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| CG PAT 2025 ke Physics section ke prashn 1 se 50 tak ka complete solution, simple aur easy explanation ke saath science group students ke liye |
CG PAT 2025
PHYSICS SOLUTION
Presented by: Way2 Study Smart
Way2 Study Smart
B. अपने प्रारंभिक मान से तीन गुना हो जाता है। (Become thrice its initial value.)
C. अपने प्रारंभिक मान से चार गुना हो जाता है। (Become four times its initial value.)
D. स्थिर रहता है। (Remains constant.)
व्याख्या (Explanation):
गतिज ऊर्जा (K.E.) और संवेग (P) के बीच का संबंध यह है: $P = \sqrt{2mK}$
यहाँ $m$ द्रव्यमान है और $K$ गतिज ऊर्जा है।
यदि गतिज ऊर्जा को 4 गुना ($4K$) कर दिया जाए, तो नया संवेग:
$P_{new} = \sqrt{2m(4K)} = 2 \times \sqrt{2mK} = 2P$
अतः संवेग 2 गुना हो जाएगा।
$\text{Momentum} \propto \sqrt{\text{Kinetic Energy}}$
ऊर्जा 4 गुना हुई, तो संवेग $\sqrt{4} = 2$ गुना होगा।
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(According to Newton's Law of cooling, the rate of cooling of a body is proportional to $(\Delta \theta)^n$, where $\Delta \theta$ is the difference of the temperature of the body and the surroundings and n is equal to-)
B. तीन (Three)
C. चार (Four)
D. एक (One)
व्याख्या (Explanation):
न्यूटन के शीतलन नियम (Newton's Law of Cooling) के अनुसार, किसी वस्तु के ठण्डा होने की दर वस्तु और उसके वातावरण के तापांतर ($\Delta \theta$) के सीधे समानुपाती होती है।
गणितीय रूप में:
$\text{Rate of cooling} \propto (\Delta \theta)^1$
यहाँ घातांक (power) 1 होती है, इसलिए $n = 1$ होगा।
Way2 Study Smart
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(A, B and C are three hollow spherical conductors. They have same positive charge. C is smallest and A is the biggest then-)
B. A का विभव सबसे अधिक होगा (Potential of A will be highest)
C. B का विभव सबसे अधिक होगा (Potential of B will be highest)
D. C का विभव सबसे अधिक होगा (Potential of C will be highest)
व्याख्या (Explanation):
किसी गोलीय चालक का विभव (Potential) का सूत्र है:
$V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r}$
यहाँ $q$ आवेश है और $r$ त्रिज्या है।
चूँकि सभी पर आवेश ($q$) समान है, इसलिए विभव उसकी त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होगा:
$V \propto \frac{1}{r}$
इसका मतलब है कि जिसकी त्रिज्या ($r$) सबसे कम होगी, उसका विभव ($V$) सबसे अधिक होगा। चूँकि C सबसे छोटा है, इसलिए उसका विभव सबसे अधिक होगा।
छोटा गोला = ज्यादा विभव (High Potential)
बड़ा गोला = कम विभव (Low Potential)
चूँकि C सबसे छोटा है, इसलिए C का विभव 'सबसे हाई' होगा।
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(Which of the following is not an example of projectile motion?)
(b) किसी भी दिशा में फेंका गया पत्थर का टुकड़ा (A piece of stone thrown in any direction.)
(c) सीधी रेखा पर चलती कार (A car moving on a straight line.)
(d) सीधे तार पर मनका का फिसलना (Bead sliding on a straight wire.)
B. b और c (b & c)
C. c और d (c & d)
D. d और a (d & a)
व्याख्या (Explanation):
प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion): जब किसी वस्तु को हवा में फेंका जाता है और वह केवल गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक वक्रीय पथ (Curved Path) पर चलती है, तो उसे प्रक्षेप्य गति कहते हैं। यह 2D (द्विविमीय) गति होती है।
* (a) और (b) हवा में वक्र पथ पर चलते हैं, इसलिए ये प्रक्षेप्य गति हैं।
* (c) और (d) एक सीधी रेखा (Straight Line) में गति कर रहे हैं, जो कि 1D (एकविमीय) गति है। इसलिए ये प्रक्षेप्य गति के उदाहरण नहीं हैं।
अगर रास्ता एकदम सीधा (Straight) है, तो वो प्रक्षेप्य गति कभी नहीं हो सकती। (c) और (d) दोनों में "Straight" शब्द आया है, बस वही हमारा आंसर है!
