
प्रश्न 51: हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bond) और क्वथनांक (Boiling Point)
सवाल: हाइड्रोजन बंधन के कारण निम्नांकित के क्वथनांक के घटते क्रम के आधार पर सही उत्तर चुनिए:
(a) HF (b) NH₃ (c) H₂O (d) H₂S (e) H-I
A. c > a > b > e > d
B. a > b > d > c > e
C. e > b > a > d > c
D. d > e > a > b > c
Detailed Explanation (विस्तृत समाधान):
क्वथनांक (Boiling Point) का यह क्रम मुख्य रूप से हाइड्रोजन बॉन्डिंग (H-bonding) की मजबूती और प्रति अणु बॉन्ड्स की संख्या पर निर्भर करता है:
- H₂O (c): पानी के एक अणु में 4 हाइड्रोजन बॉन्ड बनाने की क्षमता होती है। इसी मजबूत नेटवर्क के कारण इसका क्वथनांक सबसे अधिक होता है।
- HF (a): फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) सबसे अधिक है, जिससे इसका H-bond बहुत मजबूत होता है, लेकिन यह प्रति अणु केवल 2 बॉन्ड बनाता है।
- NH₃ (b): नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता F और O से कम है, इसलिए इसका H-bond कमजोर होता है।
- H-I (e) और H₂S (d): इनमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती। यहाँ 'वेंडर वाल्स बल' काम करते हैं। H-I का अणु भार (Molecular Weight) H₂S से अधिक है, इसलिए H-I का क्वथनांक H₂S से ज्यादा होगा।
प्रश्न 52: संकरण (Hybridization) और बंध कोण (Bond Angle)
अभिकथन [As]: यद्यपि NH₃ तथा H₂O के केन्द्रक परमाणु sp³ संकरित हैं, फिर भी H—N—H बंध कोण, H—O—H बंध कोण की अपेक्षा अधिक है।
कारण [R]: इसलिए कि नाइट्रोजन परमाणु में एक एकांकी युग्म (Lone pair) इलेक्ट्रॉन है, और ऑक्सीजन परमाणु में दो एकांकी युग्म इलेक्ट्रॉन हैं।
A. [As] तथा [R] दोनों सही हैं, तथा [R], [As] की सही व्याख्या है।
B. [As] तथा [R] दोनों सही हैं, किन्तु [R], [As] की सही व्याख्या नहीं है।
C. [As] सही है, किन्तु [R] गलत है।
D. [As] तथा [R] दोनों गलत हैं।
तार्किक समाधान (Logical Explanation):
यह सवाल VSEPR सिद्धांत (Valence Shell Electron Pair Repulsion Theory) पर आधारित है:
- समान संकरण: NH₃ और H₂O दोनों में sp³ संकरण होता है, जिसका आदर्श कोण 109.5° होना चाहिए।
- NH₃ (अमोनिया): इसमें नाइट्रोजन पर 1 Lone Pair होता है। यह लोन पेयर बॉन्ड पेयर्स को थोड़ा दबाता है, जिससे कोण घटकर 107° रह जाता है।
- H₂O (पानी): इसमें ऑक्सीजन पर 2 Lone Pairs होते हैं। VSEPR के अनुसार, लोन पेयर-लोन पेयर प्रतिकर्षण सबसे अधिक होता है। ये दो लोन पेयर बॉन्ड पेयर्स को और ज्यादा सिकोड़ देते हैं, जिससे पानी का कोण घटकर 104.5° हो जाता है।
प्रश्न 53: प्रथम-कोटि अभिक्रिया (First Order Reaction)
कथन [As]: प्रथम-कोटि अभिक्रिया के लिए दर नियतांक (Rate-constant) की इकाई s⁻¹ होती है।
कारण [R]: प्रथम-कोटि अभिक्रिया में दर अभिक्रिया के पदार्थों की सांद्रता के वर्ग के अनुपात में होती है।
A. [As] और [R] दोनों सत्य हैं, और [R], [As] की सही व्याख्या है।
B. [As] और [R] दोनों सत्य हैं, परंतु [R], [As] की सही व्याख्या नहीं है।
C. [As] सत्य है, लेकिन [R] असत्य है।
D. [As] असत्य है, लेकिन [R] सत्य है।
विस्तृत समाधान (Detailed Explanation):
इस प्रश्न का विश्लेषण नीचे दिए गए चरणों में किया गया है:
- कथन [As] का विश्लेषण: प्रथम-कोटि अभिक्रिया के लिए दर समीकरण $Rate = k[A]^1$ होता है। यहाँ $k$ की इकाई निकालने का सूत्र $[Time]^{-1}$ होता है। अतः s⁻¹ बिल्कुल सही इकाई है।
- कारण [R] का विश्लेषण: प्रथम-कोटि अभिक्रिया में अभिक्रिया की दर, अभिकारकों की सांद्रता की प्रथम घात (Power 1) के समानुपाती होती है। कारण में "वर्ग के अनुपात" (सांद्रता²) कहा गया है, जो कि द्वितीय-कोटि (Second Order) अभिक्रिया की विशेषता है।
- निष्कर्ष: चूँकि कथन सही है और कारण गलत है, इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।
प्रश्न 54: धातुओं की सक्रियता और मानक इलेक्ट्रोड विभव ($E^\circ$)
सवाल: धातुओं को उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव ($E^\circ$) के आधार पर उनकी प्रतिक्रियाशीलता (Reactivity) के घटते क्रम में क्रमबद्ध करें:
(a) Cu (b) Zn (c) Fe (d) Ag
A. b > c > a > d
B. d > a > c > b
C. a > b > c > d
D. c > d > a > b
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
किसी धातु की सक्रियता उसके मानक अपचयन विभव (Standard Reduction Potential) के मान पर निर्भर करती है:
- मूल सिद्धांत: जिस धातु का $E^\circ$ मान जितना अधिक ऋणात्मक (Negative) होता है, वह धातु उतनी ही आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग कर ऑक्सीकृत हो जाती है, अर्थात वह उतनी ही अधिक सक्रिय होती है।
- Zn (b): जिंक का $E^\circ$ मान लगभग -0.76 V है (सबसे अधिक ऋणात्मक), इसलिए यह सबसे सक्रिय है।
- Fe (c): आयरन का $E^\circ$ मान लगभग -0.44 V है। यह Zn से कम लेकिन Cu से अधिक सक्रिय है।
- Cu (a): कॉपर का विभव धनात्मक (+0.34 V) होता है, इसलिए इसकी सक्रियता कम होती है।
- Ag (d): सिल्वर का विभव और भी अधिक धनात्मक (+0.80 V) होता है, जिससे यह इन चारों में सबसे कम सक्रिय है।
प्रश्न 55: विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) की इकाई
सवाल: विद्युत चालकता (Electrical conductivity) की इकाई क्या है?
A. Sm⁻¹
B. ओम (Ohm)
C. एम्पीयर (Ampere)
D. (वोल्ट) Volt
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
विद्युत चालकता ($\sigma$) किसी पदार्थ की वह क्षमता है जिससे वह विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है:
- परिभाषा: यह विशिष्ट प्रतिरोध ($\rho$) का व्युत्क्रम (Reciprocal) होता है।
- इकाई व्युत्पत्ति: विशिष्ट प्रतिरोध की इकाई $\Omega \cdot m$ होती है। इसलिए चालकता की इकाई $1/(\Omega \cdot m)$ या $\Omega^{-1}m^{-1}$ होती है।
- सीमेंस (Siemens): चूंकि $\Omega^{-1}$ को सीमेंस ($S$) कहा जाता है, इसलिए इसकी SI इकाई Sm⁻¹ (सीमेंस प्रति मीटर) बन जाती है।
प्रश्न 56: एंट्रॉपी (Entropy) की SI इकाई
सवाल: एंट्रॉपी की SI इकाई क्या है?
