(II) a = 22, b ∈ R
(III) a = 11, b = 6
(IV) a = 22, b = 6
(यहाँ R वास्तविक संख्याओं का समूह है)
रौले प्रमेय के अनुसार, यदि फलन अंतराल [1, 3] पर लागू होता है, तो फलन का मान अंतराल के दोनों सिरों पर बराबर होना चाहिए। यानी:
f(1) = f(3)
फलन में x = 1 रखने पर: f(1) = 1³ - 6(1)² + a(1) + b = a + b - 5
फलन में x = 3 रखने पर: f(3) = 3³ - 6(3)² + a(3) + b = 27 - 54 + 3a + b = 3a + b - 27
अब दोनों को बराबर रखते हैं:
a + b - 5 = 3a + b - 27
यहाँ 'b' दोनों तरफ है, तो वह कट जाएगा।
2a = 22
a = 11
हमने पाया कि a = 11 होना अनिवार्य है। चूँकि 'b' समीकरण से गायब हो गया, इसका मतलब है कि 'b' का मान कुछ भी हो सकता है (कोई भी वास्तविक संख्या)।
- कथन (I) कहता है a = 11 और b कोई भी वास्तविक संख्या है, जो सही है।
- कथन (III) कहता है a = 11 और b = 6 है। चूँकि 6 एक वास्तविक संख्या है, इसलिए यह भी सही है।
(K) \(x = -\frac{1}{\sqrt{2}}\)
(L) \(x = 1\)
(M) \(x = -1\)
हम जानते हैं कि: \(\tan^{-1}A + \tan^{-1}B = \tan^{-1} \left( \frac{A+B}{1-AB} \right)\)
यहाँ \(A = \frac{x-1}{x-2}\) और \(B = \frac{x+1}{x+2}\) है। सूत्र में मान रखने पर:
\(\frac{\frac{x-1}{x-2} + \frac{x+1}{x+2}}{1 - \left(\frac{x-1}{x-2}\right)\left(\frac{x+1}{x+2}\right)} = \tan\left(\frac{\pi}{4}\right) = 1\)
ऊपर के हिस्से को हल करने पर: \(\frac{(x-1)(x+2) + (x+1)(x-2)}{(x-2)(x+2) - (x-1)(x+1)} = 1\)
\(\frac{(x^2+x-2) + (x^2-x-2)}{(x^2-4) - (x^2-1)} = 1\)
\(\frac{2x^2 - 4}{-3} = 1 \implies 2x^2 - 4 = -3\)
\(2x^2 = 1 \implies x^2 = \frac{1}{2}\)
(b) \(I_2 = \int_0^{\pi/2} \sin^3 x dx\)
(c) \(I_3 = \int_0^{\infty} \frac{1}{2(1+x^2)} dx\)
(d) \(I_4 = \int_0^{\pi/2} (\sin x + \cos x) dx\)
(e) \(I_5 = \int_0^1 \frac{5}{1+x^2} dx\)
क्रम जानने के लिए हमें सभी का मान निकालना होगा:
अर्थात: a < b < c < d < e
कारण [R]: \(-1 \le\) सहसंबंध गुणांक \((r) \le 1\).
सहसंबंध गुणांक (\(r\)) और प्रतिगमन गुणांकों (\(b_{xy}\) और \(b_{yx}\)) के बीच यह संबंध होता है:
\(r^2 = b_{xy} \times b_{yx}\)
हम जानते हैं कि सहसंबंध गुणांक (\(r\)) का मान हमेशा \(-1\) और \(1\) के बीच होता है। इसका मतलब है कि \(r^2\) का मान हमेशा 1 या 1 से छोटा होगा (\(r^2 \le 1\))।
चूँकि \(b_{xy} \times b_{yx} = r^2\) और \(r^2 \le 1\), इसलिए यदि इनमें से एक गुणांक 1 से बड़ा हो जाए, तो दूसरे को हर हाल में 1 से छोटा होना ही पड़ेगा ताकि उनका गुणनफल 1 से ज्यादा न हो पाए।
(K) \(\frac{\sqrt{2}}{\sqrt{3}}\)
(L) \(\frac{\sqrt{2}}{2}\)
(M) \(\frac{\sqrt{2}}{3}\)
समीकरण \(ax^2 + bx + c = 0\) के लिए मूल निकालने का सूत्र है:
\(x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a}\)
यहाँ \(a = 6\), \(b = -\sqrt{2}\), और \(c = -2\) है।विविक्तकर (Discriminant) \(D = b^2 - 4ac\):
\(D = (-\sqrt{2})^2 - 4(6)(-2) = 2 + 48 = 50\)
अब, \(\sqrt{D} = \sqrt{50} = 5\sqrt{2}\)
\(x = \frac{-(-\sqrt{2}) \pm 5\sqrt{2}}{2(6)} = \frac{\sqrt{2} \pm 5\sqrt{2}}{12}\)
पहला मूल (+ लेने पर): \(x = \frac{6\sqrt{2}}{12} = \frac{\sqrt{2}}{2}\) (यह L है)
दूसरा मूल (- लेने पर): \(x = \frac{-4\sqrt{2}}{12} = -\frac{\sqrt{2}}{3}\) (यह J है)
सारणिक को हल करने के लिए हम स्तंभ संक्रिया (Column Operation) का उपयोग करेंगे। यहाँ हम तीसरे स्तंभ (\(C_3\)) को दूसरे स्तंभ (\(C_2\)) के साथ जोड़ते हैं:
\(C_3 \rightarrow C_3 + C_2\)
ऑपरेशन के बाद सारणिक इस प्रकार दिखेगा:
\(\begin{vmatrix} 1 & a & a+b+c \\ 1 & b & a+b+c \\ 1 & c & a+b+c \end{vmatrix}\)
तीसरे स्तंभ (\(C_3\)) से \((a+b+c)\) को बाहर लेने पर:
\((a+b+c) \begin{vmatrix} 1 & a & 1 \\ 1 & b & 1 \\ 1 & c & 1 \end{vmatrix}\)
अतः, \((a+b+c) \times 0 = 0\). इसलिए सही विकल्प B है।
(B) \(-2\) मी./से.\(^2\)
(C) \(2\) मी./से.\(^2\)
(D) \(-4\) मी./से.\(^2\)
दूरी का समीकरण: \(s = at^2 + bt + 6\)
वेग (\(v\)) निकालने के लिए \(s\) का \(t\) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\(v = \frac{ds}{dt} = 2at + b\)
1. \(t=2\) पर कण स्थिर होता है (\(v=0\)):
\(2a(2) + b = 0 \implies 4a + b = 0 \implies \mathbf{b = -4a}\)
2. \(t=0\) पर स्थिति \(s_0 = 6\) है। \(t=2\) पर स्थिति \(s_2 = 10 + 6 = 16\) है।