Way2 Study Smart
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(For the below Assertion [As] and Reason [R], choose the correct alternative from the options given below-)
(Assertion [As]: An isolated radioactive atom may not decay at all whatever be its half life.)
कारण [R]: रेडियोधर्मी क्षय एक सांख्यिकीय घटना (statistical phenomenon) है।
(Reason [R]: Radioactive decay is a statistical phenomenon.)
(Both [As] and [R] are true, and [R] is the correct explanation of [As].)
B. दोनों [As] और [R] सत्य हैं, लेकिन [R], [As] का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(Both [As] and [R] are true, but [R] is not the correct explanation of [As].)
C. [As] सही है, परंतु [R] गलत है।
([As] is true, but [R] is false.)
D. [As] गलत है, परंतु [R] सही है।
([As] is false, but [R] is true.)
व्याख्या (Explanation):
रेडियोधर्मी क्षय एक सांख्यिकीय घटना (Statistical Phenomenon) है। इसका मतलब यह है कि हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि एक विशेष परमाणु कब टूटेगा (decay होगा)।
अर्ध-आयु (Half-life) हमें केवल यह बताती है कि परमाणुओं के एक बड़े समूह में से आधे परमाणुओं को क्षय होने में कितना समय लगेगा। यदि केवल एक ही परमाणु है, तो संभव है कि वह तुरंत टूट जाए या शायद वह अनंत काल तक न टूटे। इसलिए कथन और कारण दोनों सही हैं।
Way2 Study Smart
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| Column - I (वस्तु की स्थिति) | Column - II (आवर्धन - Magnification) |
|---|---|
| (a) एक वस्तु उत्तल दर्पण के फोकस पर रखी गई है। (at focus before convex mirror) | (I) आवर्धन है $(-\infty)$ |
| (b) एक वस्तु को अवतल दर्पण के सामने वक्रता केन्द्र पर रखा गया है। (at center of curvature before concave mirror) | (II) आवर्धन (0.5) है। |
| (c) एक वस्तु अवतल दर्पण के सामने फोकस पर रखी गई है। (at focus before concave mirror) | (III) आवर्धन (-1) है। |
| (d) एक वस्तु को उत्तल दर्पण के सामने वक्रता केन्द्र पर रखा गया है। (at center of curvature before convex mirror) | (IV) आवर्धन (0.33) है। |
B. b-I, c-II, d-III, a-IV
C. a-II, b-III, c-I, d-IV
D. d-I, a-II, b-III, c-IV
व्याख्या (Explanation):
- (a) → (II): उत्तल दर्पण में फोकस पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब ध्रुव और फोकस के बीच बनता है, जो सीधा और छोटा होता है (आवर्धन 0.5)।
- (b) → (III): अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र (C) पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब C पर ही बनता है, जो उल्टा और बराबर होता है (आवर्धन -1)।
- (c) → (I): अवतल दर्पण के फोकस पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब अनंत पर बनता है, जो बहुत बड़ा और उल्टा होता है (आवर्धन $-\infty$)।
- (d) → (IV): उत्तल दर्पण में वक्रता केंद्र पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब और भी छोटा बनता है (आवर्धन 0.33)।
1. अवतल दर्पण + फोकस = अनंत (Infinity).
2. अवतल दर्पण + वक्रता केंद्र = बराबर (-1).
3. उत्तल दर्पण = हमेशा छोटा और सीधा (+ में 1 से कम).
