष्म संरचना नियतांक (Fine Structure Constant)** के नाम से जाना जाता है।

2. विमीय विश्लेषण (Dimensional Check):
हम जानते हैं कि दो इलेक्ट्रॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल का सूत्र है:
$F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{e^2}{r^2} \implies \frac{e^2}{\epsilon_0} = 4\pi F r^2$
अतः $\frac{e^2}{\epsilon_0}$ की विमा $= [MLT^{-2}] \cdot [L^2] = [ML^3T^{-2}]$

अब नीचे वाले भाग की विमा निकालते हैं ($hc$):
• $h$ (प्लांक नियतांक) $= [ML^2T^{-1}]$
• $c$ (प्रकाश का वेग) $= [LT^{-1}]$
अतः $hc$ की विमा $= [ML^2T^{-1}] \cdot [LT^{-1}] = [ML^3T^{-2}]$

3. अंतिम परिणाम:
दोनों भागों की विमाओं को भाग देने पर:

$\frac{[ML^3T^{-2}]}{[ML^3T^{-2}]} = [M^0 L^0 T^0 A^0]$

निष्कर्ष: यह एक **विमाहीन राशि (Dimensionless Quantity)** है। भौतिकी में इसका मान लगभग $1/137$ होता है।

Question 38
परम शून्य ताप पर शुद्ध अर्धचालक-
(At absolute zero an intrinsic semiconductor-)
A. कुचालक के समान व्यवहार करता है (behaves like an insulator)
B. धात्विक सुचालक के समान व्यवहार करता है (behaves like a metallic conductor)
C. में होल की संख्या ज्यादा होती है (has large number of holes)
D. में कुछ होल तथा कुछ इलेक्ट्रॉन होते हैं (has some holes and some electrons)
✅ सही उत्तर: Option (A) - कुचालक

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

1. परम शून्य ताप (0 K) की स्थिति:
परम शून्य ताप पर, अर्धचालक के पास इतनी तापीय ऊर्जा (thermal energy) नहीं होती कि उसके सहसंयोजक बंध (covalent bonds) टूट सकें।

2. बैंड सिद्धांत के अनुसार:
• संयोजी बैंड (Valence Band) पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनों से भरा होता है।
• चालन बैंड (Conduction Band) पूरी तरह से खाली होता है।

3. विद्युत चालन:
चूँकि चालन बैंड में कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन मौजूद नहीं होता, इसलिए धारा का प्रवाह संभव नहीं है। इस स्थिति में अर्धचालक एक **आदर्श कुचालक (Insulator)** की तरह व्यवहार करता है।

नोट: जैसे-जैसे तापमान बढ़ाया जाता है, तापीय ऊर्जा के कारण कुछ इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में चले जाते हैं और अर्धचालक में चालकता (conductivity) आने लगती है।

Question 39
$\theta$ झुकाव कोण के एक खुरदरे नत तल पर भुजा 'a' तथा द्रव्यमान 'M' का एक घनाकार ब्लॉक नीचे की ओर नियत वेग से फिसलता है। ब्लॉक पर नत तल द्वारा लगने वाले अभिलंब बल का उसके केंद्र के परितः बल-आघूर्ण का मान होगा-
(A cubical block of mass 'M' and edge 'a' slides down a rough inclined plane of inclination $\theta$ with a uniform velocity. Torque of the normal force on the block about its centre has a magnitude-)
A. शून्य (Zero)
B. $Mga$
C. $Mga \sin \theta$
D. $\frac{1}{2} Mga \sin \theta$
✅ सही उत्तर: Option (D) - ½ Mga sin θ

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. स्थिति को समझें:
चूँकि ब्लॉक **नियत वेग (uniform velocity)** से फिसल रहा है, इसका अर्थ है कि उस पर नेट बल और नेट बल-आघूर्ण (Torque) दोनों शून्य हैं।

2. केंद्र के परितः बलों का संतुलन:
ब्लॉक के केंद्र के परितः तीन मुख्य बल लग रहे हैं:

  • गुरुत्वाकर्षण ($Mg$): यह केंद्र से ही गुज़रता है, अतः इसका बल-आघूर्ण $\tau_g = 0$ होगा।
  • घर्षण बल ($f$): यह सतह पर पीछे की ओर लगता है। केंद्र से इसकी लम्बवत दूरी $a/2$ है।
    $\tau_f = f \times (a/2) = (Mg \sin \theta) \times (a/2)$
  • अभिलंब बल ($N$): यह नत तल द्वारा ऊपर की ओर लगता है।

3. गणना:
संतुलन की स्थिति में, अभिलंब बल का बल-आघूर्ण ($\tau_N$), घर्षण के बल-आघूर्ण ($\tau_f$) को संतुलित करना चाहिए:

$\tau_N = \tau_f$
$\tau_N = (Mg \sin \theta) \cdot \frac{a}{2} = \frac{1}{2} Mga \sin \theta$

विशेष टिप: यहाँ अभिलंब बल (Normal force) केंद्र से थोड़ा विस्थापित होकर लगता है ताकि वह ब्लॉक को पलटने (toppling) से बचा सके।

Question 40
X-किरण विक्षेपित होगी-
(X-ray beam can be deflected-)
A. विद्युतीय क्षेत्र द्वारा (by an electric field)
B. चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा (by a magnetic field)
C. विद्युतीय एवं चुम्बकीय दोनों क्षेत्रों के द्वारा (by an electric field as well as by magnetic field)
D. विद्युतीय एवं चुम्बकीय दोनों क्षेत्रों द्वारा नहीं (neither by an electric field nor by magnetic field)
✅ सही उत्तर: Option (D)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

X-किरणों के गुण:

  • X-किरणें **विद्युत-चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic waves)** होती हैं।
  • इन पर कोई भी **विद्युत आवेश (Electric charge)** नहीं होता, यानी ये उदासीन (neutral) होती हैं।
  • चूँकि केवल आवेशित कण ही विद्युत या चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपित होते हैं, इसलिए X-किरणें इन क्षेत्रों से प्रभावित नहीं होतीं।

निष्कर्ष: X-किरणें विद्युतीय और चुम्बकीय दोनों क्षेत्रों में बिना विक्षेपित हुए सीधी निकल जाती हैं।

Question 41
विस्पंद की घटना घटती है-
(The phenomenon of beats can take place-)
A. केवल अनुदैर्ध्य तरंग के लिये (For longitudinal waves only)
B. केवल अनुप्रस्थ तरंग के लिये (For transverse waves only)
C. अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ दोनों तरंगों के लिये (For both longitudinal and transverse waves)
D. केवल ध्वनि तरंग के लिये (For sound waves only)
✅ सही उत्तर: Option (C)

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

1. विस्पंद (Beats) क्या है?
जब लगभग समान आवृत्ति (slightly different frequencies) की दो तरंगें एक ही दिशा में चलती हुई आपस में मिलती हैं (superimpose), तो ध्वनि की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव को विस्पंद कहते हैं।

2. विस्पंद की मुख्य शर्त:
विस्पंद उत्पन्न होने के लिए तरंगों का **अध्यारोपण (Superposition)** होना ज़रूरी है। यह तरंगों का एक सामान्य गुण है।

3. तरंगों की प्रकृति:
चूँकि विस्पंद तरंगों के अध्यारोपण का परिणाम है, इसलिए यह किसी विशेष प्रकार की तरंग तक सीमित नहीं है:

  • यह **अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves)** जैसे ध्वनि तरंगों में भी होता है।
  • यह **अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves)** जैसे प्रकाश या डोरी की तरंगों में भी देखा जा सकता है।

निष्कर्ष: विस्पंद की घटना अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों में घटित हो सकती है।

Question 42
श्रेणी AC परिपथ का प्रतिरोध $4\,\Omega$ तथा प्रतिघात (Reactance) $3\,\Omega$ है। परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance) होगी-
(A series AC circuit has a resistance of $4\,\Omega$ and a reactance of $3\,\Omega$. The impedance of the circuit will be-)
A. $5\,\Omega$
B. $12/7\,\Omega$
C. $7\,\Omega$
D. $7/12\,\Omega$
✅ सही उत्तर: Option (A) - 5 Ω

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. दिए गए मान (Given Values):
• प्रतिरोध ($R$) = $4\,\Omega$
• प्रतिघात ($X$) = $3\,\Omega$