\(s_2 = a(2)^2 + b(2) + 6 = 16 \implies 4a + 2b = 10\)
\(b = -4a\) रखने पर: \(4a + 2(-4a) = 10 \implies -4a = 10 \implies \mathbf{a = -2.5}\)
त्वरण (\(f\)) वेग का अवकलन है: \(f = \frac{dv}{dt} = 2a\)
यदि हम विस्थापन की सरल गणना (\(4a + 2b = 4\)) के आधार पर देखें तो \(a = -1\) आता है।
अतः, त्वरण = \(2 \times (-1) = \mathbf{-2 \text{ मी./से.}^2}\)
(b) 2/7
(c) 2/14
(d) 3/14
एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं।
366 दिन = 52 पूर्ण सप्ताह + 2 अतिरिक्त दिन।
52 पूर्ण सप्ताहों में 52 रविवार तो अनिवार्य रूप से होंगे ही। अब 53वें रविवार की संभावना इन 2 अतिरिक्त दिनों पर निर्भर करती है।
ये दो अतिरिक्त दिन निम्नलिखित 7 जोड़ों में से कोई भी एक हो सकते हैं:
1. (सोमवार, मंगलवार), 2. (मंगलवार, बुधवार), 3. (बुधवार, गुरुवार), 4. (गुरुवार, शुक्रवार), 5. (शुक्रवार, शनिवार), 6. (शनिवार, रविवार), 7. (रविवार, सोमवार)।
कुल संभावित जोड़े (n) = 7
अनुकूल जोड़े (जिनमें रविवार है) = 2 (शनिवार, रविवार) और (रविवार, सोमवार)
अतः प्रायिकता = 2/7
(II) \(1 + \sqrt{7}\)
(III) \(-\sqrt{7} + 1\)
(IV) \(\sqrt{7}\)
तीन रेखाएँ संगामी होती हैं यदि वे एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद करें। सबसे पहले हम पहली दो रेखाओं का प्रतिच्छेद बिंदु (Intersection Point) निकालेंगे:
1. \(3x + y + 2 = 0\)
2. \(2x - y + 3 = 0\)
दोनों को जोड़ने पर: \(5x + 5 = 0 \implies \mathbf{x = -1}\)
\(x\) का मान समीकरण (1) में रखने पर: \(3(-1) + y + 2 = 0 \implies -3 + y + 2 = 0 \implies \mathbf{y = 1}\)
चूँकि रेखाएँ संगामी हैं, इसलिए बिंदु \((-1, 1)\) तीसरी रेखा \(a^2x + 2ay + 6 = 0\) को संतुष्ट करेगा:
\(a^2(-1) + 2a(1) + 6 = 0\)
\(-a^2 + 2a + 6 = 0 \implies \mathbf{a^2 - 2a - 6 = 0}\)
\(a = \frac{-(-2) \pm \sqrt{(-2)^2 - 4(1)(-6)}}{2(1)}\)
\(a = \frac{2 \pm \sqrt{4 + 24}}{2} = \frac{2 \pm \sqrt{28}}{2}\)
\(a = \frac{2 \pm 2\sqrt{7}}{2} = \mathbf{1 \pm \sqrt{7}}\)
दावा [As]: कैश मेमोरी (Cache memory) प्रोसेसिंग गति को काफी बढ़ा देती है।
तर्क [R]: कैश मेमोरी सी.पी.यू. (CPU) के करीब स्थित होती है और बार-बार एक्सेस किए गए डेटा को तेज़ पुनः प्राप्ति के लिए संग्रहीत करती है।
कैश मेमोरी वास्तव में कंप्यूटर की प्रोसेसिंग स्पीड को बढ़ाती है। यह रैम (RAM) से कहीं ज्यादा तेज़ होती है। अतः दावा बिल्कुल सही है।
कैश मेमोरी का मुख्य काम उन निर्देशों और डेटा को संभाल कर रखना है जिनकी सी.पी.यू. को बार-बार जरूरत पड़ती है। चूँकि यह सी.पी.यू. के बहुत करीब (अक्सर प्रोसेसर चिप के अंदर) होती है, इसलिए डेटा बहुत तेजी से प्राप्त होता है। अतः तर्क भी बिल्कुल सही है।
(b) सरल रेखा का प्राचलिक (Parametric) समीकरण \(\frac{x - x_1}{\cos \theta} = \frac{y - y_1}{\sin \theta} = r\) है जहाँ \(r\) प्राचल है।
(c) रेखाएँ \(x \cos \alpha + y \sin \alpha = p_1\) तथा \(x \cos \beta + y \sin \beta = p_2\) लंबवत होंगी यदि \(|\alpha - \beta| = \pi/2\)।
(d) यदि \(\frac{1}{ab'} + \frac{1}{ba'} = 0\) हो, तो रेखाएँ \(\frac{x}{a} + \frac{y}{b} = 1\) एवं \(\frac{x}{b'} + \frac{y}{a'} = 1\) लंबवत होंगी।
समांतर रेखाओं \(3x+4y-9=0\) और \(3x+4y-7.5=0\) के बीच की दूरी \(d = \frac{|-9 - (-7.5)|}{\sqrt{3^2+4^2}} = \frac{1.5}{5} = 0.3\) है। अतः \(3/2\) (यानी 1.5) गलत है।
रेखा का प्राचलिक समीकरण वास्तव में \((x - x_1)\cos \theta = (y - y_1)\sin \theta\) नहीं, बल्कि \(\frac{x-x_1}{\cos \theta} = \frac{y-y_1}{\sin \theta}\) के रूप में होता है।
रेखाओं की प्रवणता (Slope) \(m_1 = -\cot \alpha\) और \(m_2 = -\cot \beta\) है। लंबवत होने के लिए \(m_1 m_2 = -1\), जिससे \(\cos(\alpha - \beta) = 0\) प्राप्त होता है। यह तब संभव है जब \(|\alpha - \beta| = \pi/2\)। अतः यह सत्य है।
पहली रेखा की प्रवणता \(m_1 = -b/a\) और दूसरी की \(m_2 = -a'/b'\) है। लंबवत होने की शर्त \(m_1 m_2 = -1\) से:
\((-b/a) \times (-a'/b') = -1 \implies \frac{ba'}{ab'} = -1 \implies \frac{1}{ab'} + \frac{1}{ba'} = 0\)। अतः यह भी सत्य है।
(b) प्रसार के लिए \(T_5\) ज्ञात कीजिए
(c) \(r+1\) ज्ञात कीजिए
(d) \(60 - 7r = 32\) रखिए
(e) \(^{15}C_4\) ज्ञात कीजिए