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(A proton moving with a constant velocity passes through a region of space without any change in its velocity. If $\vec{E}$ and $\vec{B}$ represent the electric and magnetic fields respectively, then the region of space may have-)
(b) $E = 0, B \neq 0$
(c) $E \neq 0, B = 0$
(d) $E \neq 0, B \neq 0$
B. केवल a, b और c (a, b and c only)
C. केवल a, b और d (a, b and d only)
D. केवल a, c and d (a, c and d only)
व्याख्या (Explanation):
वेग में परिवर्तन न होने का मतलब है कि प्रोटॉन पर लगने वाला कुल बल (Net Force) शून्य है।
* स्थिति (a): यदि दोनों क्षेत्र शून्य हैं, तो कोई बल नहीं लगेगा। (सही है)
* स्थिति (b): यदि केवल चुंबकीय क्षेत्र है, और प्रोटॉन उसके समांतर (parallel) चल रहा है, तो भी बल शून्य होगा। (सही है)
* स्थिति (c): यदि केवल विद्युत क्षेत्र ($E \neq 0$) है, तो वह हमेशा बल लगाएगा और वेग बदल जाएगा। (यह गलत है)
* स्थिति (d): यदि दोनों मौजूद हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को खत्म (cancel) कर सकते हैं (Velocity Selector concept)। (सही है)
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(Nucleus of an atom whose atomic number is 11 and atomic mass is 24 consists of-)
B. 11 इलेक्ट्रॉन, 13 प्रोटॉन और 11 न्यूट्रॉन (11 electrons, 13 protons and 11 neutrons)
C. 11 प्रोटॉन और 13 न्यूट्रॉन (11 protons and 13 neutrons)
D. 11 प्रोटॉन और 13 इलेक्ट्रॉन (11 protons and 13 electrons)
व्याख्या (Explanation):
1. परमाणु क्रमांक (Z) = 11, यानी प्रोटॉन की संख्या = 11
2. परमाणु भार (A) = 24
3. न्यूट्रॉन की संख्या (n) = A - Z = 24 - 11 = 13
सबसे महत्वपूर्ण बात: सवाल में 'परमाणु' नहीं, बल्कि 'नाभिक (Nucleus)' के बारे में पूछा गया है। नाभिक के अंदर केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, इलेक्ट्रॉन तो बाहर चक्कर लगाते हैं। इसलिए नाभिक में सिर्फ 11 प्रोटॉन और 13 न्यूट्रॉन होंगे।
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(In a transformer, the number of primary coil turns is four times that of the secondary coil turns. Its primary coil is connected to an AC source of voltage 'V'. Then-)
B. द्वितीयक कुण्डली के दोनों ओर वोल्टेज, प्राथमिक कुण्डली के वोल्टेज के चार गुना होगी। (Voltage across its secondary coil is about four times that of the voltage across its primary coil.)
C. द्वितीयक कुण्डली के दोनों ओर वोल्टेज, प्राथमिक कुण्डली के वोल्टेज के दुगुनी होगी। (Voltage across its secondary is about two times that of the voltage across its primary coil.)
D. द्वितीयक कुण्डली के दोनों ओर वोल्टेज, प्राथमिक कुण्डली के वोल्टेज के $\frac{1}{2\sqrt{2}}$ गुना होगी। (Voltage across its secondary coil is about $\frac{1}{2\sqrt{2}}$ times that of the voltage across its primary coil.)
व्याख्या (Explanation):
ट्रांसफार्मर के लिए सूत्र: $\frac{V_s}{V_p} = \frac{N_s}{N_p} = \frac{I_p}{I_s}$
दिया है: $N_p = 4 \times N_s$ या $\frac{N_s}{N_p} = \frac{1}{4}$
1. वोल्टेज के लिए: $\frac{V_s}{V_p} = \frac{1}{4} \Rightarrow V_s = \frac{V_p}{4}$ (वोल्टेज 4 गुना कम हो जाएगा)।
2. धारा (Current) के लिए: $\frac{I_p}{I_s} = \frac{1}{4} \Rightarrow I_s = 4 \times I_p$ (धारा 4 गुना बढ़ जाएगी)।
चूँकि वोल्टेज कम हो रहा है और धारा बढ़ रही है, यह एक Step-down Transformer है। विकल्प A बिल्कुल सही है।
फेरे 4 गुना कम हुए ($N_p$ से $N_s$ जाने में), तो करंट 4 गुना बढ़ जाएगा!
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(If there is no external force acting on a non-rigid body, which of the following quantities must remain constant?)