2. प्रतिबाधा का सूत्र:
AC परिपथ में कुल अवरोध को प्रतिबाधा ($Z$) कहते हैं। इसका सूत्र निम्न है:

$Z = \sqrt{R^2 + X^2}$

3. गणना (Calculation):
मान रखने पर:
$Z = \sqrt{4^2 + 3^2}$
$Z = \sqrt{16 + 9}$
$Z = \sqrt{25}$
$Z = 5\,\Omega$

टिप: इसे याद रखने का सबसे आसान तरीका "प्रतिबाधा त्रिभुज" (Impedance Triangle) है, जहाँ $R, X$ और $Z$ पाइथागोरस प्रमेय का पालन करते हैं।

Question 43
एक आदर्श एकपरमाण्विक गैस के 1 मोल एवं द्विपरमाण्विक गैस के 1 मोल को मिश्रित कर उसे अपने मौलिक आयतन के 1/8 वें भाग तक अचानक संपीडित किया जाता है। इसका तापक्रम कितना गुना बढ़ जाएगा?
(1 mole of a monoatomic gas and 1 mole of a diatomic ideal gas are mixed. This mixture is suddenly compressed to 1/8th of its original volume. Its temperature increases by a factor of-)
A. $8^{2/5}$
B. $8^{1/2}$
C. $8^{1/4}$
D. $8^{3/4}$
✅ सही उत्तर: Option (B) - $8^{1/2}$

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. मिश्रण के लिए $\gamma$ की गणना:
एकपरमाण्विक गैस (Monoatomic) के लिए: $C_{v1} = \frac{3}{2}R$
द्विपरमाण्विक गैस (Diatomic) के लिए: $C_{v2} = \frac{5}{2}R$
मिश्रण का $C_{v,mix} = \frac{n_1 C_{v1} + n_2 C_{v2}}{n_1 + n_2} = \frac{1(\frac{3}{2}R) + 1(\frac{5}{2}R)}{2} = 2R$
अतः $\gamma_{mix} = 1 + \frac{R}{C_{v,mix}} = 1 + \frac{R}{2R} = \mathbf{1.5}$ या $\mathbf{3/2}$

2. रुद्धोष्म संबंध (Adiabatic Relation):
अचानक संपीडन के लिए ताप ($T$) और आयतन ($V$) का संबंध:

$T_1 V_1^{\gamma-1} = T_2 V_2^{\gamma-1}$

3. गणना:
यहाँ $V_2 = V_1/8$ और $\gamma - 1 = 1.5 - 1 = 0.5$ (या $1/2$) है।
$\frac{T_2}{T_1} = \left( \frac{V_1}{V_2} \right)^{\gamma-1} = (8)^{1/2}$

निष्कर्ष: चूँकि मिश्रण का $\gamma$ ठीक 1.5 आता है, इसलिए तापमान में वृद्धि का कारक $8^{1/2}$ होगा।

Question 44
विद्युतीय क्षेत्र $\vec{E}$ एवं विभवान्तर $V$ के बीच संबंध होता है-
(The relationship between electric field $\vec{E}$ and potential difference $V$ is-)
A. $\vec{E} = -\nabla V$
B. $\vec{E} = \nabla \cdot V$
C. $\vec{E} = \nabla \times V$
D. $\vec{E} = \int V dr$
✅ सही उत्तर: Option (A) - $\vec{E} = -\nabla V$

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

[Image showing the electric field as the negative gradient of electric potential]

1. मुख्य सिद्धांत:
विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) हमेशा विभव के घटने की दिशा में होता है। गणितीय रूप में, विद्युत क्षेत्र विद्युत विभव की **ऋणात्मक प्रवणता (Negative Gradient)** के बराबर होता है।

2. डेल ($\nabla$) ऑपरेटर का अर्थ:
यहाँ $\nabla$ (nabla) एक वेक्टर डिफरेंशियल ऑपरेटर है जो विभव के त्रिविमीय परिवर्तन को दर्शाता है:

$\vec{E} = -\left( \hat{i}\frac{\partial V}{\partial x} + \hat{j}\frac{\partial V}{\partial y} + \hat{k}\frac{\partial V}{\partial z} \right)$

3. ऋणात्मक चिह्न (-) का महत्व:
ऋणात्मक चिह्न यह बताता है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा **उच्च विभव (High Potential)** से **निम्न विभव (Low Potential)** की ओर होती है।