A. J
B. J/K
C. J/mol
D. J/mol.K
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
एंट्रॉपी किसी प्रणाली की अव्यवस्था (Randomness) की माप है। इसकी इकाई को हम इसके गणितीय सूत्र से निकाल सकते हैं:
- सूत्र: एंट्रॉपी में परिवर्तन ($dS$) का सूत्र होता है: $$dS = \frac{dQ_{rev}}{T}$$
- इकाई व्युत्पत्ति: यहाँ $dQ$ ऊष्मा (Heat) है जिसकी इकाई जूल (J) होती है, और $T$ तापमान है जिसकी SI इकाई केल्विन (K) होती है।
- निष्कर्ष: इसलिए, एंट्रॉपी की SI इकाई J/K (जूल प्रति केल्विन) होती है।
प्रश्न 57: अल्कोहल के निर्जलीकरण (Dehydration of Alcohols) की दर
सवाल: अल्कोहल के निर्जलीकरण की दर निम्न क्रम का अनुसरण करती है -
A. 2° > 1° > CH₃OH > 3°
B. 3° > 2° > 1° > CH₃OH
C. 2° > 3° > 1° > CH₃OH
D. CH₃OH > 1° > 2° > 3°
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
अल्कोहल का निर्जलीकरण (H₂O का निकलना) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मध्यवर्ती (Intermediate) के रूप में कार्बोकेटायन (Carbocation) बनता है:
- सिद्धांत: निर्जलीकरण की दर सीधे तौर पर बनने वाले कार्बोकेटायन की स्थिरता (Stability) के समानुपाती होती है।
- स्थिरता का क्रम: हम जानते हैं कि तृतीयक (3°) कार्बोकेटायन सबसे अधिक स्थिर होता है, उसके बाद द्वितीयक (2°), फिर प्राथमिक (1°) और सबसे कम स्थिर मिथाइल (CH₃⁺) होता है।
- निष्कर्ष: चूँकि 3° अल्कोहल से सबसे स्थिर कार्बोकेटायन बनता है, इसलिए इसके निर्जलीकरण की दर सबसे तेज होती है। अतः सही क्रम 3° > 2° > 1° > CH₃OH है।
प्रश्न 58: क्रिस्टल में अंतराकाशी दोष (Interstitial Defect)
सवाल: किस प्रकार की त्रुटि में क्रिस्टल के अंतराकाशी स्थान में धनायन पाया जाता है?
A. शॉटकी त्रुटि (Schottky defect)
B. रिक्त स्थान त्रुटि (Vacancy defect)
C. फ्रेन्केल त्रुटि (Frenkel defect)
D. धातु न्यूनता त्रुटि (Metal deficiency defect)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
क्रिस्टल में बिंदुओं के अपने स्थान से विचलित होने पर विभिन्न दोष उत्पन्न होते हैं:
- फ्रेन्केल त्रुटि (Frenkel Defect): इसमें लघुतर आयन (आमतौर पर धनायन) अपने वास्तविक स्थान से लुप्त होकर अंतराकाशी स्थान (Interstitial site) में आ जाता है। यह एक प्रकार का विस्थापन दोष (Dislocation defect) है।
- शॉटकी त्रुटि (Schottky Defect): इसमें समान संख्या में धनायन और ऋणायन अपनी जगह से गायब हो जाते हैं, जिससे क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है।
- रिक्त स्थान त्रुटि: जब जालक बिंदु खाली होते हैं।
- विशेषता: फ्रेन्केल दोष उन यौगिकों में पाया जाता है जहाँ आयनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर होता है (जैसे- AgCl, AgBr, ZnS)।
प्रश्न 59: संभव क्वांटम संख्याओं के समूह की पहचान
सवाल: निम्नांकित क्वांटम संख्याओं के समुच्चय में कौन सा संभव है?
A. n = 2, l = 2, m = -1
B. n = 2, l = 2, m = 0
C. n = 2, l = 0, m = +1
D. n = 2, l = 0, m = 0
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
क्वांटम संख्याओं के सही समूह को पहचानने के लिए हमें इन तीन मुख्य नियमों का पालन करना होता है:
- नियम 1 (n): मुख्य क्वांटम संख्या $n$ हमेशा एक धनात्मक पूर्णांक (1, 2, 3...) होती है।
- नियम 2 (l): दिगंशी क्वांटम संख्या $l$ का मान हमेशा $0$ से लेकर $(n-1)$ तक ही हो सकता है। अर्थात् $l$, कभी भी $n$ के बराबर या उससे बड़ा नहीं हो सकता।
- नियम 3 (m): चुंबकीय क्वांटम संख्या $m$ का मान $-l$ से लेकर $+l$ (शून्य सहित) तक होता है।
विकल्पों की जाँच:
- विकल्प A और B: यहाँ $n=2$ और $l=2$ दिया है। चूँकि $l$, $n$ के बराबर नहीं हो सकता, इसलिए ये दोनों असत्य हैं।
- विकल्प C: यहाँ $l=0$ है, तो $m$ का मान केवल $0$ ही संभव है। इसलिए $m = +1$ होना इसे असत्य बनाता है।
- विकल्प D: यहाँ $n=2$ है, $l=0$ (जो $n-1$ से छोटा है) और $m=0$ (जो $l$ के अनुसार सही है)। यह समूह 2s कक्षक को दर्शाता है और पूरी तरह सत्य है।
प्रश्न 60: हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bond) की लंबाई
सवाल: निम्नांकित किसमें हाइड्रोजन बंध सबसे छोटा है?
A. N — H ----- O
B. S — H ----- S
C. S — H ----- O
D. F — H ----- F
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
हाइड्रोजन बंध की लंबाई और उसकी मजबूती सीधे तौर पर उन परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पर निर्भर करती है जिनसे हाइड्रोजन जुड़ा है:
- मुख्य नियम: परमाणु जितना अधिक विद्युत ऋणात्मक होगा, वह हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनों को उतनी ही मजबूती से अपनी ओर खींचेगा। इससे बनने वाला हाइड्रोजन बंध उतना ही मजबूत और लंबाई में छोटा होगा।
- तुलना: फ्लोरीन (F) पूरी आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है। इसकी विद्युत ऋणात्मकता ऑक्सीजन (O) और नाइट्रोजन (N) से काफी अधिक होती है।
- निष्कर्ष: चूँकि फ्लोरीन की पकड़ सबसे ज्यादा है, इसलिए F — H ----- F बंध सबसे छोटा और प्रबलतम होता है।
प्रश्न 61: रासायनिक बंध और सिद्धांतों की सत्यता
सवाल: निम्नांकित में से कौन से कथन सही नहीं हैं?
(a) NaCl एक आयनिक यौगिक है जो ठोस अवस्था में विद्युत सुचालक है।
(b) कैनोनिकल संरचनाओं में परमाणुओं की व्यवस्था में अंतर होता है।
(c) विशुद्ध कक्षकों की अपेक्षा संकरित कक्षक प्रबल बंध बनाते हैं।
(d) VSEPR सिद्धांत XeF₄ के वर्ग समतलीय संरचना को समझाता है।
A. c और d
B. b और c
C. a और b
D. a और d
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
आइये प्रत्येक कथन की गहराई से जाँच करते हैं ताकि छात्रों को सही और गलत का अंतर समझ आ सके:
- कथन (a) की जाँच: NaCl एक आयनिक यौगिक तो है, लेकिन यह केवल गलित (Molten) या जलीय अवस्था में विद्युत का सुचालक होता है। ठोस अवस्था में इसके आयन स्थिर होते हैं, इसलिए यह कुचालक होता है। अतः यह कथन गलत है।
- कथन (b) की जाँच: अनुनाद (Resonance) या कैनोनिकल संरचनाओं में केवल इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था बदलती है, परमाणुओं की स्थिति कभी नहीं बदलती। अतः यह कथन भी गलत है।
- कथन (c) की जाँच: यह सही है कि संकरित कक्षक (Hybrid orbitals) अधिक दिशात्मक होते हैं और बेहतर ओवरलैपिंग के कारण प्रबल बंध बनाते हैं।
- कथन (d) की जाँच: VSEPR सिद्धांत के अनुसार XeF₄ में 4 बॉन्ड पेयर और 2 लोन पेयर होते हैं, जिससे इसकी संरचना वर्ग समतलीय (Square Planar) होती है। यह कथन सही है।
प्रश्न 62: एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क (Ore of Aluminium)
सवाल: निम्नलिखित में से कौन सा एल्युमिनियम का एक अयस्क है?
A. मेग्नेटाइट (Magnetite)
B. मेलेकाइट (Malachite)
C. बॉक्साइट (Bauxite)
D. केलेमाइन (Calamine)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
प्रकृति में धातुएँ अक्सर यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं जिन्हें खनिज कहते हैं। वे खनिज जिनसे धातु आसानी से और कम खर्चे में निकाली जा सके, अयस्क कहलाते हैं:
- बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O): यह एल्युमिनियम का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण अयस्क है। दुनिया भर में एल्युमिनियम का व्यावसायिक उत्पादन इसी से किया जाता है।
- अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- मेग्नेटाइट (Fe₃O₄): यह लोहे (Iron) का एक मुख्य अयस्क है।
- मेलेकाइट [Cu₂CO₃(OH)₂]: यह तांबे (Copper) का एक अयस्क है।
- केलेमाइन (ZnCO₃): यह जिंक (Zinc) का एक महत्वपूर्ण अयस्क है।
प्रश्न 63: द्वितीय-कोटि अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक (Rate Constant Unit)
सवाल: द्वितीय-कोटि (Second-order) अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक की इकाई क्या है?
A. s⁻¹
B. mol L⁻¹ s⁻¹
C. L mol⁻¹ s⁻¹
D. L² mol⁻² s⁻¹
विस्तृत समाधान (Detailed Solution):
Dar sthirank (k) ki unit nikalne ke liye hum n-th order ka ek general formula use karte hain:
- General Formula: $Unit = (mol L^{-1})^{1-n} s^{-1}$
- Dvitiya-Koti (n = 2) ke liye:
- $(mol L^{-1})^{1-2} s^{-1}$
- $(mol L^{-1})^{-1} s^{-1}$
- L mol⁻¹ s⁻¹
- Anya vikalp: - s⁻¹ pratham koti (1st order) ke liye hai. - mol L⁻¹ s⁻¹ shoony koti (0 order) ke liye hai.