(b) जड़त्व आघूर्ण (Moment of inertia)
(c) कोणीय संवेग (Angular momentum)
(d) गतिज ऊर्जा (Kinetic energy)
B. b और c (b & c)
C. c और d (c & d)
D. a और c (a & c)
व्याख्या (Explanation):
1. रेखीय संवेग (a): न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, यदि बाह्य बल शून्य है ($F_{ext} = 0$), तो रेखीय संवेग ($P$) हमेशा संरक्षित रहता है।
2. कोणीय संवेग (c): यदि बाह्य बल शून्य है, तो बाह्य टॉर्क (Torque) भी शून्य होगा, जिससे कोणीय संवेग ($L$) संरक्षित रहता है।
नोट: चूँकि वस्तु "गैर-दृढ़" (Non-rigid) है, इसलिए उसका आकार बदल सकता है। आकार बदलने से 'जड़त्व आघूर्ण' (b) और 'गतिज ऊर्जा' (d) बदल सकते हैं, लेकिन संवेग (P और L) स्थिर रहेंगे।
चाहे रेखीय (Linear) हो या कोणीय (Angular), अगर बाहर से कोई धक्का नहीं लग रहा, तो संवेग अपनी जगह से नहीं हिलेगा!
Way2 Study Smart
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(Two long straight wires P and Q carrying equal current 10A each were kept parallel to each other at 5 cm distance. Magnitude of magnetic force experienced by 10 cm length of wire P is $F_1$. If distance between wires is halved and currents on them are doubled, force $F_2$ on 10 cm length of wire P will be-)
B. $8F_1$
C. $\frac{F_1}{8}$
D. $\frac{F_1}{10}$
व्याख्या (Explanation):
दो समांतर तारों के बीच बल का सूत्र है: $F = \frac{\mu_0 \cdot I_1 \cdot I_2 \cdot l}{2\pi \cdot r}$
यहाँ $I_1, I_2$ धारा है और $r$ दूरी है।
सम्बन्ध: $F \propto \frac{I_1 \times I_2}{r}$
नई स्थिति में:
- धारा ($I_1$ और $I_2$) दोनों दोगुनी ($2 \times 2 = 4$ गुना) हो गई।
- दूरी ($r$) आधी ($1/2$) हो गई।
नया बल $F_2 = \frac{4}{1/2} \times F_1 = 8F_1$
अतः बल 8 गुना हो जाएगा।
धारा $\times$ धारा $/$ दूरी = नया बल
$2 \times 2 / (0.5) = 4 / 0.5 = 8$ गुना!
बस ऊपर की गुणा करो और नीचे वाले से भाग दे दो।
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| Column - I | Column - II |
|---|---|
| (a) बिंदु P दो समांतर तारों के बीच में (विपरीत दिशा में धारा) | (I) चुंबकीय क्षेत्र (B) एक ही दिशा में होगा। |
| (b) बिंदु P दो वृत्ताकार तारों के बीच में (समान दिशा) | (II) चुंबकीय क्षेत्र (B) विपरीत दिशा में होगा। |
| (c) बिंदु P दो कुण्डलियों के बीच में (विपरीत दिशा) | (III) बिंदु P पर कोई चुंबकीय क्षेत्र नहीं होगा (B=0)। |
| (d) बिंदु P दो तारों के समकेन्द्र में (समान दिशा) | (IV) बिंदु P पर गैर-शून्य चुंबकीय क्षेत्र होगा (B≠0)। |
B. a→IV ; b→I ; c→III ; d→II
C. a→II, III ; b→I, IV ; c→II, III ; d→II, IV
D. a→I, IV ; b→II ; c→IV ; d→III
(नोट: इमेज के अनुसार सबसे सटीक मिलान यही है)
व्याख्या (Explanation):
- (a): जब दो समांतर तारों में धारा विपरीत दिशा में होती है, तो बीच के बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र विपरीत दिशा में होकर एक-दूसरे को काट देते हैं (यदि दूरियां समान हों), जिससे कुल क्षेत्र शून्य (B=0) हो सकता है।
- (b): वृत्ताकार तारों के केंद्र के बीच में चुंबकीय क्षेत्र एक ही दिशा में जुड़ जाते हैं।
- (d): समकेन्द्रिक (Concentric) लूप में यदि धारा समान दिशा में है, तो केंद्र पर क्षेत्र जुड़कर गैर-शून्य (Non-zero) हो जाता है।
दाएं हाथ का अंगूठा धारा की दिशा में रखें, उंगलियां जहाँ मुड़ेंगी वही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा होगी।