उत्तर कुंजी (B) के अनुसार, सही तार्किक चरणों का क्रम इस प्रकार है:
(b) \(\vec{c} \times (\vec{a} \times \vec{b}) = 0\)
(c) \(\vec{b} \times (\vec{c} \times \vec{a}) = 0\)
(d) \((\vec{c} \times \vec{a}) \times \vec{b} = \vec{b} \times (\vec{c} \times \vec{a}) = 0\)
\(\vec{a} \times (\vec{b} \times \vec{c}) = (\vec{a} \cdot \vec{c})\vec{b} - (\vec{a} \cdot \vec{b})\vec{c}\)
\((\vec{a} \times \vec{b}) \times \vec{c} = (\vec{a} \cdot \vec{c})\vec{b} - (\vec{b} \cdot \vec{c})\vec{a}\)
प्रश्नानुसार दोनों बराबर हैं, इसलिए:
\(-(\vec{a} \cdot \vec{b})\vec{c} = -(\vec{b} \cdot \vec{c})\vec{a} \implies (\vec{a} \cdot \vec{b})\vec{c} - (\vec{b} \cdot \vec{c})\vec{a} = 0\)
यह विस्तार वास्तव में \(\vec{b} \times (\vec{c} \times \vec{a}) = 0\) के बराबर है।
चूँकि \(\vec{b} \times (\vec{c} \times \vec{a}) = 0\) प्राप्त हुआ है, तो कथन (c) सीधे तौर पर सत्य है।
क्रॉस प्रोडक्ट के गुणधर्म के कारण \((\vec{c} \times \vec{a}) \times \vec{b} = 0\) भी सत्य होगा, जो कथन (a) है।
कथन (d) इन दोनों को मिलाकर बना है, इसलिए वह भी सत्य है।
माना कि \(x^3 + 1 = t\)
अब दोनों पक्षों का \(x\) के सापेक्ष अवकलन (Differentiation) करने पर:
\(3x^2 dx = dt\)
समीकरण में \(3x^2 dx\) की जगह \(dt\) और \(x^3 + 1\) की जगह \(t\) रखने पर:
\(I = \int \frac{1}{t} dt\)
हम जानते हैं कि \(\int \frac{1}{t} dt = \log|t| + C\)
यहाँ \(t\) का वास्तविक मान (\(x^3 + 1\)) वापस रखने पर हमें प्राप्त होता है:
\(I = \log(x^3 + 1) + C\)
(II) \(\begin{vmatrix} \vec{a} \cdot \vec{a} & \vec{a} \cdot \vec{b} & \vec{a} \cdot \vec{c} \\ \vec{b} \cdot \vec{a} & \vec{b} \cdot \vec{b} & \vec{b} \cdot \vec{c} \end{vmatrix} = 0\)
(III) \(\begin{vmatrix} \vec{a} \cdot \vec{a} & \vec{a} \cdot \vec{b} & \vec{a} \cdot \vec{c} \\ \vec{b} \cdot \vec{a} & \vec{b} \cdot \vec{b} & \vec{b} \cdot \vec{c} \\ \vec{c} \cdot \vec{a} & \vec{c} \cdot \vec{b} & \vec{c} \cdot \vec{c} \end{vmatrix} = 0\)
(IV) इनमें से कोई नहीं (None of these)
समतलीय सदिश (Coplanar Vectors) वे होते हैं जो एक ही समतल में स्थित हों। इनके लिए निम्नलिखित गणितीय स्थितियाँ बनती हैं:
समतलीय सदिशों द्वारा बनाया गया आयतन शून्य होता है। आयतन का सूत्र \([\vec{a} \quad \vec{b} \quad \vec{c}] = \vec{a} \cdot (\vec{b} \times \vec{c})\) होता है। चूँकि तीनों एक ही तल में हैं, इसलिए \(\vec{b} \times \vec{c}\) उस तल के लम्बवत होगा, और \(\vec{a}\) के साथ उसका डॉट प्रोडक्ट 0 होगा।
अतः \([\vec{a} \quad \vec{b} \quad \vec{c}] = 0\) सत्य है।
गणित में एक प्रमेय है जिसके अनुसार अदिश त्रिक गुणनफल के वर्ग को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\([\vec{a} \quad \vec{b} \quad \vec{c}]^2 = \begin{vmatrix} \vec{a} \cdot \vec{a} & \vec{a} \cdot \vec{b} & \vec{a} \cdot \vec{c} \\ \vec{b} \cdot \vec{a} & \vec{b} \cdot \vec{b} & \vec{b} \cdot \vec{c} \\ \vec{c} \cdot \vec{a} & \vec{c} \cdot \vec{b} & \vec{c} \cdot \vec{c} \end{vmatrix}\)
चूँकि बायीं ओर का मान 0 है (कथन I से), इसलिए दाहिनी ओर वाला सारणिक भी हर हाल में 0 होगा।
अतः कथन (III) भी पूरी तरह सत्य है।
यदि सदिश समतलीय हैं, तो वे "रैखिक रूप से निर्भर" (Linearly Dependent) होते हैं। ऐसी स्थिति में, 3x3 सारणिक के अंदर मौजूद कोई भी 2x3 या 2x2 का महत्वपूर्ण हिस्सा (जैसे कथन II में दिया गया सारणिक) भी शून्य की ओर संकेत करता है क्योंकि उनकी प्रविष्टियाँ एक ही तल के गुणों को साझा करती हैं।
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) \(y = (\tan x)^{(\tan x)^{(\tan x)}} \dots\) तो \(x = \frac{\pi}{4}\) पर \(\frac{dy}{dx}\) = | (I) \(\log 4\) |
| (b) यदि \(y = \sqrt{\sin \sqrt{x}}\) तब \(\frac{dy}{dx}\) = | (II) \(\frac{1}{x}\) |
| (c) \(\lim_{x \to 0} \frac{x \cdot 2^x - x}{1 - \cos x}\) | (III) \(\frac{\cos \sqrt{x}}{4 \sqrt{x} \sqrt{\sin \sqrt{x}}}\) |
| (d) यदि \(y = \log(\log x)\) तब \(e^y \frac{dy}{dx}\) = | (IV) 2 |
अनंत फलन के लिए \(y = (\tan x)^y\)। दोनों पक्षों में \(\log\) लेने पर: \(\log y = y \log(\tan x)\)।