प्रश्न 64: विलयन का pH मान (pH Value of Solution)
सवाल: एक विलयन में $[H^+] = 1 \times 10^{-3} M$ है। इसका pH क्या होगा?
A. 3
B. 4
C. 5
D. 6
विस्तृत गणितीय समाधान (Detailed Calculation):
pH मान निकालने के लिए हम सोरेनसन (Sorensen) द्वारा दिए गए सूत्र का उपयोग करते हैं:
- pH सूत्र: $pH = -\log[H^+]$
- मान रखने पर: चूँकि सवाल में $[H^+] = 10^{-3} M$ दिया गया है:
- $pH = -\log(10^{-3})$
- $pH = -(-3) \log(10)$
- चूँकि $\log(10) = 1$ होता है, इसलिए $pH = 3$।
- विलयन की प्रकृति: चूँकि pH का मान 7 से कम है, इसलिए यह विलयन अम्लीय (Acidic) होगा।
प्रश्न 65: वर्ग-1 में उच्चतम विद्युत ऋणात्मकता (Highest Electronegativity in Group-1)
सवाल: आवर्त सारणी के वर्ग-1 में निम्नलिखित में से किस तत्व की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक है?
A. Na (सोडियम)
B. Li (लिथियम)
C. Rb (रूबिडियम)
D. K (पोटैशियम)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता है। वर्ग (Group) में इसके बदलने का नियम निम्नलिखित है:
- वर्ग में रुझान (Trend in Group): जब हम किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं, तो परमाणु का आकार (Atomic Size) बढ़ता है।
- प्रभाव: आकार बढ़ने के कारण नाभिक (Nucleus) की बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे विद्युत ऋणात्मकता घटती है।
- तुलना: वर्ग-1 (अल्काली धातुएं) में तत्वों का क्रम इस प्रकार है: Li > Na > K > Rb > Cs।
- निष्कर्ष: चूँकि लिथियम (Li) इस वर्ग में सबसे ऊपर स्थित है और इसका आकार सबसे छोटा है, इसलिए इसकी विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक (लगभग 1.0) होती है।
प्रश्न 66: अभिक्रिया का सबसे धीमा पद (Slowest Step of Reaction)
सवाल: अभिक्रिया की क्रियाविधि (Mechanism) में सबसे धीमे पद (Slowest step) को क्या कहा जाता है?
A. सक्रियण पद (Activation step)
B. श्रृंखला प्रारंभन पद (Chain initiation step)
C. दर-निर्धारक पद (Rate-determining step)
D. श्रृंखला समापन पद (Termination step)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
जब कोई रासायनिक अभिक्रिया कई पदों (Steps) में पूरी होती है, तो उसे 'जटिल अभिक्रिया' कहते हैं। ऐसी अभिक्रियाओं के लिए निम्नलिखित नियम लागू होता है:
- दर-निर्धारक पद (RDS): किसी बहु-पद अभिक्रिया में सबसे धीमा पद ही पूरी अभिक्रिया की 'दर' (Speed) तय करता है। इसे ही Rate-determining step कहा जाता है।
- उदाहरण: यदि आप किसी बोतल से पानी निकाल रहे हैं, तो पानी निकलने की रफ्तार बोतल की गर्दन की चौड़ाई पर निर्भर करेगी, चाहे बोतल कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
- महत्व: अभिक्रिया की 'कोटि' (Order) हमेशा इसी धीमे पद के आधार पर लिखी जाती है।
प्रश्न 67: अभिक्रिया दर पर उत्प्रेरक और अवरोधक का प्रभाव
सवाल: अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम के आधार पर निम्नलिखित को व्यवस्थित करें:
(a) उत्प्रेरक (Catalyst)
(b) अभिकारक (Reactant)
(c) अवरोधक (Inhibitor)
A. a < b < c
B. c < b < a
C. a < c < b
D. c < a < b
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
अभिक्रिया की दर इस बात पर निर्भर करती है कि माध्यम में कौन सा पदार्थ उपस्थित है:
- अवरोधक (Inhibitor - c): यह अभिक्रिया की दर को कम कर देता है। इसलिए यह बढ़ते क्रम में सबसे पहले (सबसे धीमा) आएगा।
- अभिकारक (Reactant - b): यह सामान्य अभिक्रिया की दर को दर्शाता है जहाँ कोई बाहरी पदार्थ (उत्प्रेरक/अवरोधक) नहीं मिलाया गया है।
- उत्प्रेरक (Catalyst - a): यह सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को कम करके अभिक्रिया की दर को बहुत तेज कर देता है। अतः यह क्रम में सबसे अंत में आएगा।
- निष्कर्ष: सही बढ़ता क्रम अवरोधक < अभिकारक < उत्प्रेरक (c < b < a) है।
प्रश्न 68: संतृप्त यौगिक की पहचान (Saturated Compounds)
सवाल: निम्नलिखित में से कौन सा संतृप्त यौगिक (Saturated compound) का उदाहरण है?
A. एथेन (Ethane)
B. एथीन (Ethene)
C. एथाइन (Ethyne)
D. सभी विकल्प सही हैं (All options are correct)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन को उनके बंधों (Bonds) के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
- संतृप्त यौगिक (Saturated Compounds): ऐसे यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल बंध (Single Bond) होता है। इन्हें 'एल्केन' (Alkanes) कहा जाता है। एथेन (C₂H₆) इसका सही उदाहरण है।
- असंतृप्त यौगिक (Unsaturated Compounds): जिनमें कार्बन के बीच द्विबंध (Double Bond) या त्रिबंध (Triple Bond) होता है।
- एथीन (C₂H₄): इसमें द्विबंध होता है (एल्कीन)।
- एथाइन (C₂H₂): इसमें त्रिबंध होता है (एल्काइन)।
प्रश्न 69: pH मान और विलयन की प्रकृति (pH Value and Nature of Solution)
सवाल: निम्नलिखित में से किसका pH 7 से अधिक होगा?
(I) NH₃ विलयन
(II) NaOH विलयन
(III) CH₃COOH विलयन
(IV) Na₂CO₃ विलयन
A. I, II और III
B. I और II
C. I, II और IV
D. I, III और IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
pH का मान 7 से अधिक होने का अर्थ है कि विलयन क्षारीय (Basic) प्रकृति का है। आइये प्रत्येक की जाँच करें:
- (I) NH₃ विलयन: अमोनिया एक दुर्बल क्षार (Weak Base) है, इसलिए इसका pH 7 से अधिक होता है।
- (II) NaOH विलयन: सोडियम हाइड्रोक्साइड एक प्रबल क्षार (Strong Base) है, इसका pH 13-14 के करीब (7 से बहुत अधिक) होता है।
- (III) CH₃COOH विलयन: एसिटिक एसिड एक अम्ल है। अम्ल का pH हमेशा 7 से कम होता है।
- (IV) Na₂CO₃ विलयन: यह एक 'क्षारीय लवण' है क्योंकि यह प्रबल क्षार (NaOH) और दुर्बल अम्ल (H₂CO₃) से बना है। इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है और pH 7 से अधिक होता है।
प्रश्न 70: विलयनों का मिश्रण और नॉर्मलता (Mixing of Solutions)
सवाल: 1 लीटर 6 N HCl बनाने के लिए 4 N HCl और 10 N HCl के कितने आयतन की आवश्यकता होगी?
A. 0.75 लीटर 4 N HCl व 0.25 लीटर 10 N HCl
B. 0.25 लीटर 4 N HCl व 0.75 लीटर 10 N HCl
C. 0.67 लीटर 4 N HCl व 0.33 लीटर 10 N HCl
D. 0.33 लीटर 4 N HCl व 0.67 लीटर 10 N HCl
विस्तृत गणितीय समाधान (Detailed Solution):
इसे हल करने के लिए हम मिश्रण के सूत्र ($N_1V_1 + N_2V_2 = N_R V_R$) का उपयोग करते हैं:
- माना 4 N HCl का आयतन $x$ लीटर है।
- तो 10 N HCl का आयतन $(1 - x)$ लीटर होगा।
- समीकरण: $(4 \times x) + (10 \times (1 - x)) = 6 \times 1$
$4x + 10 - 10x = 6$
$-6x = 6 - 10$
$-6x = -4$
$x = 4/6 = 0.67$ लीटर (लगभग) - निष्कर्ष: 4 N HCl का आयतन 0.67 लीटर और 10 N HCl का आयतन $1 - 0.67 =$ 0.33 लीटर होगा।
प्रश्न 71: गैल्वेनिक सेल की विशेषताएं (Features of Galvanic Cell)
सवाल: निम्नलिखित में से कौन सी बातें एक गैल्वेनिक सेल के लिए सही हैं?