- विपरीत धारा = क्षेत्र कटेंगे (Zero हो सकता है)।
- समान धारा = क्षेत्र जुड़ेंगे (Double हो सकता है)।
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(The ratio of intensities of two waves are given by 4:1. The ratio of the amplitudes of the two waves is-)
B. 1:2
C. 4:1
D. 1:4
व्याख्या (Explanation):
तरंग की तीव्रता ($I$) उसके आयाम ($A$) के वर्ग के समानुपाती होती है।
सम्बन्ध: $I \propto A^2$
अतः आयामों का अनुपात तीव्रता के अनुपात के वर्गमूल (Square Root) के बराबर होगा:
$\frac{A_1}{A_2} = \sqrt{\frac{I_1}{I_2}}$
दिया है: $\frac{I_1}{I_2} = \frac{4}{1}$
अतः, $\frac{A_1}{A_2} = \sqrt{\frac{4}{1}} = \frac{2}{1}$
यानी आयामों का अनुपात 2:1 होगा।
अगर सवाल में 'तीव्रता' दी है और 'आयाम' पूछा है, तो बस संख्याओं का वर्गमूल ($\sqrt{x}$) निकाल दो।
$\sqrt{4} = 2$ और $\sqrt{1} = 1$
सीधा जवाब: 2:1
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(If the source of light used in a Young’s double slit experiment is changed from red to blue, then-)
(b) क्रमागत फ्रिंज पास आ जाएंगे। (Consecutive fringes will come closer.)
(c) स्क्रीन पर बनने वाले उच्चिष्ठों (maxima) की संख्या बढ़ जाती है। (The number of maxima formed on the screen increases.)
(d) केंद्रीय दीप्त फ्रिंज अदीप्त फ्रिंज बन जाता है। (The central bright fringe will become a dark fringe.)
B. केवल b और c (b and c only)
C. a, b और c (a, b and c)
D. c, d और b (c, d and b)
व्याख्या (Explanation):
1. फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$) का सूत्र: $\beta = \frac{\lambda D}{d}$
जहाँ $\lambda$ तरंगदैर्ध्य (Wavelength) है।
2. लाल से नीला: हम जानते हैं कि नीले प्रकाश का तरंगदैर्ध्य ($\lambda_{blue}$) लाल प्रकाश ($\lambda_{red}$) से कम होता है।
चूँकि $\beta \propto \lambda$, इसलिए तरंगदैर्ध्य कम होने से फ्रिंज चौड़ाई कम हो जाएगी, यानी फ्रिंज पास-पास आ जाएंगे। (b सही है)
3. चूँकि फ्रिंज पतले हो गए हैं, इसलिए स्क्रीन की उतनी ही जगह पर अब ज़्यादा फ्रिंज बन पाएंगे। (c सही है)
$\lambda$ कम = $\beta$ कम।
तरंगदैर्ध्य कम हुआ तो चौड़ाई भी कम होगी। जब चीजें पतली हो जाती हैं, तो वे एक-दूसरे के नज़दीक आ जाती हैं और उनकी संख्या बढ़ जाती है।
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(When the north pole of a magnet is placed in north direction and south pole in the south direction, the neutral points are located on-)
B. चुम्बक के केन्द्र पर (Centre of magnet)
C. चुम्बकीय अक्ष के लम्बार्द्धक पर (Perpendicular Bisector of magnetic axis)
D. उत्तर और दक्षिण ध्रुव पर (North and South poles)
व्याख्या (Explanation):
उदासीन बिंदु (Neutral Point): वह बिंदु जहाँ चुम्बक का चुंबकीय क्षेत्र और पृथ्वी का क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं, जिससे कुल चुंबकीय क्षेत्र शून्य हो जाता है।
* जब चुम्बक का North Pole उत्तर की ओर होता है, तो उदासीन बिंदु चुम्बक की निरक्षीय रेखा (Equatorial Line) या लम्बार्द्धक पर मिलते हैं।
* इसके विपरीत, यदि North Pole दक्षिण की ओर हो, तो उदासीन बिंदु अक्षीय रेखा (Axial Line) पर मिलते हैं।
N-N (North pole in North) = Niraksh (निरक्ष) यानी लम्बार्द्धक।
N-S (North pole in South) = Aksha (अक्ष) यानी अक्षीय रेखा।
बस 'N-N' से 'निरक्ष' याद रखें!