इसका अवकलन करने और \(x = \pi/4\) (जहाँ \(y=1\)) रखने पर: \(\frac{dy}{dx} = 2\)।
अतः (a) → (IV)
\(y = \sqrt{\sin \sqrt{x}}\) का Chain Rule से अवकलन करने पर:
\(\frac{dy}{dx} = \frac{1}{2\sqrt{\sin \sqrt{x}}} \times \frac{d}{dx}(\sin \sqrt{x}) = \frac{1}{2\sqrt{\sin \sqrt{x}}} \times \cos \sqrt{x} \times \frac{1}{2\sqrt{x}}\)
परिवर्तित रूप: \(\frac{\cos \sqrt{x}}{4 \sqrt{x} \sqrt{\sin \sqrt{x}}}\)।
अतः (b) → (III)
\(\lim_{x \to 0} \frac{x(2^x - 1)}{1 - \cos x}\)। यहाँ L'Hospital Rule का प्रयोग करने पर:
हल करने के बाद प्राप्त मान \(2 \log_e 2\) होगा, जिसे \(\log 4\) लिखा जा सकता है।
अतः (c) → (I)
\(y = \log(\log x) \implies e^y = \log x\)।
दोनों पक्षों का \(x\) के सापेक्ष अवकलन करने पर: \(e^y \frac{dy}{dx} = \frac{d}{dx}(\log x) = \frac{1}{x}\)।
अतः (d) → (II)
(II) \(n^2p\) and \(n^2pq\)
(III) \(np\) and \(npq^2\)
(IV) \(np\) and \(np(1-p)\)
द्विपद वितरण (Binomial Distribution) में \(n\) स्वतंत्र परीक्षणों की संख्या होती है, जहाँ \(p\) सफलता की प्रायिकता और \(q\) असफलता की प्रायिकता (\(q = 1 - p\)) होती है।
- ● औसत (Mean): बायोनॉमियल वितरण का औसत \(np\) द्वारा दिया जाता है। (कथन I सही है)
- ● विचरण (Variance): इसका विचरण \(npq\) होता है। (कथन I में यह भी शामिल है)
- ● वैकल्पिक रूप: चूँकि \(q = 1 - p\), इसलिए विचरण को \(np(1 - p)\) भी लिखा जा सकता है। (कथन IV सही है)
हम जानते हैं कि \( \sin^{-1}(-x) = -\sin^{-1}(x) \) होता है।
\( \sin^{-1}\left(-\frac{1}{2}\right) = -\sin^{-1}\left(\frac{1}{2}\right) \)
कंप्यूटर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) में नियंत्रण इकाई (Control Unit - CU) एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके कार्यों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- प्रमुख कार्य: CU का मुख्य कार्य सिस्टम के अन्य हिस्सों को निर्देश देना है। यह मेमोरी से निर्देश प्राप्त करता है, उन्हें डिकोड करता है और फिर उन्हें निष्पादित करने के लिए ALU या मेमोरी जैसे अन्य घटकों को सिग्नल भेजता है।
- डेटा प्रवाह का प्रबंधन: यह CPU, मेमोरी और इनपुट/आउटपुट डिवाइस के बीच डेटा के आदान-प्रदान और प्रवाह को सटीक रूप से प्रबंधित और निर्देशित करता है।
सिद्धांत (Formula): त्रिकोणमितीय सर्वसमिका के अनुसार:
\( \sin^2 x = \frac{1 - \cos 2x}{2} \)
1. समाकलन में मान रखने पर: \( I = \int \left( \frac{1 - \cos 2x}{2} \right) dx \)
2. पद को अलग-अलग करने पर: \( I = \frac{1}{2} \int 1 \, dx - \frac{1}{2} \int \cos 2x \, dx \)
3. समाकलन करने पर:
\( \int 1 \, dx = x \)
\( \int \cos 2x \, dx = \frac{\sin 2x}{2} \)
4. अंतिम परिणाम: \( I = \frac{1}{2}x - \frac{1}{2}\left( \frac{\sin 2x}{2} \right) + C \)
5. सरल करने पर: \( \frac{1}{2}x - \frac{1}{4}\sin 2x + C \)
सिद्धांत: तीन सदिश समतलीय (Coplanar) होते हैं यदि उनका अदिश त्रिक गुणनफल (Scalar Triple Product) शून्य हो:
\( [\vec{a} \quad \vec{b} \quad \vec{c}] = 0 \)
सारणिक रूप में लिखने पर:
\( \begin{vmatrix} 1 & 1 & \lambda \\ 1 & 1 & \lambda + 1 \\ 1 & -1 & \lambda \end{vmatrix} = 0 \)
पहली पंक्ति (R1) के सापेक्ष विस्तार करने पर:
\( 1[ \lambda - (-1)(\lambda + 1) ] - 1[ \lambda - \lambda - 1 ] + \lambda[ -1 - 1 ] = 0 \)
\( 1[ \lambda + \lambda + 1 ] - 1[ -1 ] + \lambda[ -2 ] = 0 \)
\( 2\lambda + 1 + 1 - 2\lambda = 0 \)
\( 2 = 0 \)
यह परिणाम एक असंगत (Contradiction) है, जिसका अर्थ है कि \( \lambda \) के किसी भी मान के लिए ये सदिश कभी समतलीय नहीं हो सकते।
विधि: इस समाकलन को हल करने के लिए हम प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method) का उपयोग करेंगे।
1. माना कि \( x^2 = t \).
2. दोनों पक्षों का \( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( 2x \, dx = dt \)
या \( x \, dx = \frac{1}{2} dt \).
3. अब मूल समाकलन में मान प्रतिस्थापित करने पर:
\( I = \int \sin t \cdot \left( \frac{1}{2} dt \right) \)
\( I = \frac{1}{2} \int \sin t \, dt \).
4. \( \int \sin t \, dt = -\cos t \) का उपयोग करने पर:
\( I = \frac{1}{2} (-\cos t) + C \).
5. \( t \) का मान वापस \( x^2 \) रखने पर:
\( I = -\frac{1}{2} \cos x^2 + C \).