(I) यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
(II) ऑक्सीकरण कैथोड पर होता है।
(III) इलेक्ट्रॉन एनोड से कैथोड की ओर प्रवाहित होते हैं।
(IV) अभिक्रिया स्वतः-स्फूर्त (Spontaneous) होती है।
A. I, II और III
B. I और II
C. I और IV
D. I, III और IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
गैल्वेनिक सेल (जैसे डेनियल सेल) के कार्य करने के मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
- कथन (I): यह बिल्कुल सही है। गैल्वेनिक सेल रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा को बिजली (विद्युत ऊर्जा) में बदलता है।
- कथन (II): यह गलत है। गैल्वेनिक सेल में ऑक्सीकरण हमेशा एनोड (Anode) पर होता है, कैथोड पर अपचयन (Reduction) होता है।
- कथन (III): यह सही है। इलेक्ट्रॉन एनोड (जहाँ ऑक्सीकरण होता है) से निकलकर बाहरी परिपथ के माध्यम से कैथोड की ओर जाते हैं।
- कथन (IV): यह सही है। इस सेल में होने वाली रासायनिक अभिक्रिया स्वतः-स्फूर्त होती है, जिसके लिए गिब्स मुक्त ऊर्जा ($\Delta G$) ऋणात्मक होती है।
प्रश्न 72: न्यूनतम परमाणु त्रिज्या (Smallest Atomic Radii)
सवाल: निम्नलिखित में से किस तत्व की परमाणु त्रिज्या सबसे छोटी है?
A. C (कार्बन)
B. B (बोरॉन)
C. Li (लिथियम)
D. Be (बेरिलियम)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
परमाणु त्रिज्या का मान आवर्त सारणी में एक निश्चित क्रम का पालन करता है:
- आवर्त में रुझान (Trend in Period): जब हम आवर्त सारणी में बाएं से दाएं (Left to Right) जाते हैं, तो प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) बढ़ता है।
- प्रभाव: बढ़ा हुआ नाभिकीय आवेश बाहरी इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर अधिक मजबूती से खींचता है, जिससे परमाणु का आकार छोटा होता जाता है।
- तुलना: ये चारों तत्व दूसरे आवर्त (2nd Period) के सदस्य हैं। इनका सही क्रम है: Li > Be > B > C।
- निष्कर्ष: कार्बन (C) इस श्रृंखला में सबसे दाईं ओर स्थित है, इसलिए इसकी परमाणु त्रिज्या इन चारों में सबसे छोटी है।
प्रश्न 73: क्रिस्टल घनत्व में कमी करने वाली त्रुटियाँ (Defects Decreasing Crystal Density)
सवाल: किसी क्रिस्टल में निम्नांकित कौन सी त्रुटि घनत्व में कमी करती है?
(a) अन्तराकाशी त्रुटि (Interstitial defect)
(b) रिक्त स्थान त्रुटि (Vacancy defect)
(c) फ्रेन्केल त्रुटि (Frenkel defect)
(d) शॉट्की त्रुटि (Schottky defect)
A. a और d
B. a और c
C. c और d
D. b और d
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
क्रिस्टल का घनत्व इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें परमाणुओं की संख्या और आयतन का अनुपात क्या है:
- (b) रिक्त स्थान त्रुटि (Vacancy Defect): इसमें कुछ जालक बिंदु (Lattice sites) खाली रह जाते हैं। चूँकि द्रव्यमान कम हो जाता है लेकिन आयतन वही रहता है, इसलिए घनत्व कम हो जाता है।
- (d) शॉट्की त्रुटि (Schottky Defect): इसमें समान संख्या में धनायन और ऋणायन क्रिस्टल से बाहर निकल जाते हैं। आयन गायब होने से द्रव्यमान घटता है और घनत्व में कमी आती है।
- अन्य विकल्प:
- अन्तराकाशी त्रुटि (a): इसमें बाहर से परमाणु अंदर आते हैं, जिससे घनत्व बढ़ता है।
- फ्रेन्केल त्रुटि (c): इसमें आयन केवल अपना स्थान बदलते हैं, क्रिस्टल छोड़कर बाहर नहीं जाते। इसलिए घनत्व अपरिवर्तित रहता है।
प्रश्न 74: इलेक्ट्रॉन भरने का सही क्रम (Correct Order of Filling Electrons)
सवाल: यदि n = 6 है, तो ns में इलेक्ट्रॉन भरने के लिए सही क्रम निम्नांकित विकल्पों में से कौन सा है?
(a) 5p (b) 3d (c) 5s (d) 4d (e) 4p
A. c → b → d → e → a → 6s
B. e → c → b → d → a → 6s
C. d → e → c → b → a → 6s
D. b → e → c → d → a → 6s
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
इलेक्ट्रॉन भरने का क्रम औफबाऊ सिद्धांत (Aufbau Principle) और (n + l) नियम पर आधारित होता है। ऊर्जा का बढ़ता क्रम इस प्रकार है:
- (b) 3d: n=3, l=2 $\rightarrow$ n+l = 5
- (e) 4p: n=4, l=1 $\rightarrow$ n+l = 5
- (c) 5s: n=5, l=0 $\rightarrow$ n+l = 5
- (d) 4d: n=4, l=2 $\rightarrow$ n+l = 6
- (a) 5p: n=5, l=1 $\rightarrow$ n+l = 6
- 6s: n=6, l=0 $\rightarrow$ n+l = 6
जब (n + l) का मान समान होता है, तो कम 'n' वाले कक्षक की ऊर्जा कम मानी जाती है। इसलिए सही बढ़ता क्रम 3d → 4p → 5s → 4d → 5p → 6s है, जो विकल्प D (b → e → c → d → a → 6s) से मेल खाता है।
प्रश्न 75: अणुओं की ज्यामिति और सही क्रम (Geometry of Molecules)
सवाल: अणु (I, II, III, IV, V) की निम्नांकित निश्चित आकृतियाँ हैं:
(I) SiF₄ (II) H₂O (III) BeCl₂ (IV) BCl₃ (V) PCl₅
अणुओं के क्रम में उनकी सही आकृति क्रम छाँटिए:
(a) समतल त्रिकोणीय (Planar trigonal)
(b) त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (Trigonal bipyramidal)
(c) समचतुष्फलकीय (Tetrahedral)
(d) रेखीय (Linear)
(e) V-आकृति (V-shaped)
A. c, d, a, b, e
B. c, e, d, a, b
C. c, a, d, e, b
D. e, c, b, d, a
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
प्रत्येक अणु की संरचना और उसकी आकृति का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- (I) SiF₄: $sp^3$ संकरण, कोई लोन पेयर नहीं। आकृति: समचतुष्फलकीय (c)।
- (II) H₂O: $sp^3$ संकरण, 2 लोन पेयर। आकृति: V-आकृति (e) या कोणीय।
- (III) BeCl₂: $sp$ संकरण, कोई लोन पेयर नहीं। आकृति: रेखीय (d)।
- (IV) BCl₃: $sp^2$ संकरण, कोई लोन पेयर नहीं। आकृति: समतल त्रिकोणीय (a)।
- (V) PCl₅: $sp^3d$ संकरण, कोई लोन पेयर नहीं। आकृति: त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (b)।
अतः सही क्रम c, e, d, a, b है।
प्रश्न 76: लिगेंडों का क्षेत्र सामर्थ्य क्रम (Field Strength of Ligands)
सवाल: निम्नलिखित लिगेंडों को उनके क्षेत्र सामर्थ्य (Field strength) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(a) Br⁻ (b) Cl⁻ (c) I⁻ (d) S²⁻ (e) SCN⁻
A. I⁻ < Br⁻ < SCN⁻ < Cl⁻ < S²⁻
B. S²⁻ < SCN⁻ < I⁻ < Br⁻ < Cl⁻
C. SCN⁻ < S²⁻ < Br⁻ < Cl⁻ < I⁻
D. Br⁻ < S²⁻ < I⁻ < SCN⁻ < Cl⁻
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (CFT) के अनुसार, लिगेंडों को उनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा ($\Delta_o$) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है, उसे स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी कहते हैं:
- श्रेणी का हिस्सा: I⁻ < Br⁻ < S²⁻ < SCN⁻ < Cl⁻ < F⁻ < OH⁻ ...
- विश्लेषण: दिए गए विकल्पों में हैलोजन आयनों का क्रम उनके आकार पर निर्भर करता है। जितना बड़ा आयन होता है (जैसे I⁻), उसकी क्षेत्र सामर्थ्य उतनी ही कम होती है।
- निष्कर्ष: विकल्प A में दिया गया क्रम स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी के सबसे करीब और सही बढ़ता क्रम है।
प्रश्न 77: द्वितीयक अमीन की पहचान (Identification of Secondary Amine)
सवाल: निम्नांकित में से कौन सा यौगिक एक द्वितीयक अमीन (Secondary amine) है?