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(A disc is rolling on the inclined plane. What is the ratio of its rotational kinetic energy to the total kinetic energy?)
B. एक : तीन (1:3)
C. एक : दो (1:2)
D. दो : एक (2:1)
व्याख्या (Explanation):
1. डिस्क के लिए जड़त्व आघूर्ण ($I$) = $\frac{1}{2}mr^2$
2. घूर्णन गतिज ऊर्जा ($K_{rot}$) = $\frac{1}{2}I\omega^2 = \frac{1}{2}(\frac{1}{2}mr^2)\omega^2 = \frac{1}{4}mv^2$
3. रैखिक गतिज ऊर्जा ($K_{trans}$) = $\frac{1}{2}mv^2$
4. कुल ऊर्जा ($K_{total}$) = $K_{rot} + K_{trans} = \frac{1}{4}mv^2 + \frac{1}{2}mv^2 = \frac{3}{4}mv^2$
अनुपात: $\frac{K_{rot}}{K_{total}} = \frac{\frac{1}{4}mv^2}{\frac{3}{4}mv^2} = \frac{1}{3}$
अतः अनुपात 1:3 होगा।
किसी भी लुढ़कती वस्तु के लिए अनुपात का सूत्र: $\frac{K^2}{R^2 + K^2}$
डिस्क के लिए $K^2 = \frac{1}{2}R^2$ होता है।
अनुपात = $\frac{1/2}{1 + 1/2} = \frac{1/2}{3/2} = 1:3$
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(Arrange the following moment of inertia-)
(b) ठोस चकती का स्पर्श रेखा के परितः जड़त्व आघूर्ण (Solid disc about a tangent point)
(c) पतली छड़ का लंबाई के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (Thin rod about center perpendicular to length)
(d) ठोस बेलन का अपनी ज्यामितीय केन्द्र अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (Solid cylinder about central axis)
B. b > a > c > d
C. c > d > b > a
D. d > c > a > b
व्याख्या (Explanation):
मान लीजिए सबका द्रव्यमान $M$ और त्रिज्या/लंबाई $R$ है:
(a) वलय (Ring): $I = 1.0 MR^2$
(b) चकती (Disc) स्पर्श रेखा पर: $\frac{1}{2}MR^2 + MR^2 = \mathbf{1.5 MR^2}$ (सबसे बड़ा)
(c) छड़ (Rod): $\frac{1}{12}MR^2 \approx \mathbf{0.08 MR^2}$ (सबसे छोटा)
(d) ठोस बेलन (Solid Cylinder): $\frac{1}{2}MR^2 = \mathbf{0.5 MR^2}$
तुलना: $1.5 > 1.0 > 0.5 > 0.08$
अतः सही क्रम है: b > a > d > c (विकल्प B में टाइपिंग के अनुसार b > a > c > d निकटतम है)।
याद रखें, "स्पर्श रेखा" (Tangent) पर जड़त्व आघूर्ण हमेशा केंद्र से ज्यादा होता है। चकती का स्पर्श रेखा पर मान $1.5$ गुना हो जाता है, इसलिए 'b' सबसे पहले आएगा। छड़ (Rod) का मान $1/12$ बहुत छोटा होता है, इसलिए वो पीछे रहेगा।
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(Parallel plate capacitor is a charge storage device. For the below Assertion [As] and Reason [R], choose the correct alternative-)
(Assertion [As]: A parallel plate capacitor with air can store infinite charge.)
कारण [R]: समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता प्लेटों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
(Reason [R]: The capacitance of a parallel plate capacitor is inversely proportional to the plate separation.)
([As] is incorrect, but [R] is correct.)
B. [As] तथा [R] दोनों सही हैं, किन्तु [R], [As] की सही व्याख्या नहीं करता है।
(Both [As] and [R] are correct, but [R] is not the correct explanation of [As].)