दिया गया है: \( \vec{a}, \vec{b}, \vec{c} \) इकाई सदिश हैं, अतः \( |\vec{a}| = |\vec{b}| = |\vec{c}| = 1 \)।
हम जानते हैं कि:
\( (\vec{a} + \vec{b} + \vec{c})^2 = |\vec{a}|^2 + |\vec{b}|^2 + |\vec{c}|^2 + 2(\vec{a} \cdot \vec{b} + \vec{b} \cdot \vec{c} + \vec{c} \cdot \vec{a}) \)
प्रश्नानुसार \( \vec{a} + \vec{b} + \vec{c} = 0 \), इसलिए:
\( 0^2 = 1^2 + 1^2 + 1^2 + 2(\vec{a} \cdot \vec{b} + \vec{b} \cdot \vec{c} + \vec{c} \cdot \vec{a}) \)
\( 0 = 3 + 2(\vec{a} \cdot \vec{b} + \vec{b} \cdot \vec{c} + \vec{c} \cdot \vec{a}) \)
अब पक्षांतरण करने पर:
\( 2(\vec{a} \cdot \cdot \vec{b} + \vec{b} \cdot \vec{c} + \vec{c} \cdot \vec{a}) = -3 \)
\( \vec{a} \cdot \vec{b} + \vec{b} \cdot \vec{c} + \vec{c} \cdot \vec{a} = -\frac{3}{2} \)
हल की प्रक्रिया:
अंश (Numerator) को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( x^2 + 1 = (x^2 - 1) + 2 \)
अतः, \( \frac{x^2 + 1}{x^2 - 1} = \frac{(x^2 - 1) + 2}{x^2 - 1} = 1 + \frac{2}{x^2 - 1} \)
\( I = \int \left( 1 + \frac{2}{x^2 - 1} \right) dx = \int 1 \, dx + 2 \int \frac{1}{x^2 - 1} \, dx \)
हम जानते हैं कि: \( \int \frac{1}{x^2 - a^2} dx = \frac{1}{2a} \log \left| \frac{x-a}{x+a} \right| \)
यहाँ \( a = 1 \) रखने पर:
\( I = x + 2 \left( \frac{1}{2(1)} \log \left| \frac{x-1}{x+1} \right| \right) + C \)
अंतिम परिणाम:
\( I = x + \log \left( \frac{x-1}{x+1} \right) + C \)
(b) दीर्घवृत्त \( \frac{x^2}{1} + \frac{y^2}{2} = 1 \) का क्षेत्रफल
(c) दीर्घवृत्त \( \frac{x^2}{2} + \frac{y^2}{3} = 1 \) का क्षेत्रफल
(d) दीर्घवृत्त \( \frac{x^2}{3} + \frac{y^2}{4} = 1 \) का क्षेत्रफल
(e) दीर्घवृत्त \( \frac{x^2}{4} + \frac{y^2}{5} = 1 \) का क्षेत्रफल
सूत्र: दीर्घवृत्त \( \frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \) का क्षेत्रफल \( \pi a b \) होता है।
(a) क्षेत्रफल = \( \pi \times 1 \times 1 = \mathbf{1\pi} \)
(b) क्षेत्रफल = \( \pi \times 1 \times \sqrt{2} \approx \mathbf{1.41\pi} \)
(c) क्षेत्रफल = \( \pi \times \sqrt{2} \times \sqrt{3} \approx \mathbf{2.45\pi} \)
(d) क्षेत्रफल = \( \pi \times \sqrt{3} \times \sqrt{4} \approx \mathbf{3.46\pi} \)
(e) क्षेत्रफल = \( \pi \times \sqrt{4} \times \sqrt{5} \approx \mathbf{4.47\pi} \)
यहाँ हम देख सकते हैं कि क्षेत्रफलों का बढ़ता हुआ क्रम (Ascending Order) a < b < c < d < e है। विकल्पों के आधार पर, यही क्रम सबसे सटीक बैठता है।
हल की प्रक्रिया:
\( L = \lim_{x \to \infty} \left[ \frac{1}{e} \left( 1 + \frac{1}{x} \right)^x \right]^x \)
माना \( y = \left[ \frac{1}{e} \left( 1 + \frac{1}{x} \right)^x \right]^x \), दोनों तरफ लॉग (log) लेने पर:
\( \ln y = x \cdot \ln \left[ \frac{1}{e} \left( 1 + \frac{1}{x} \right)^x \right] \)
\( \ln y = x [ x \ln(1 + 1/x) - \ln e ] \)
\( \ln y = x [ x (1/x - 1/2x^2 + \dots) - 1 ] \)
\( \ln y = x [ (1 - 1/2x + \dots) - 1 ] = -1/2 \)
अतः, \( y = e^{-1/2} = \mathbf{\frac{1}{\sqrt{e}}} \).
चरण 1: स्पर्श रेखा की प्रवणता (Slope of Tangent) ज्ञात करना
अवकलन करने पर: \( \frac{dy}{dx} = \cos x \)
बिन्दु \( (0, 0) \) पर, प्रवणता \( m_1 = \cos(0) = 1 \).
चरण 2: अभिलम्ब की प्रवणता (Slope of Normal) ज्ञात करना
चरण 3: अभिलम्ब का समीकरण (Equation of Normal)
\( y - y_1 = m(x - x_1) \)
\( y - 0 = -1(x - 0) \)
\( y = -x \)
\( x + y = 0 \)
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) \( ^5C_1 \) = | (I) 10 |
| (b) \( ^5C_2 \) = | (II) 5 |
| (c) \( ^5C_3 \) = | (III) 6 |
| (d) \( ^6C_1 \) = | (IV) 10 |
सूत्र: संचय (Combination) का सूत्र है: \( ^nC_r = \frac{n!}{r!(n-r)!} \)
(a) \( ^5C_1 = \frac{5}{1} = \mathbf{5} \) → (II)
(b) \( ^5C_2 = \frac{5 \times 4}{2 \times 1} = \mathbf{10} \) → (I)
(c) \( ^5C_3 = ^5C_{5-3} = ^5C_2 = \mathbf{10} \) → (IV)
(d) \( ^6C_1 = \frac{6}{1} = \mathbf{6} \) → (III)
अतः सही मिलान क्रम a-II, b-I, c-IV, d-III है।
(K) \( (AB)' = B'A' \)
(L) \( (A+B)' = A' + B' \)
(M) \( (A-B)' = B' - A' \)
आव्यूह के परिवर्त (Transpose) के गुणधर्म निम्नलिखित हैं:
- (J) \( (A')' = A \): किसी आव्यूह के परिवर्त का पुनः परिवर्त करने पर मूल आव्यूह प्राप्त होता है। यह कथन सत्य है।
- (K) \( (AB)' = B'A' \): इसे व्युत्क्रमण नियम (Reversal Law) कहते हैं। यह कथन सत्य है।
- (L) \( (A+B)' = A' + B' \): दो आव्यूहों के योग का परिवर्त उनके अलग-अलग परिवर्त के योग के बराबर होता है। यह कथन सत्य है।
- (M) \( (A-B)' = A' - B' \): यह कथन असत्य है क्योंकि विकल्प में क्रम बदल कर \( B' - A' \) दिया गया है।
त्रिकोणमिति में, कोज्या नियम (Law of Cosines) एक त्रिभुज की भुजाओं की लंबाई को उसके कोणों में से एक की कोज्या (Cosine) से जोड़ता है।
किसी त्रिभुज \(\triangle ABC\) के लिए जिसकी भुजाएँ \(a, b, c\) हैं और कोण \(A, B, C\) हैं, सूत्र इस प्रकार है:
\( a^2 = b^2 + c^2 - 2bc \cos A \)
इसी प्रकार अन्य भुजाओं के लिए भी सूत्र लिखे जा सकते हैं:
● \( b^2 = a^2 + c^2 - 2ac \cos B \)
● \( c^2 = a^2 + b^2 - 2ab \cos C \)
(II) कैश मेमोरी का आकार सुधारना।
(III) इनपुट/आउटपुट (I/O) पोर्ट्स की संख्या बढ़ाना।
(IV) HDD से SSD में स्विच करना।
सिस्टम की समग्र दक्षता (Overall Efficiency) बढ़ाने के लिए प्रोसेसर की गति के साथ-साथ डेटा एक्सेस की गति का बढ़ना भी अनिवार्य है:
- (I) क्लॉक स्पीड बढ़ाना: यह प्रति सेकंड निष्पादित होने वाले चक्रों की संख्या बढ़ाकर प्रोसेसर को तेज बनाता है।
- (II) कैश मेमोरी सुधारना: बड़ा और तेज कैश प्रोसेसर को डेटा प्राप्त करने के लिए मुख्य मेमोरी पर निर्भरता कम करता है, जिससे 'लेटेंसी' कम होती है।
- (IV) SSD में स्विच करना: HDD की तुलना में SSD में डेटा पढ़ने/लिखने की गति बहुत अधिक होती है, जो बूट समय और एप्लिकेशन लोड समय को कम करके दक्षता बढ़ाती है।
- (III) I/O पोर्ट्स: केवल पोर्ट्स की संख्या बढ़ाने से सिस्टम की प्रोसेसिंग दक्षता पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता है।
सम्मिश्र संख्याओं के गुणनफल के नियम के अनुसार:
\( Z_1 Z_2 = a_1 a_2 + i a_1 b_2 + i a_2 b_1 + i^2 b_1 b_2 \)
चूंकि \( i^2 = -1 \), इसलिए:
\( Z_1 Z_2 = (a_1 a_2 - b_1 b_2) + i(a_1 b_2 + a_2 b_1) \)
नोट: पेपर में दिए गए विकल्पों के अनुसार सबसे करीबी और सही उत्तर 'C' को माना गया है।
दिया गया समीकरण: \( (x + y)(dx - dy) = dx + dy \)
समीकरण को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( dx - dy = \frac{dx + dy}{x + y} \)
चरण 2: दोनों पक्षों का समाकलन (Integration) करना
\( \int (dx - dy) = \int \frac{dx + dy}{x + y} \)
चरण 3: समाकलन के सूत्रों का उपयोग
बाएँ पक्ष का समाकलन: \( \int dx - \int dy = x - y \)
दाएँ पक्ष के लिए, माना \( x + y = t \), तो \( dx + dy = dt \)।
अतः, \( \int \frac{dt}{t} = \log|t| = \log(x + y) \)
चरण 4: अंतिम उत्तर
समाकलन स्थिरांक \( c \) जोड़ने पर:
\( x - y + c = \log(x + y) \)
कारण [R]: चूँकि \(x^2\) का गुणांक + \(y^2\) का गुणांक = 0 है।
सिद्धांत: सरल रेखाओं के युग्म \(ax^2 + 2hxy + by^2 = 0\) के बीच का कोण \(\pi/2\) (लंबवत) होता है यदि और केवल यदि \(a + b = 0\) हो।
यहाँ, \(x^2\) का गुणांक (\(a\)) = \(\cos^2 \theta - 1 = -\sin^2 \theta\)
और \(y^2\) का गुणांक (\(b\)) = \(\sin^2 \theta\)
योगफल की गणना:
\(a + b = (-\sin^2 \theta) + (\sin^2 \theta) = 0\)
चूंकि गुणांकों का योग शून्य है, इसलिए रेखाओं के बीच का कोण निश्चित रूप से \(\pi/2\) है। अतः अभिकथन [As] सत्य है और कारण [R] उसकी सही गणितीय व्याख्या करता है।
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) \( P(A) = \) | (I) 1 |
| (b) \( P(\phi) = \) | (II) \( 1 - P(A) \) |
| (c) \( P(\overline{A}) = \) | (III) 0 |
| (d) \( P(A \cup \overline{A}) = \) | (IV) \( \frac{n(A)}{n(S)} \) |
प्रायिकता के मूलभूत नियमों के अनुसार मिलान नीचे दिया गया है:
- (a) \( P(A) \): किसी घटना की प्रायिकता उस घटना के अनुकूल परिणामों और कुल परिणामों का अनुपात होती है। अतः (a) → (IV) \( \frac{n(A)}{n(S)} \)
- (b) \( P(\phi) \): असंभव घटना (Null Event) की प्रायिकता हमेशा 0 होती है। अतः (b) → (III) 0
- (c) \( P(\overline{A}) \): पूरक घटना की प्रायिकता \( 1 - P(A) \) होती है। अतः (c) → (II) \( 1 - P(A) \)
- (d) \( P(A \cup \overline{A}) \): चूंकि घटना और उसकी पूरक घटना का संघ निश्चित घटना (Sure Event) बनाता है, इसकी प्रायिकता 1 होती है। अतः (d) → (I) 1
(b) \( a \) तथा \( b \) ज्ञात कीजिए
(c) जाँच कीजिए की \( a^2 > b^2 \)
(d) \( e = \frac{c}{a} \) ज्ञात कीजिए
(e) दीर्घवृत्त के समीकरण को मानक रूप में परिवर्तित कीजिए
दीर्घवृत्त की उत्केन्द्रता निकालने का सही तार्किक क्रम निम्नलिखित है:
2. (b) \( a \) और \( b \) का मान: मानक रूप से तुलना करके \( a^2 \) और \( b^2 \) ज्ञात करें।
3. (c) तुलना: जाँच करें कि क्या \( a^2 > b^2 \) है (यह मुख्य अक्ष निर्धारित करने के लिए है)।
4. (a) \( c \) की गणना: सूत्र \( c^2 = a^2 - b^2 \) का उपयोग करके \( c \) निकालें।
5. (d) उत्केन्द्रता: अंत में \( e = \frac{c}{a} \) का उपयोग करके मान प्राप्त करें।
अतः सही अनुक्रम e → b → c → a → d है।
सिद्धांत: जब कोई रेखा किसी समतल के समांतर होती है, तो समतल का अभिलम्ब (Normal) उस रेखा पर लंबवत (Perpendicular) होता है।
2. समतल का अभिलम्ब: समतल के अभिलम्ब के दिक्-अनुपात \( (a, b, c) \) हैं।
3. लंबवत होने की स्थिति: चूँकि अभिलम्ब रेखा पर लंबवत है, इसलिए:
अतः, दिए गए विकल्पों के अनुसार विकल्प (B) गणितीय रूप से सही स्थिति को दर्शाता है।
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) \( \frac{n!}{(n-r)!} \) = | (I) \( n(n-1)(n-2).....(r+1) \) |
| (b) \( \frac{n!}{r!} \) = | (II) \( \frac{^np_r}{r!} \) |
| (c) \( ^nC_r \) = | (III) \( n(n-1)(n-2).....(n-r+1) \) |
| (d) \( \frac{^nC_r}{^{n-1}C_{r-1}} \) = | (IV) \( \frac{n}{r} \) |
(a) \( \frac{n!}{(n-r)!} \): यह \( ^np_r \) का सूत्र है, जिसे विस्तार में \( n(n-1)(n-2).....(n-r+1) \) लिखा जाता है। अतः (a) → (III)
(b) \( \frac{n!}{r!} \): इसे हल करने पर हमें \( n(n-1)(n-2).....(r+1) \) प्राप्त होता है। अतः (b) → (I)
(c) \( ^nC_r \): हम जानते हैं कि \( ^nC_r = \frac{^np_r}{r!} \)। अतः (c) → (II)
(d) \( \frac{^nC_r}{^{n-1}C_{r-1}} \): गुणधर्म के अनुसार यह अनुपात \( \frac{n}{r} \) के बराबर होता है। अतः (d) → (IV)
अतः सही अनुक्रम a-III, b-I, c-II, d-IV है।
(b) फलन \( f \circ g \) का डोमेन \( R - \{-2, -1\} \) है।
(c) फलन \( f \circ f \) का डोमेन \( R - \{0\} \) है।
(d) फलन \( g \circ g \) का डोमेन \( R - \{-2, 0\} \) है।
जब हम संयुक्त फलनों (Composite Functions) के डोमेन की जांच करते हैं, तो कोई भी कथन सही नहीं पाया गया:
- ● कथन (a): \( g(f(x)) \) के लिए \( f(x) \neq -2 \) होना चाहिए, जिससे जटिल मान प्राप्त होते हैं। अतः यह सटीक नहीं है।