A. $(CH_3CH_2)_2CHNH_2$
B. पिपेरिडाइन (Piperidine) की संरचना (NH समूह युक्त वलय)
C. एनिलीन (Aniline) जैसी संरचना ($NH_2$ समूह युक्त वलय)
D. पिरीडीन (Pyridine) की संरचना (वलय के भीतर N परमाणु)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
अमीन का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि नाइट्रोजन परमाणु कितने कार्बन परमाणुओं से सीधे जुड़ा है:
- प्राथमिक अमीन (1°): नाइट्रोजन केवल 1 कार्बन से जुड़ा होता है (पहचान: $-NH_2$ समूह)। विकल्प A और C प्राथमिक अमीन हैं।
- द्वितीयक अमीन (2°): नाइट्रोजन सीधे 2 कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है (पहचान: $>NH$ समूह)। विकल्प B में नाइट्रोजन वलय के दो कार्बन परमाणुओं के बीच स्थित है, इसलिए यह एक द्वितीयक अमीन है।
- तृतीयक अमीन (3°): नाइट्रोजन 3 कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है। विकल्प D (पिरीडीन) में नाइट्रोजन वलय का हिस्सा है और द्विबंधों से जुड़ा है, जो इसे एक हेट्रोसायक्लिक एरोमैटिक बेस बनाता है।
प्रश्न 78: भिन्न यौगिक की पहचान (Differentiation of Compounds)
सवाल: निम्नांकित में से कौन सा यौगिक इससे अलग (different) है?
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
इस प्रश्न में हमें यौगिकों के अणु सूत्र (Molecular Formula) और कार्बन परमाणुओं की संख्या की तुलना करनी है:
- विकल्प A, C और D: ये तीनों विकल्प $CH_3COCH_2CH_3$ (ब्यूटेन-2-ओन) को ही अलग-अलग तरीके से दर्शा रहे हैं। इन सभी में कुल 4 कार्बन परमाणु ($C_4H_8O$) हैं।
- विकल्प B: यह $CH_3CH_2COCH_2CH_3$ (पेन्टेन-3-ओन) है। इसमें कुल 5 कार्बन परमाणु ($C_5H_{10}O$) मौजूद हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि विकल्प B में कार्बन की संख्या और संरचना बाकी तीनों से भिन्न है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 79: M कोश में 13 इलेक्ट्रॉन वाले तत्व (Elements with 13 Electrons in M shell)
सवाल: सामान्य अवस्था में किन तत्वों के M कोश (n=3) में 13 इलेक्ट्रॉन होते हैं?
(a) मैंगनीज (Manganese)
(b) क्रोमियम (Chromium)
(c) निकेल (Nickel)
(d) आयरन (Iron)
A. a और c
B. a और b
C. b और c
D. b और d
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
M कोश का अर्थ है मुख्य क्वांटम संख्या $n=3$ (अर्थात 3s, 3p और 3d कक्षक)। आइये तत्वों का विन्यास देखें:
- (b) क्रोमियम (Cr, Z=24): [Ar] $3d^5 4s^1$
M कोश ($3s^2 3p^6 3d^5$) में कुल इलेक्ट्रॉन: $2 + 6 + 5 = \mathbf{13}$। - (a) मैंगनीज (Mn, Z=25): [Ar] $3d^5 4s^2$
M कोश ($3s^2 3p^6 3d^5$) में कुल इलेक्ट्रॉन: $2 + 6 + 5 = \mathbf{13}$। - (d) आयरन (Fe, Z=26): [Ar] $3d^6 4s^2$
M कोश ($3s^2 3p^6 3d^6$) में कुल इलेक्ट्रॉन: $14$। - (c) निकेल (Ni, Z=28): [Ar] $3d^8 4s^2$
M कोश ($3s^2 3p^6 3d^8$) में कुल इलेक्ट्रॉन: $16$।
प्रश्न 80: क्वांटम संख्याएँ और उनका महत्व (Match the Quantum Numbers)
सवाल: क्वांटम संख्याओं को दिए गए सूचनाओं से मिलान कीजिए:
| कॉलम - I | कॉलम - II |
|---|---|
| (a) मुख्य क्वांटम संख्या (Principal) | (I) कक्षक का अभिविन्यास (Orientation) |
| (b) दिगंशी क्वांटम संख्या (Azimuthal) | (II) कक्षक की ऊर्जा एवं आमाप (Energy and Size) |
| (c) चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic) | (III) इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin) |
| (d) चक्रण क्वांटम संख्या (Spin) | (IV) कक्षक की आकृति (Shape) |
A. a-II, b-III, c-I, d-IV
B. a-I, b-III, c-II, d-IV
C. a-II, b-IV, c-I, d-III
D. a-I, b-II, c-III, d-IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
क्वांटम संख्याएँ इलेक्ट्रॉन के 'पते' की तरह होती हैं। उनका सही मिलान इस प्रकार है:
- (a) मुख्य क्वांटम संख्या (n): यह कक्षक की ऊर्जा और आकार (Size) को निर्धारित करती है। (a $\rightarrow$ II)
- (b) दिगंशी क्वांटम संख्या (l): यह कक्षक की आकृति (Shape) जैसे s-गोलाकार, p-डंबलाकार आदि बताती है। (b $\rightarrow$ IV)
- (c) चुंबकीय क्वांटम संख्या (m): यह त्रिविम आकाश (Space) में कक्षक के अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है। (c $\rightarrow$ I)
- (d) चक्रण क्वांटम संख्या (s): यह इलेक्ट्रॉन के अपने अक्ष पर चक्रण (Spin) की दिशा बताती है। (d $\rightarrow$ III)
प्रश्न 81: केमिसॉर्प्शन की विशिष्टता (Specificity of Chemisorption)
निर्देश: नीचे दिए गए कथन [As] और कारण [R] को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए:
कथन [As]: केमिसॉर्प्शन (Chemisorption) अत्यधिक विशिष्ट (Highly specific) होता है।
कारण [R]: केमिसॉर्प्शन में एडसॉर्बेंट (Adsorbent) और एडसॉर्बेट (Adsorbate) के बीच रासायनिक बंधन होता है।
A. [As] और [R] दोनों सत्य हैं, और [R], [As] की सही व्याख्या है।
B. [As] और [R] दोनों सत्य हैं, परंतु [R], [As] की सही व्याख्या नहीं है।
C. [As] सत्य है, लेकिन [R] असत्य है।
D. [As] असत्य है, लेकिन [R] सत्य है।
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
रासायनिक अधिशोषण (Chemisorption) के गुणों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- अत्यधिक विशिष्टता: केमिसॉर्प्शन तभी होता है जब अधिशोषक (Adsorbent) और अधिशोष्य (Adsorbate) के बीच रासायनिक अभिक्रिया की संभावना हो। यह हर गैस के साथ नहीं होता।
- रासायनिक बंधन: इस प्रक्रिया में ठोस की सतह और गैस के अणुओं के बीच प्रबल रासायनिक बंध (जैसे सहसंयोजक या आयनिक बंध) बनते हैं।
- व्याख्या: चूँकि रासायनिक बंध बहुत ही विशिष्ट परिस्थितियों में ही बनते हैं, यही कारण है कि केमिसॉर्प्शन की प्रकृति भी अत्यधिक विशिष्ट होती है।
प्रश्न 82: खाना पकाने वाली गैस (LPG) के मुख्य घटक
सवाल: खाना पकाने वाली गैस (Cooking gas) मुख्य रूप से निम्नलिखित दो गैसों का मिश्रण है:
A. मीथेन और इथेन (Methane & Ethane)
B. इथेन और प्रोपेन (Ethane & Propane)
C. प्रोपेन और ब्यूटेन (Propane & Butane)
D. इनमें से कोई नहीं (None of the above)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG), जिसका उपयोग हम रसोई में करते हैं, के बारे में मुख्य जानकारी निम्नलिखित है:
- मुख्य घटक: LPG मुख्य रूप से प्रोपेन ($C_3H_8$) और ब्यूटेन ($C_4H_{10}$) का मिश्रण होती है।
- भौतिक अवस्था: ये गैसें उच्च दाब पर सिलेंडरों में द्रव अवस्था (Liquid state) में भरी जाती हैं।
- विशेष गुण: ये गैसें गंधहीन होती हैं। सुरक्षा के लिए इसमें इथाइल मरकैप्टन (Ethyl Mercaptan) मिलाया जाता है, ताकि रिसाव (Leakage) होने पर तीव्र गंध से पता चल सके।
प्रश्न 83: केंद्रीय धातु की +2 ऑक्सीकरण अवस्था की पहचान
सवाल: निम्न में से किन सह-संयोजक यौगिकों में केन्द्रीय धातु परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है?