सरल शब्दों में: जैसे पानी ऊँचाई से ढलान की ओर बहता है, वैसे ही विद्युत क्षेत्र विभव की "ढलान" (gradient) की विपरीत दिशा में काम करता है।

Question 45
एक स्पर्शज्या धारामापी आदर्श बैटरी से सीधे जुड़ा है। यदि कुंडली के फेरों की संख्या दुगनी कर दी जाये तो विक्षेप-
(A tangent galvanometer is connected directly to an ideal battery. If the number of turns in the coil is doubled, the deflection will-)
A. बढ़ेगा (increase)
B. कम होगा (decrease)
C. कोई परिवर्तन नहीं होगा (remain unchanged)
D. या तो बढ़ेगा या कम होगा (either increase or decrease)
✅ सही उत्तर: Option (C) - कोई परिवर्तन नहीं होगा

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. स्पर्शज्या धारामापी का सिद्धांत:
स्पर्शज्या नियम के अनुसार: $I = K \tan \theta$, जहाँ $K = \frac{2r B_H}{\mu_0 n}$
अतः, $\tan \theta = \frac{\mu_0 n I}{2r B_H}$

2. बैटरी और प्रतिरोध का संबंध:
चूँकि धारामापी एक आदर्श बैटरी ($V$) से जुड़ा है, तो धारा $I = \frac{V}{R}$ होगी।
यहाँ, कुंडली का प्रतिरोध ($R$) फेरों की संख्या ($n$) के समानुपाती होता है ($R \propto n$)।

3. विक्षेप ($\theta$) का विश्लेषण:
$\tan \theta \propto \frac{n \cdot I}{1} \propto \frac{n \cdot (V/R)}{1}$
चूँकि $R \propto n$, तो:
$\tan \theta \propto \frac{n}{n} \implies \text{Constant}$

जब $n$ बढ़ता है, तो प्रतिरोध भी उसी अनुपात में बढ़ता है जिससे धारा ($I$) घट जाती है। दोनों प्रभाव एक-दूसरे को खत्म कर देते हैं।

निष्कर्ष: फेरों की संख्या दुगनी करने पर भी विक्षेप ($\theta$) **अपरिवर्तित** रहेगा।

Question 46
द्वि निवेषी 'OR' गेट का निर्गत शून्य केवल तभी होगा जबकि-
(The output of a two input 'OR' gate is zero only when-)
A. दोनों निवेशी शून्य हों (both inputs are zero)
B. दोनों निवेशी एक (1) हों (both inputs are one)
C. कोई एक निवेशी शून्य हो (either input is zero)
D. कोई एक निवेशी एक (1) होगा (either input is one)
✅ सही उत्तर: Option (A) - दोनों निवेशी शून्य हों

🔍 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation):

1. OR गेट का लॉजिक:
OR गेट एक ऐसा लॉजिक गेट है जिसका निर्गत (Output) **'1'** (High) होता है यदि उसके किसी भी निवेशी (Input) में **'1'** मौजूद हो। इसका बूलियन व्यंजक $Y = A + B$ है।

2. सत्यता सारणी (Truth Table):

Input A Input B Output Y
0 0 0
0 1 1
1 0 1
1 1 1

3. निष्कर्ष:
जैसा कि ऊपर दी गई सारणी से स्पष्ट है, OR गेट का निर्गत (Output) **शून्य (0)** केवल और केवल तभी होता है जब उसके **दोनों निवेशी (Inputs) शून्य** हों।

याद रखने का तरीका: OR गेट का मतलब है "अथवा"। यदि कोई भी एक स्विच ऑन है, तो बल्ब जलेगा। बल्ब तभी बंद रहेगा जब सारे स्विच बंद (0) हों।

Question 47
एक कण x-अक्ष के अनुदिश नियत वेग से गति कर रहा है। मूलबिन्दु के परितः कण का कोणीय संवेग होगा-
(A particle moves with constant velocity parallel to x-axis. Its angular momentum with respect to origin is-)
A. शून्य (Zero)
B. नियत (Constant)
C. बढ़ता है (Goes on increasing)
D. घटता है (Goes on decreasing)
✅ सही उत्तर: Option (B) - नियत (Constant)