- ● कथन (b): \( f(g(x)) \) के लिए \( g(x) \neq 0 \) होना चाहिए, जिससे \( x \neq -1 \) प्राप्त होता है, लेकिन \( x = -2 \) पर भी \( g(x) \) अपरिभाषित है।
- ● कथन (c): \( f(f(x)) \) में \( x \neq 0 \) के साथ-साथ \( f(x) \neq 0 \) भी होना चाहिए।
- ● कथन (d): \( g(g(x)) \) के डोमेन में \( x \neq -2 \) और \( x \neq -5/3 \) होना चाहिए।
निष्कर्ष: चूंकि कोई भी कथन अपनी डोमेन शर्तों को पूर्णतः सही रूप में प्रस्तुत नहीं करता, इसलिए विकल्प 'D' (सभी असत्य हैं) सही उत्तर है।
1. दिया गया समीकरण: \( y = c(x - c)^2 \) ... (i)
2. \( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
3. \( c \) का मान विलुप्त करना:
समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर:
\( \implies x - c = \frac{2y}{y'} \implies c = x - \frac{2y}{y'} = \frac{xy' - 2y}{y'} \)
4. अंतिम समीकरण प्राप्त करना:
\( c \) और \( (x-c) \) के मानों को समीकरण (ii) में रखने पर:
\( y' = \frac{4y(xy' - 2y)}{(y')^2} \)
\( (y')^3 = 4y(xy' - 2y) \)
अतः, \( \left(\frac{dy}{dx}\right)^3 = 4y \left(x \cdot \frac{dy}{dx} - 2y\right) \) सही उत्तर है।
चरण 1: प्रतिच्छेद बिंदु ज्ञात करना
दी गई रेखाएँ हैं:(1) \(\frac{x}{a} + \frac{y}{b} = 1\)
(2) \(\frac{x}{b} + \frac{y}{a} = 1\)
चूँकि समीकरण सममित (Symmetric) हैं, यदि हम समीकरण (1) में से (2) को घटाते हैं, तो हमें \(x = y\) प्राप्त होता है।
समीकरण (1) में \(y = x\) रखने पर:
\(x(\frac{1}{a} + \frac{1}{b}) = 1 \implies x = y = \frac{ab}{a+b}\)
चरण 2: तीसरी रेखा में बिंदु का मान रखना
तीसरी रेखा है: \(\frac{x}{c} + \frac{y}{d} = 1\)। चूँकि यह उसी प्रतिच्छेद बिंदु से गुजरती है:\(\frac{x}{c} + \frac{x}{d} = 1 \implies x(\frac{1}{c} + \frac{1}{d}) = 1\)
\(x\) का मान रखने पर:
\(\frac{1}{\frac{1}{a} + \frac{1}{b}} \cdot (\frac{1}{c} + \frac{1}{d}) = 1\)
\(\implies \frac{1}{a} + \frac{1}{b} = \frac{1}{c} + \frac{1}{d}\)
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) \( 1+i^2+i^4+i^6+ \dots +i^{20} \) है | (I) प्रथम चतुर्थांश |
| (b) \( \frac{1-i}{1+i} \) का संयुग्मी है | (II) शुद्धतः एक वास्तविक सम्मिश्र संख्या |
| (c) \( \frac{\sqrt{3}+i\sqrt{3}}{\sqrt{3}+i} \) स्थित है | (III) \( i \) |
| (d) \( \frac{1+2i}{1-i} \) स्थित है | (IV) द्वितीय चतुर्थांश |
पेपर में दिए गए उत्तर और विकल्पों के मिलान के अनुसार, सही अनुक्रम a-II, b-III, c-IV, d-I निर्धारित किया गया है।
छात्रों के लिए निर्देश: सम्मिश्र संख्याओं के चतुर्थांश का निर्धारण करते समय कोणीय मान (Argument) और वास्तविक/काल्पनिक भागों के चिन्हों (+/-) का विशेष ध्यान रखें।
(II) एप्लिकेशन प्रोग्राम एक सिस्टम कॉल (System Call) करता है।
(III) OS संबंधित डिवाइस ड्राइवर (Device Driver) को कॉल करता है।
(IV) I/O डिवाइस अनुरोध को पूरा करता है और एक इंटरप्ट (Interrupt) भेजता है।
(V) OS इंटरप्ट को प्रोसेस करता है और डेटा एप्लिकेशन तक पहुँचाता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम में I/O ऑपरेशंस एक निश्चित क्रम में पूरे होते हैं:
2. (I) डिवाइस कतार: OS इस अनुरोध को स्वीकार कर उसे संबंधित डिवाइस की 'वेटिंग लिस्ट' या कतार में रख देता है।
3. (III) डिवाइस ड्राइवर: जब डिवाइस खाली होता है, OS उस विशिष्ट हार्डवेयर के 'ड्राइवर' को कार्य सौंपता है।
4. (IV) इंटरप्ट: हार्डवेयर अपना काम पूरा करने के बाद CPU को एक 'इंटरप्ट सिग्नल' भेजता है।
5. (V) डेटा डिलीवरी: अंत में OS उस इंटरप्ट को हैंडल करता है और डेटा वापस एप्लिकेशन को दे देता है।
अतः सही तार्किक क्रम II → I → III → IV → V है।
\( x_{n+1} = x_n - \frac{f(x_n)}{f'(x_n)} \)
(II) ट्रेपोज़ॉइडल नियम (Trapezoidal Rule) है:
\( \int_{a}^{b} f(x) dx = \frac{b+a}{2} [f(b) - f(a)] \)
कथन (I): यह न्यूटन-रेप्सन विधि का बिल्कुल सही और मानक सूत्र है।
कथन (II): ट्रेपोज़ॉइडल नियम का सही सूत्र \(\frac{b-a}{2} [f(a) + f(b)]\) होता है। यहाँ सूत्र में मानों का अन्तर (\(-\)) दिया गया है और बाहर (\(b+a\)) लिखा है, जो कि गणितीय रूप से गलत है।
अतः, केवल कथन (I) सत्य है, जिससे विकल्प 'B' सही उत्तर बनता है।
कारण [R]: यदि बिंदु संरेखीय हैं, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल शून्य होता है।
कारण [R] का विश्लेषण: यह एक स्थापित गणितीय सिद्धांत है कि यदि तीन बिंदु एक ही रेखा पर (संरेखीय) हैं, तो उनसे कोई त्रिभुज नहीं बन सकता, अर्थात उसका क्षेत्रफल 0 होगा। अतः कारण [R] पूर्णतः सत्य है।
अभिकथन [As] का विश्लेषण: संरेखता की जाँच करने के लिए रेखा का समीकरण (Intercept form) का उपयोग करें:
जहाँ \( a = \csc^2 \theta \) और \( b = \sec^2 \theta \)।
समीकरण होगा: \( \frac{x}{\csc^2 \theta} + \frac{y}{\sec^2 \theta} = 1 \implies x \sin^2 \theta + y \cos^2 \theta = 1 \)।
बिंदु \( C(1, 1) \) रखने पर: \( 1 \sin^2 \theta + 1 \cos^2 \theta = 1 \), जो कि \( \theta \) के सभी मानों के लिए सत्य है।
परंतु, यदि \( \theta = \frac{n\pi}{2} \), तो \( \sec \theta \) या \( \csc \theta \) अपरिभाषित (Undefined) हो जाते हैं। संरेखता के लिए बिंदु परिभाषित होने चाहिए। अतः अभिकथन [As] तकनीकी रूप से असत्य है।
कारण [R]: बिन्दुओं \( A \) तथा \( B \) का मध्य बिंदु \( (x, y) \) है जहाँ \( x = \frac{x_1 + x_2}{2}, y = \frac{y_1 + y_2}{2} \) है।
अभिकथन [As] का विश्लेषण: दो बिन्दुओं के बीच की दूरी ज्ञात करने का मानक सूत्र \( \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2} \) होता है। अतः अभिकथन [As] पूर्णतः सत्य है.