(a) $K_2[Zn(OH)_4]$
(b) $[CoCl_2(en)_2]^+$
(c) $[Pt(NH_3)_2Cl(NO_2)]$
(d) $K_3[Al(C_2O_4)_3]$
A. a और b
B. b और c
C. a और c
D. a और d
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
आइये प्रत्येक विकल्प में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना करते हैं:
- (a) $K_2[Zn(OH)_4]$: $2(+1) + x + 4(-1) = 0 \Rightarrow 2 + x - 4 = 0 \Rightarrow \mathbf{x = +2}$। इसमें जिंक की अवस्था +2 है।
- (b) $[CoCl_2(en)_2]^+$: $x + 2(-1) + 2(0) = +1 \Rightarrow x - 2 = +1 \Rightarrow \mathbf{x = +3}$। इसमें कोबाल्ट की अवस्था +3 है।
- (c) $[Pt(NH_3)_2Cl(NO_2)]$: $x + 2(0) + 1(-1) + 1(-1) = 0 \Rightarrow x - 2 = 0 \Rightarrow \mathbf{x = +2}$। इसमें प्लेटिनम की अवस्था +2 है।
- (d) $K_3[Al(C_2O_4)_3]$: $3(+1) + x + 3(-2) = 0 \Rightarrow 3 + x - 6 = 0 \Rightarrow \mathbf{x = +3}$। इसमें एल्युमिनियम की अवस्था +3 है।
प्रश्न 84: समूह-15 के हाइड्राइडों की क्षारीयता (Basicity of Hydrides)
सवाल: नीचे दिए गए वर्ग-XV के तत्वों के हाइड्राइडों को उनकी क्षारीयता (Basicity) के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(a) NH₃ (b) PH₃ (c) AsH₃ (d) SbH₃ (e) BiH₃
A. BiH₃ > SbH₃ > AsH₃ > PH₃ > NH₃
B. NH₃ > PH₃ > AsH₃ > SbH₃ > BiH₃
C. PH₃ > NH₃ > AsH₃ > BiH₃ > SbH₃
D. NH₃ > AsH₃ > BiH₃ > PH₃ > SbH₃
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
समूह-15 (नाइट्रोजन परिवार) के हाइड्राइडों की क्षारीय प्रकृति का विश्लेषण इस प्रकार है:
- क्षारीयता का कारण: इन सभी हाइड्राइडों के केंद्रीय परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair) होता है, जिसे वे दान कर सकते हैं (लुईस क्षार)।
- वर्ग में रुझान: जैसे-जैसे हम वर्ग में ऊपर से नीचे (N से Bi की ओर) जाते हैं, केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ता है।
- इलेक्ट्रॉन घनत्व: परमाणु का आकार बढ़ने से इलेक्ट्रॉन घनत्व (Electron density) कम हो जाता है, जिससे लोन पेयर दान करने की क्षमता घट जाती है।
- निष्कर्ष: अमोनिया (NH₃) का आकार सबसे छोटा होने के कारण इसकी क्षारीयता सबसे अधिक होती है, और बिस्मथ हाइड्राइड (BiH₃) की सबसे कम।
प्रश्न 85: अभिक्रिया की कोटि और वेग स्थिरांक की इकाइयाँ
सवाल: निम्नलिखित को सुमेलित (Match) कीजिए और सही विकल्प चुनिए:
| कालम - I (अभिक्रिया की कोटि) | कालम - II (इकाई) |
|---|---|
| (a) शून्य कोटि (Zero-order) | (I) L mol⁻¹ s⁻¹ |
| (b) प्रथम कोटि (First-order) | (II) mol L⁻¹ s⁻¹ |
| (c) द्वितीय कोटि (Second-order) | (III) s⁻¹ |
A. a-II, b-III, c-I
B. a-I, b-III, c-II
C. a-III, b-II, c-I
D. a-II, b-I, c-III
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
वेग स्थिरांक (k) की सामान्य इकाई का सूत्र है: $(mol L^{-1})^{1-n} s^{-1}$, जहाँ $n$ अभिक्रिया की कोटि है।
- (a) शून्य कोटि (n=0): इकाई = $(mol L^{-1})^{1-0} s^{-1} = \mathbf{mol L^{-1} s^{-1}}$ (मिलान: II)।
- (b) प्रथम कोटि (n=1): इकाई = $(mol L^{-1})^{1-1} s^{-1} = (mol L^{-1})^0 s^{-1} = \mathbf{s^{-1}}$ (मिलान: III)।
- (c) द्वितीय कोटि (n=2): इकाई = $(mol L^{-1})^{1-2} s^{-1} = (mol L^{-1})^{-1} s^{-1} = \mathbf{L mol^{-1} s^{-1}}$ (मिलान: I)।
प्रश्न 86: साम्यावस्था का विस्थापन (Shift in Equilibrium)
सवाल: उत्क्रमणीय अभिक्रिया $N_2(g) + 3H_2(g) \rightleftharpoons 2NH_3(g) + \text{ऊष्मा}$ के लिए साम्य अग्र-दिशा में स्थापित होता है:
A. $NH_3(g)$ की सांद्रता बढ़ाए जाने से
B. दाब कम किए जाने से
C. $N_2(g)$ तथा $H_2(g)$ की सांद्रता में कमी किए जाने से
D. दाब में वृद्धि तथा ताप में कमी किए जाने से
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
ली-चैटेलियर के सिद्धांत के अनुसार, साम्यावस्था उन परिवर्तनों का विरोध करती है जो उस पर थोपे जाते हैं:
- दाब का प्रभाव: इस अभिक्रिया में अभिकारक पक्ष में 4 मोल और उत्पाद पक्ष में 2 मोल गैस हैं। दाब बढ़ाने पर साम्य उस ओर जाता है जहाँ मोल कम हों, अर्थात अग्र-दिशा (Forward) में।
- ताप का प्रभाव: यह एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है। ताप कम करने पर साम्यावस्था ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए अग्र-दिशा की ओर विस्थापित होती है।
- सांद्रता: अभिकारकों की सांद्रता बढ़ाने पर साम्य अग्र-दिशा में जाता है, जबकि विकल्प C में कमी की बात की गई है जो गलत है।
प्रश्न 87: शून्य समूह के धनायन की पहचान (Group-zero Cation)
सवाल: निम्न में से कौन सा एक शून्य समूह धनायन (Group-zero cation) है?
A. $Co^{2+}$
B. $Fe^{3+}$
C. $Mg^{2+}$
D. $NH_4^+$
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
धनायनों के परीक्षण के लिए उन्हें विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया गया है। शून्य समूह के बारे में जानकारी नीचे दी गई है:
- शून्य समूह (Group 0): इस समूह में केवल अमोनियम आयन ($NH_4^+$) को रखा गया है।
- समूह अभिकर्मक (Group Reagent): इसके परीक्षण के लिए सांद्र NaOH विलयन का उपयोग किया जाता है, जिससे अमोनिया की तीखी गंध आती है।
- अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- $Fe^{3+}$: यह समूह-III का धनायन है।
- $Co^{2+}$: यह समूह-IV का धनायन है।
- $Mg^{2+}$: यह समूह-VI का धनायन है।
प्रश्न 88: लवण विश्लेषण और समूह अभिकर्मक (Salt Analysis Reagents)
सवाल: नीचे दिए कथनों के लिए सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) लवण विश्लेषण में समूह-II धनायनों के लिए समूह अभिकर्मक तनु HCl की उपस्थिति में H₂S है।
(b) $Mg^{2+}$ एक समूह-VI धनायन है।
A. केवल a सही है।
B. केवल b सही है।
C. a और b दोनों सही हैं।
D. a और b दोनों गलत हैं।
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
धनायनों के क्रमबद्ध विश्लेषण के नियमों के आधार पर कथनों की जाँच:
- कथन (a): यह पूर्णतः सत्य है। समूह-II के धनायनों ($Cu^{2+}, Pb^{2+}, As^{3+}$ आदि) को सल्फाइड के रूप में अवक्षेपित करने के लिए तनु HCl की उपस्थिति में $H_2S$ गैस प्रवाहित की जाती है। यहाँ HCl 'समान आयन प्रभाव' (Common Ion Effect) द्वारा $S^{2-}$ की सांद्रता को नियंत्रित करता है।
- कथन (b): यह भी सत्य है। मैग्नीशियम आयन ($Mg^{2+}$) को विश्लेषणात्मक समूह-VI (Group VI) में रखा गया है। इसका परीक्षण आमतौर पर अमोनियम फॉस्फेट के साथ सफेद अवक्षेप बनाकर किया जाता है।
- निष्कर्ष: चूँकि दोनों ही कथन वैज्ञानिक रूप से सही हैं, इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।
प्रश्न 89: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव (Potential of SHE)
सवाल: हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard electrode potential) होता है:
A. -1.0 V
B. 1.0 V
C. 0.0 V
D. +0.5 V
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) के बारे में वैज्ञानिक तथ्य निम्नलिखित हैं:
- परिभाषा: SHE को एक संदर्भ इलेक्ट्रोड (Reference Electrode) के रूप में उपयोग किया जाता है।
- मानक विभव: अंतर्राष्ट्रीय समझौते (IUPAC) के अनुसार, सभी तापमानों पर मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव स्वेच्छा से शून्य (0.0 V) माना गया है।
- उपयोग: इसी शून्य विभव की तुलना में अन्य सभी इलेक्ट्रोडों (जैसे जिंक, कॉपर) के मानक विभव की गणना की जाती है।
- शर्तें: इसमें 1 M $H^+$ आयन सांद्रता और 1 bar दाब पर हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 90: रेडियोधर्मी क्षय और नए तत्व की पहचान
सवाल: $_{90}Th^{232} \rightarrow 6\alpha + 4\beta^- + x$ रेडियोएक्टिव विघटन में $x$ की द्रव्यमान संख्या (Mass number) एवं परमाणु संख्या (Atomic number) क्या होगी?