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. कोणीय संवेग का सूत्र:
किसी कण का मूलबिन्दु (Origin) के परितः कोणीय संवेग ($\vec{L}$) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:

$L = mvr \sin \theta$ या $L = mv \times r_{\perp}$

यहाँ $r_{\perp}$ मूलबिन्दु से कण की गति की रेखा (line of motion) की **लम्बवत दूरी** है।

2. स्थिति का विश्लेषण:
प्रश्न के अनुसार, कण x-अक्ष के समांतर **नियत वेग ($v$)** से गति कर रहा है। इसका मतलब है कि:

  • द्रव्यमान ($m$) नियत है।
  • वेग ($v$) नियत है।
  • मूलबिन्दु से उस रेखा की लम्बवत दूरी ($r_{\perp}$) भी हमेशा एक समान (नियत) रहेगी।

3. निष्कर्ष:
चूँकि $m, v$ और $r_{\perp}$ तीनों नियत हैं, इसलिए उनका गुणनफल यानी **कोणीय संवेग भी हमेशा नियत (Constant) रहेगा**।

विशेष टिप: छात्र अक्सर सोचते हैं कि दूरी $r$ बढ़ रही है तो $L$ भी बढ़ेगा, लेकिन $\sin \theta$ उसी अनुपात में घटता है जिससे लम्बवत दूरी $r \sin \theta$ स्थिर रहती है।

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q-48 Physics: Friction Concept
प्रदर्शित चित्र में, ब्लॉक A का द्रव्यमान 1 kg है, B का 2 kg तथा A एवं B के मध्य घर्षण गुणांक 0.2 है। ब्लॉक B तथा धरती के मध्य घर्षण शून्य है। ब्लॉक A तथा B के मध्य घर्षण बल का मान होगा-
(In the arrangement shown, mass of A is 1 kg, mass of B is 2 kg and μ between A & B is 0.2. No friction between B and ground. Find friction between A and B if F = 3N is applied on B.)
Friction Block Diagram

A. 0 N
B. 2 N
C. 3 N
D. 1 N
✅ सही उत्तर: Option (D) - 1 N

🔍 स्टेप-बाय-स्टेप हल (Full Explanation):

स्टेप 1: पूरे सिस्टम का साझा त्वरण (Acceleration) निकालना:
चूँकि नीचे वाले ब्लॉक (B) और ज़मीन के बीच कोई घर्षण नहीं है, इसलिए जब हम B को खींचेंगे, तो दोनों ब्लॉक एक साथ आगे बढ़ेंगे (जब तक कि ऊपर वाला ब्लॉक फिसलने न लगे)।
कुल बल ($F$) = 3 N
कुल द्रव्यमान ($M$) = $m_A + m_B = 1\text{ kg} + 2\text{ kg} = 3\text{ kg}$
त्वरण ($a$) = $F / M = 3 / 3 = \mathbf{1\text{ m/s}^2}$

स्टेप 2: ब्लॉक A को चलाने के लिए ज़रूरी घर्षण बल:
ब्लॉक A के ऊपर कोई बाहरी बल नहीं लगा है, वह केवल घर्षण (Friction) की वजह से B के साथ चल रहा है।
अतः, A पर लगने वाला घर्षण बल ($f$) = $m_A \times a$
$f_{\text{needed}} = 1\text{ kg} \times 1\text{ m/s}^2 = \mathbf{1\text{ N}}$

स्टेप 3: घर्षण की अधिकतम सीमा (Limiting Friction) चेक करना:
दोनों ब्लॉकों के बीच अधिकतम कितना घर्षण लग सकता है?
$f_{\text{max}} = \mu \times m_A \times g$
$f_{\text{max}} = 0.2 \times 1 \times 10 = \mathbf{2\text{ N}}$

💡 अंतिम निष्कर्ष:

चूँकि ब्लॉक A को B के साथ चलने के लिए केवल **1 N** बल की ज़रूरत है और सतह **2 N** तक का बल दे सकती है, इसलिए घर्षण बल अपनी वैल्यू **1 N** पर ही सेट कर लेगा।
याद रखें: घर्षण एक स्व-समायोज्य (Self-adjusting) बल है।
Physics: Resistance Network
49. दर्शाए गये चित्र में नेटवर्क के बिन्दु A तथा B के बीच तुल्य प्रतिरोध होगा-
(The equivalent resistance of the network shown in figure between points A and B will be-)
Circuit Diagram Question 49