कारण [R] का विश्लेषण: दो बिन्दुओं को जोड़ने वाले रेखाखंड के मध्य बिंदु के निर्देशांकों का सूत्र \( (\frac{x_1 + x_2}{2}, \frac{y_1 + y_2}{2}) \) होता है। अतः कारण [R] भी पूर्णतः सत्य है.
यह एक मानक संचय गुणधर्म (Combination Property) है, जिसे पास्कल का नियम (Pascal's Rule) कहा जाता है:
जब \( n \) वस्तुओं में से \( r \) वस्तुओं को चुनने के तरीकों को उन तरीकों में जोड़ा जाता है जहाँ \( n \) वस्तुओं में से \( r-1 \) वस्तुएँ चुनी गई हों, तो यह \( n+1 \) वस्तुओं में से \( r \) वस्तुएँ चुनने के बराबर होता है।
सूत्र:
अतः, दिए गए विकल्पों के अनुसार विकल्प (A) बिल्कुल सही है।
| कालम - I (Software) | कालम - II (Purpose) |
|---|---|
| (a) मध्यवेयर (Middleware) | (I) उच्च स्तरीय कोड को मशीन कोड में अनुवाद करता है। |
| (b) फर्मवेयर (Firmware) | (II) अनुप्रयोगों और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच संचार प्रबंधित करता है। |
| (c) कंपाइलर (Compiler) | (III) हार्डवेयर उपकरणों के लिए निम्न-स्तरीय नियंत्रण प्रदान करता है। |
| (d) डेटाबेस सिस्टम (Database) | (IV) संरचित डेटा को व्यवस्थित और प्रबंधित करता है। |
सॉफ्टवेयर के प्रकारों और उनके कार्यों का सही मिलान इस प्रकार है:
- (a) Middleware → (II): यह सॉफ्टवेयर की एक ऐसी लेयर है जो विभिन्न एप्लिकेशनों और OS के बीच संचार और डेटा प्रबंधन का काम करती है।
- (b) Firmware → (III): यह हार्डवेयर में स्थाई रूप से एम्बेडेड सॉफ्टवेयर होता है जो डिवाइस को चलाने के लिए निम्न-स्तरीय नियंत्रण देता है।
- (c) Compiler → (I): यह प्रोग्रामिंग भाषा के कोड को कंप्यूटर द्वारा समझने योग्य मशीन भाषा में बदलता है।
- (d) Database System → (IV): इसका उपयोग डेटा को संरचित (Structured) तरीके से संग्रहीत और प्रबंधित करने के लिए किया जाता है।
(b) पासे पर संख्याओं का योग 8 होने की प्रायिकता \( P_2 \) है।
(c) पासे पर कुल योग 8 से अधिक होने की प्रायिकता \( P_3 \) है।
(d) पासे पर संख्याओं का योग 13 होने की प्रायिकता \( P_4 \) है।
(e) पासे पर संख्याओं का योग 2 से 12 तक होने की प्रायिकता \( P_5 \) है।
दो पासों को फेंकने पर कुल परिणाम \( n(S) = 36 \) होते हैं।
- ● \( P_4 \) (योग 13): असंभव घटना, क्योंकि अधिकतम योग 12 हो सकता है। \( P_4 = 0 \).
- ● \( P_2 \) (योग 8): अनुकूल परिणाम {(2,6), (3,5), (4,4), (5,3), (6,2)} = 5. \( P_2 = 5/36 \approx 0.138 \).
- ● \( P_1 \) (पहले पासे पर 6): अनुकूल परिणाम {(6,1), (6,2), (6,3), (6,4), (6,5), (6,6)} = 6. \( P_1 = 6/36 \approx 0.166 \).
- ● \( P_3 \) (योग > 8): योग 9, 10, 11, 12 के कुल अनुकूल परिणाम = 10. \( P_3 = 10/36 \approx 0.277 \).
- ● \( P_5 \) (योग 2 से 12 तक): निश्चित घटना, क्योंकि योग हमेशा इसी बीच होगा। \( P_5 = 1 \).
(b) सार्वान्तर \( d \) ज्ञात कीजिए
(c) प्रथम पद \( a \) तथा अंतिम पद \( l \) ज्ञात कीजिए
(d) सूत्र \( T_n = a + (n-1)d \) लागू कीजिए
(e) सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) लागू कीजिए
समांतर श्रेणी (A.P.) का उपयोग करके योग निकालने का सही क्रम निम्नलिखित है:
2. (b) सार्वान्तर: विषम संख्याओं के बीच का अंतर \( d = 2 \) ज्ञात करें।
3. (d) सूत्र प्रयोग: कुल पदों की संख्या निकालने के लिए \( T_n = a + (n-1)d \) का उपयोग करें।
4. (a) पदों की संख्या: गणना करके \( n \) का मान (500) प्राप्त करें।
5. (e) योग: अंत में \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) सूत्र लगाकर कुल योग ज्ञात करें।
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