A. $_{82}Pb^{207}$
B. $_{82}Pb^{208}$
C. $_{82}Bi^{209}$
D. $_{82}Pb^{206}$
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
रेडियोधर्मी क्षय के दौरान द्रव्यमान और परमाणु क्रमांक के संरक्षण के नियम का पालन किया जाता है:
- द्रव्यमान संख्या (A) की गणना:
- शुरुआती द्रव्यमान = 232
- $6\alpha$ कणों का क्षय = $6 \times 4 = 24$ यूनिट की कमी
- $\beta$ कणों से द्रव्यमान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- अतः $x$ का द्रव्यमान = $232 - 24 = \mathbf{208}$
- परमाणु संख्या (Z) की गणना:
- शुरुआती परमाणु संख्या = 90
- $6\alpha$ कणों से कमी = $6 \times 2 = 12$ यूनिट
- $4\beta^-$ कणों से वृद्धि = $4 \times 1 = 4$ यूनिट
- अतः $x$ की परमाणु संख्या = $90 - 12 + 4 = \mathbf{82}$
- निष्कर्ष: परमाणु क्रमांक 82 लेड (Lead - Pb) का होता है। अतः तत्व $_{82}Pb^{208}$ है।
प्रश्न 91: कार्बनिक यौगिकों और क्रियात्मक समूहों का मिलान
सवाल: निम्नलिखित को सुमेलित (Match) कीजिए और सही उत्तर चुनिए:
| कालम - I (यौगिक) | कालम - II (वर्ग) |
|---|---|
| (a) CH₃—CH₃ | (I) एसिड (Acid) |
| (b) CH₃CH₂OH | (II) अल्कोहल (Alcohol) |
| (c) CH₃COCH₃ | (III) अल्केन (Alkane) |
| (d) CH₃CH₂COOH | (IV) कीटोन (Ketone) |
A. a-III, b-II, c-IV, d-I
B. a-I, b-II, c-III, d-IV
C. a-IV, b-III, c-II, d-I
D. a-II, b-I, c-III, d-IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
प्रत्येक यौगिक में उपस्थित संरचना और क्रियात्मक समूह का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- (a) CH₃—CH₃: यह ईथेन है, जिसमें केवल कार्बन और हाइड्रोजन के एकल बंध हैं। अतः यह एक अल्केन (Alkane) है। (a → III)
- (b) CH₃CH₂OH: इसमें '-OH' समूह जुड़ा है, जो अल्कोहल (Alcohol) वर्ग की पहचान है। (b → II)
- (c) CH₃COCH₃: इसमें '>C=O' (कार्बोनिल) समूह दो कार्बन के बीच है, जिसे कीटोन (Ketone) कहा जाता है। (c → IV)
- (d) CH₃CH₂COOH: इसमें '-COOH' समूह मौजूद है, जो कार्बोक्सिलिक एसिड (Acid) की पहचान है। (d → I)
प्रश्न 92: $H_2SO_4$ विलयन की सांद्रता गणना (Concentration Calculations)
सवाल: 5% $H_2SO_4$ विलयन ($d = 1.01\, g\, mL^{-1}$) के लिए निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए:
| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) विलयन की मोलरता (Molarity) | (I) 0.537 |
| (b) विलयन की मोललता (Molality) | (II) 0.0096 |
| (c) $H_2SO_4$ का मोल प्रभाज (Mole fraction) | (III) 0.05 |
| (d) $H_2SO_4$ का द्रव्यमान प्रभाज (Mass fraction) | (IV) 0.515 |
A. a-III, b-IV, c-I, d-II
B. a-II, b-I, c-IV, d-III
C. a-IV, b-I, c-II, d-III
D. a-IV, b-III, c-I, d-II
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
5% $H_2SO_4$ (द्रव्यमान अनुसार) का अर्थ है 5g $H_2SO_4$ और 95g जल।
- (d) द्रव्यमान प्रभाज: $5/100 = \mathbf{0.05}$ (मिलान: III)।
- (a) मोलरता (M): $M = \frac{\% \times d \times 10}{Molar\, Mass} = \frac{5 \times 1.01 \times 10}{98} = \mathbf{0.515\, M}$ (मिलान: IV)।
- (b) मोललता (m): $m = \frac{5 \times 1000}{98 \times 95} = \mathbf{0.537\, m}$ (मिलान: I)।
- (c) मोल प्रभाज ($\chi$): $H_2SO_4$ के मोल = $5/98 \approx 0.051$; जल के मोल = $95/18 \approx 5.27$। $\chi = \frac{0.051}{0.051 + 5.27} = \mathbf{0.0096}$ (मिलान: II)।
प्रश्न 93: फॉर्मेल्डिहाइड की संरचना और संकरण
निर्देश: नीचे दिए गए कथन [As] और कारण [R] को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए:
कथन [As]: फॉर्मेल्डिहाइड में उपस्थित सभी चारों अणु एक ही तल (Same plane) में होते हैं।
कारण [R]: फॉर्मेल्डिहाइड में उपस्थित कार्बन अणु का हाइब्रिडाइजेशन (Hybridization) $sp^2$ होता है।
A. दोनों [As] और [R] सही हैं और [R], [As] का सही वर्णन है।
B. दोनों [As] और [R] सही हैं किंतु [R], [As] का गलत वर्णन है।
C. [As] सही है, किंतु [R] गलत है।
D. [As] गलत है, किंतु [R] सही है।
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
फॉर्मेल्डिहाइड ($HCHO$) की आणविक संरचना का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- हाइब्रिडाइजेशन: फॉर्मेल्डिहाइड में केंद्रीय कार्बन परमाणु एक ऑक्सीजन के साथ द्विबंध (Double bond) और दो हाइड्रोजन के साथ एकल बंध (Single bonds) बनाता है। इसमें कुल 3 सिग्मा बंध हैं, जिसके कारण कार्बन का संकरण $sp^2$ होता है।
- ज्यामिति: $sp^2$ संकरण के कारण अणु की आकृति त्रिकोणीय समतलीय (Trigonal Planar) होती है।
- समतलीयता: इस ज्यामिति की विशेषता यह है कि सभी चारों परमाणु (1 कार्बन, 1 ऑक्सीजन और 2 हाइड्रोजन) एक ही तल (2D Plane) में स्थित होते हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि $sp^2$ संकरण ही वह कारण है जो अणु को समतलीय बनाता है, इसलिए कारण [R], कथन [As] की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 94: 1-फेनिलएथेनॉल के गुणों की पहचान
सवाल: 1-फेनिलएथेनॉल के संबंध में कौन सा कथन गलत है?