C. [As] तथा [R] दोनों गलत हैं।
(Both [As] and [R] are incorrect.)
D. [As] तथा [R] दोनों सही हैं और [R], [As] की सही व्याख्या करता है।
(Both [As] and [R] are correct, and [R] is the correct explanation of [As].)
व्याख्या (Explanation):
1. अभिकथन [As]: कोई भी संधारित्र "अनंत" आवेश स्टोर नहीं कर सकता। एक सीमा के बाद वायु का परावैद्युत सामर्थ्य (Dielectric Strength) टूट जाता है और स्पार्किंग शुरू हो जाती है। इसलिए [As] गलत है।
2. कारण [R]: संधारित्र की धारिता का सूत्र $C = \frac{\epsilon_0 A}{d}$ होता है। यहाँ $d$ (दूरी) नीचे है, जिसका अर्थ है कि धारिता दूरी के व्युत्क्रमानुपाती है। इसलिए [R] सही है।
फिजिक्स में "अनंत" (Infinite) शब्द अक्सर खतरे की घंटी होता है!
कोई भी डिवाइस किसी चीज को 'अनंत' नहीं रख सकती, तो [As] सीधा गलत हो गया। फॉर्मूले में $d$ (दूरी) नीचे आती है, इसलिए दूरी कम तो धारिता ज्यादा (उल्टा संबंध)।
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(Arrange the following to order of length-)
(b) एंगस्ट्राम (Angstrom)
(c) नैनोमीटर (Nanometre)
(d) माइक्रान (Micron)
B. a > b > c > d
C. d > c > b > a
D. c > d > a > b
व्याख्या (Explanation):
इन सभी इकाइयों का मीटर (m) में मान इस प्रकार है:
(d) माइक्रान (Micron): $10^{-6}$ m (सबसे बड़ा इनमें)
(c) नैनोमीटर (Nanometre): $10^{-9}$ m
(b) एंगस्ट्राम (Angstrom): $10^{-10}$ m
(a) फर्मी (Fermi): $10^{-15}$ m (सबसे छोटा)
अतः लंबाई का घटता हुआ सही क्रम है: Micron > Nanometre > Angstrom > Fermi
माइनस (-) में घात (power) जितनी छोटी होती है, संख्या उतनी ही बड़ी होती है।
6 (माइक्रो) < 9 (नैनो) < 10 (एंगस्ट्राम) < 15 (फर्मी)।
इसलिए माइक्रोन सबसे बड़ा और फर्मी सबसे छोटा है।
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(According to Hooke’s Law of elasticity, if stress is increased, the ratio of stress to strain-)
B. घटता है (Decreases)
C. शून्य हो जाता है (Becomes zero)
D. स्थिर रहता है (Remains constant)
व्याख्या (Explanation):
हुक के नियम (Hooke's Law) के अनुसार, प्रत्यास्थता सीमा के भीतर:
प्रतिबल (Stress) $\propto$ विकृति (Strain)
$\frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = E$ (प्रत्यास्थता गुणांक)
यहाँ $E$ एक नियतांक (Constant) है। इसका मतलब है कि यदि आप प्रतिबल बढ़ाएंगे, तो विकृति भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी, जिससे उनका अनुपात ($E$) हमेशा स्थिर रहेगा। यह केवल पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है, प्रतिबल या विकृति पर नहीं।
प्रतिबल और विकृति 'दोस्त' की तरह हैं। अगर एक 2 गुना बढ़ेगा, तो दूसरा भी चुपके से 2 गुना बढ़ जाएगा। जब आप दोनों को भाग (Divide) करेंगे, तो परिणाम हमेशा वही पुराना नियतांक (Constant) ही आएगा।
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(Four wires made of the same material have different parameters. Arrange them in increasing order of resistance.)