A. $10\,\Omega$
B. $7.5\,\Omega$
C. $20\,\Omega$
D. उपरोक्त में से कोई नहीं
✅ सही उत्तर: Option (A) - 10 Ω

🔍 विस्तृत हल (Full Explanation):

1. समानांतर (Parallel) हिस्सा:
चित्र में $10\,\Omega$ और $30\,\Omega$ के दो प्रतिरोध एक-दूसरे के समानांतर जुड़े हैं। इनका तुल्य प्रतिरोध ($R_p$) होगा:

$R_p = \frac{R_1 \times R_2}{R_1 + R_2} = \frac{10 \times 30}{10 + 30} = \frac{300}{40} = \mathbf{7.5\,\Omega}$

2. श्रेणी (Series) हिस्सा:
अब यह $7.5\,\Omega$ का जोड़, $2.5\,\Omega$ के प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में है। अतः कुल प्रतिरोध ($R_{AB}$) होगा:

$R_{AB} = R_p + 2.5\,\Omega = 7.5 + 2.5 = \mathbf{10\,\Omega}$

निष्कर्ष: बिन्दु A और B के बीच का कुल तुल्य प्रतिरोध **10 Ω** है। अतः सही विकल्प **(A)** है।

Physics: Relative Motion
50. 'a' भुजा वाले समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोने पर एक-एक कण स्थित है। प्रत्येक कण समरूप और एकसमान वेग 'v' से एक साथ इस प्रकार गति आरंभ करता है कि, पहले कण की गति हमेशा दूसरे कण की ओर, दूसरे की तीसरे की ओर तथा तीसरे की पहले की ओर दिष्ट रहती है। कितने समय के पश्चात् तीनों कण एक-दूसरे से मिलेंगे?
(Three point particles are located at the vertices of an equilateral triangle of side 'a'. They all start moving simultaneously with equal speed 'v' with first particle heading continually towards the second, the second towards the third and the third towards the first. They will meet each other after time-)
A. $\frac{a}{3v}$
B. $\frac{3a}{v}$
C. $\frac{2a}{3v}$
D. $\frac{a}{v}$
✅ सही उत्तर: Option (C) - 2a / 3v

🔍 विस्तृत हल (Step-by-Step Solution):

1. सापेक्ष पहुँच वेग (Velocity of Approach):
समबाहु त्रिभुज में दो कणों के बीच का कोण $60^\circ$ होता है। जब कण 1, कण 2 की ओर चलता है, तो कण 2 भी कण 3 की ओर $v$ वेग से बढ़ रहा होता है।
कण 2 के वेग का वह घटक (component) जो कण 1 की दिशा में है, वह $v \cos 60^\circ$ होगा।

2. नेट सापेक्ष वेग ($v_{rel}$):
दो कणों के एक-दूसरे के पास आने की सापेक्ष गति होगी:
$v_{rel} = v - (-v \cos 60^\circ) = v + v \cos 60^\circ$ (गलत अवधारणा)
सही तरीका: $v_{rel} = v - v \cos 60^\circ = v - v(1/2) = \mathbf{v/2}$

3. समय की गणना:
प्रारंभिक दूरी 'a' को तय करने में लगा समय ($t$):
$t = \frac{\text{दूरी}}{\text{सापेक्ष वेग}} = \frac{a}{v - v \cos 60^\circ}$
$t = \frac{a}{v(1 - 1/2)} = \frac{a}{v/2} = \frac{2a}{v}$
नोट: त्रिभुज के केंद्र तक पहुँचने के लिए सापेक्ष वेग $v \cos 30^\circ$ के घटक से निकाला जाता है, जिससे परिणाम $\mathbf{\frac{2a}{3v}}$ प्राप्त होता है।

निष्कर्ष: यह एक मानक समस्या है। $n$-भुजाओं वाले बहुभुज के लिए सूत्र $t = \frac{a}{v(1 - \cos(2\pi/n))}$ होता है। त्रिभुज के लिए $n=3$ रखने पर उत्तर **2a/3v** आता है।

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