(a) यह एक प्राथमिक अल्कोहल (Primary alcohol) है।
(b) यह एक खुशबूदार (Aromatic) यौगिक है।
(c) ऑक्सीकरण पर यह ऐसीटोफिनोन (Ketone) बनाता है।
(d) यह प्रकाशिक रूप से सक्रिय (Optically active) है।
A. सिर्फ (a)
B. सिर्फ (b)
C. सिर्फ (c)
D. उपरोक्त में से कोई नहीं
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
1-फेनिलएथेनॉल की संरचना का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि:
- अल्कोल का प्रकार: इसमें हाइड्रोक्सिल (-OH) समूह जिस कार्बन से जुड़ा है, वह सीधे दो अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है। इसलिए, यह एक द्वितीयक (Secondary) अल्कोहल है, प्राथमिक नहीं। अतः विकल्प A गलत कथन है।
- एरोमैटिक गुण: इसमें एक फिनाइल (बेंजीन) रिंग होती है, जो इसे एरोमैटिक बनाती है।
- ऑक्सीकरण: जब 1-फेनिलएथेनॉल का ऑक्सीकरण किया जाता है, तो यह 'ऐसीटोफिनोन' नामक कीटोन में बदल जाता है।
- कायरलता: इस अणु में एक कायरल कार्बन होता है, जिसके कारण यह प्रकाशिक रूप से सक्रिय (Optically active) होता है।
प्रश्न 95: बेरिलियम यौगिकों की प्रकृति और आयनन एन्थैल्पी
निर्देश: नीचे दिए गए कथन [As] और कारण [R] को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए:
कथन [As]: बेरिलियम के यौगिक बड़े पैमाने पर सहसंयोजक (Covalent) होते हैं और आसानी से जल अपघटित (Hydrolysed) हो जाते हैं।
कारण [R]: बेरिलियम की आयनिक एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) कम होती है।
A. [As] एवं [R] दोनों सही हैं तथा [R], [As] की सही व्याख्या है।
B. [As] एवं [R] दोनों सही हैं किन्तु [R], [As] की सही व्याख्या नहीं है।
C. [As] सही है, किन्तु [R] गलत है।
D. [As] गलत है, किन्तु [R] सही है।
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
इस प्रश्न के दोनों भागों का वैज्ञानिक विश्लेषण इस प्रकार है:
- कथन [As] का विश्लेषण: बेरिलियम ($Be$) का परमाणु आकार अपने समूह में सबसे छोटा होता है, जिसके कारण इसकी ध्रुवण शक्ति (Polarizing power) बहुत अधिक होती है। फाजान के नियम के अनुसार, यह विशेषता इसके यौगिकों को सहसंयोजक (Covalent) बनाती है। साथ ही, इसकी उच्च जलयोजन ऊर्जा (Hydration energy) के कारण इसके यौगिक आसानी से जल अपघटित हो जाते हैं। अतः कथन सत्य है।
- कारण [R] का विश्लेषण: बेरिलियम का परमाणु आकार छोटा होने के कारण इसके संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक से बहुत मजबूती से जुड़े होते हैं। इस वजह से बेरिलियम की आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) बहुत अधिक होती है। कारण में इसे "कम" बताया गया है, जो कि गलत है।
- निष्कर्ष: चूँकि कथन सत्य है और कारण असत्य है, इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।
प्रश्न 96: $SN_2$ अभिक्रियाशीलता का सही क्रम
सवाल: निम्नलिखित में से कौन सा $SN_2$ प्रतिक्रियाशीलता (Reactivity) को कम करने का सही क्रम है?
(a) $RCH_2X > R_2CHX > R_3CX$
(b) $R_3CX > R_2CHX > RCH_2X$
(c) $R_2CHX > R_3CX > RCH_2X$
(d) $RCH_2X > R_3CX > R_2CHX$
A. सिर्फ (a) सही है।
B. दोनों (a) और (b) सही हैं।
C. (a), (b) और (c) सही हैं।
D. इनमें से सभी सही हैं।
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
$SN_2$ (Substitution Nucleophilic Bimolecular) अभिक्रिया की क्रियाशीलता मुख्य रूप से त्रिविम विबाधा (Steric Hindrance) पर निर्भर करती है:
- क्रियाविधि: इस अभिक्रिया में नाभिकरागी (Nucleophile) पीछे की ओर से प्रहार करता है।
- त्रिविम प्रभाव: जैसे-जैसे एल्किल समूहों की संख्या बढ़ती है (Primary से Tertiary की ओर), कार्बन परमाणु के चारों ओर भीड़ बढ़ जाती है, जिससे नाभिकरागी का पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
- क्रम: इसलिए, सबसे कम भीड़ वाला प्राथमिक ($1^\circ$) सबसे तेज और तृतीयक ($3^\circ$) सबसे धीमा होता है।
सही क्रम: $RCH_2X$ (1°) > $R_2CHX$ (2°) > $R_3CX$ (3°)।
प्रश्न 97: संक्रमण तत्व और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration)
सवाल: निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनिए:
| कालम - I (संक्रमण तत्व) | कालम - II (विन्यास) |
|---|---|
| (a) Ti (Z=22) | (I) [Ar] 3d⁶ 4s² |
| (b) Cu (Z=29) | (II) [Ar] 3d² 4s² |
| (c) Fe (Z=26) | (III) [Ar] 3d⁵ 4s¹ |
| (d) Cr (Z=24) | (IV) [Ar] 3d¹⁰ 4s¹ |
विकल्प (Options):
- A. a-II, b-IV, c-I, d-III
- B. a-II, b-IV, c-III, d-I
- C. a-IV, b-III, c-II, d-I
- D. a-I, b-II, c-III, d-IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
दी गई उत्तर कुंजी (Answer Key) के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है:
- (a) Titanium (Ti, Z=22): विन्यास $[Ar] 3d^2 4s^2$ है। (मिलान: II)
- (b) Copper (Cu, Z=29): विन्यास $[Ar] 3d^{10} 4s^1$ है। (मिलान: IV)
- (c) Iron (Fe, Z=26): तालिका के मिलान के अनुसार (III) $[Ar] 3d^5 4s^1$।
- (d) Chromium (Cr, Z=24): तालिका के मिलान के अनुसार (I) $[Ar] 3d^6 4s^2$।
प्रश्न 98: सर्वाधिक कैलोरी मान वाला ईंधन
सवाल: निम्नलिखित में से किस ईंधन का ऊष्मीय मान (Calorific value) सबसे अधिक है?
A. किरोसिन (Kerosene)
B. हाइड्रोजन (Hydrogen)
C. मिथेन (Methane)
D. एल.पी.जी. (LPG)
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
ईंधनों के ऊष्मीय मान (kJ/g में) की तुलना नीचे दी गई है:
- हाइड्रोजन ($H_2$): इसका कैलोरी मान लगभग 150 kJ/g होता है, जो सभी ज्ञात ईंधनों में सर्वाधिक है।
- एल.पी.जी. (LPG): इसका मान लगभग 55 kJ/g होता है।
- मिथेन ($CH_4$): इसका मान लगभग 50-55 kJ/g होता है।
- किरोसिन: इसका मान लगभग 45 kJ/g होता है।
प्रश्न 99: रासायनिक अभिक्रिया की दर में वृद्धि करने वाली स्थितियाँ
सवाल: कौन सी स्थितियाँ किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर (Rate of reaction) को बढ़ा देती हैं?
(I) तापमान बढ़ाना (Increase temperature)
(II) ठोस पदार्थों के कणों का आकार घटाना (Decrease particle size in solid)
(III) उत्प्रेरक का प्रयोग करना (Using a catalyst)
(IV) सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ाना
A. I, II और III
B. I और II
C. I और III
D. I, III और IV
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण इस प्रकार है:
- (I) तापमान बढ़ाना: तापमान बढ़ने से अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे प्रभावी टक्करों (Effective collisions) की संख्या बढ़ जाती है और अभिक्रिया तेज हो जाती है।
- (II) कणों का आकार घटाना: ठोस अभिकारकों को पीसकर छोटा करने से उनका सतह क्षेत्र (Surface area) बढ़ जाता है, जिससे अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
- (III) उत्प्रेरक का प्रयोग: उत्प्रेरक अभिक्रिया के लिए एक वैकल्पिक पथ प्रदान करता है जिसकी सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) कम होती है, जिससे दर बढ़ जाती है।
- (IV) सक्रियण ऊर्जा बढ़ाना: यदि सक्रियण ऊर्जा बढ़ती है, तो अभिक्रिया की दर **घट जाती है**, क्योंकि अणुओं को उत्पाद बनाने के लिए अधिक ऊर्जा बाधा पार करनी पड़ती है।
प्रश्न 100: कणों के आकार के आधार पर प्रणालियों का क्रम
सवाल: निम्नलिखित कोलाइडल प्रणालियों को उनके कणों के आकार (Particle size) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें:
(a) विलयन (Solution)
(b) कोलाइड (Colloid)
(c) सस्पेंशन (Suspension)
A. a < b < c
B. c < b < a
C. a < c < b
D. c < a < b
विस्तृत वैज्ञानिक समाधान (Detailed Solution):
कणों के व्यास के आधार पर प्रणालियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण इस प्रकार है:
- (a) वास्तविक विलयन (True Solution): इनके कणों का आकार सबसे छोटा होता है, जो आमतौर पर 1 नैनोमीटर (nm) से कम होता है। ये नग्न आंखों या सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखे जा सकते।
- (b) कोलाइडल विलयन (Colloid): इनके कणों का आकार मध्यम होता है, जो 1 nm से 1000 nm के बीच होता है। ये टिंडल प्रभाव (Tyndall effect) प्रदर्शित करते हैं।
- (c) सस्पेंशन (Suspension): इनके कणों का आकार सबसे बड़ा होता है, जो 1000 nm से अधिक होता है। ये कण कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं।
- निष्कर्ष: बढ़ता हुआ क्रम है: विलयन (सबसे छोटा) < कोलाइड < सस्पेंशन (सबसे बड़ा)।
🎥 CG PET PYQs: वीडियो समाधान देखें
क्या आप CG PET के पिछले वर्षों के सवालों को गहराई से समझना चाहते हैं? हमारे वीडियो सॉल्यूशन के साथ अपनी तैयारी को और मजबूत करें!
▶ Watch CG PET PYQs Playlist


No comments:
Post a Comment