(b) लंबाई = 2 मी., त्रिज्या = 2 मिमी (L=2m, r=2mm)
(c) लंबाई = 1 मी., त्रिज्या = 1 मिमी (L=1m, r=1mm)
(d) लंबाई = 2 मी., त्रिज्या = 1 मिमी (L=2m, r=1mm)
B. c → a → d → b
C. a → b → c → d
D. d → c → b → a
व्याख्या (Explanation):
प्रतिरोध का सूत्र: $R = \rho \frac{L}{A} = \rho \frac{L}{\pi r^2}$
समान पदार्थ के लिए $R \propto \frac{L}{r^2}$
तुलना करने पर:
(a) $R_a \propto \frac{1}{2^2} = \frac{1}{4} = \mathbf{0.25}$ (सबसे कम)
(b) $R_b \propto \frac{2}{2^2} = \frac{2}{4} = \mathbf{0.50}$
(c) $R_c \propto \frac{1}{1^2} = \frac{1}{1} = \mathbf{1.00}$
(d) $R_d \propto \frac{2}{1^2} = \frac{2}{1} = \mathbf{2.00}$ (सबसे अधिक)
अतः बढ़ता हुआ क्रम: a < b < c < d
प्रतिरोध लंबाई के साथ बढ़ता है और मोटाई (त्रिज्या) के साथ घटता है।
- सबसे छोटा तार और सबसे मोटा तार = न्यूनतम प्रतिरोध (a)।
- सबसे लंबा तार और सबसे पतला तार = अधिकतम प्रतिरोध (d)।
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(Two statements are given one is Assertion [As] and the other is Reason [R]. Choose the correct option-)
(Assertion [As]: Step down transformer increases the current.)
कारण [R]: ट्रांसफार्मर ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है।
(Reason [R]: Transformer obeys the law of conservation of energy.)
(Both [As] and [R] are true, and [R] is the correct explanation of [As].)
B. [As] और [R] दोनों सही हैं, लेकिन [R], [As] का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(Both [As] and [R] are true, but [R] is NOT the correct explanation of [As].)
C. [As] सही है, लेकिन [R] गलत है।
([As] is true, but [R] is false.)
D. [As] गलत है, लेकिन [R] सही है।
([As] is false, but [R] is true.)
व्याख्या (Explanation):
1. अपचायी ट्रांसफार्मर (Step-down): यह वोल्टेज को कम करता है। चूँकि आदर्श ट्रांसफार्मर में शक्ति ($P = V \times I$) नियत रहती है, इसलिए वोल्टेज कम होने पर धारा (Current) अपने आप बढ़ जाती है। अतः [As] सही है।
2. ऊर्जा संरक्षण: ट्रांसफार्मर नई ऊर्जा पैदा नहीं करता, बल्कि ऊर्जा को एक परिपथ से दूसरे में स्थानांतरित करता है। इसी कारण वोल्टेज कम होने पर उसे धारा बढ़ानी पड़ती है ताकि कुल ऊर्जा (शक्ति) संरक्षित रहे। अतः [R] सही है और यह [As] का सही कारण भी है।
ट्रांसफार्मर एक "व्यापारी" की तरह है। अगर वह वोल्टेज में घाटा (Step-down) सहता है, तो वह करंट में मुनाफा (Increase) कमा लेता है ताकि कुल बैलेंस (Energy) बराबर रहे।
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(An electric dipole is placed in a non-uniform electric field making an angle 30° with the electric field. The dipole will experience-)
B. रेखीय बल एवं बल आघूर्ण दोनों (Both a torque and a translatory force)
C. केवल आघूर्ण (Only a torque)
D. केवल रेखीय बल, विद्युत क्षेत्र की दिशा में (Only a translatory force in the direction of electric field)
व्याख्या (Explanation):
1. बल आघूर्ण (Torque): चूंकि द्विध्रुव क्षेत्र के साथ 30° के कोण पर है, इसलिए उस पर बल आघूर्ण ($\tau = pE \sin\theta$) कार्य करेगा, जो उसे घुमाने की कोशिश करेगा।
2. रेखीय बल (Translatory Force): चूंकि विद्युत क्षेत्र असमान (Non-uniform) है, इसलिए द्विध्रुव के दोनों आवेशों पर लगने वाले बल परिमाण में बराबर नहीं होंगे ($F_1 \neq F_2$)। इस कारण उन पर एक परिणामी रेखीय बल भी कार्य करेगा।
नोट: यदि क्षेत्र समान (Uniform) होता, तो नेट बल शून्य होता और केवल टॉर्क लगता। लेकिन यहाँ क्षेत्र असमान है, इसलिए दोनों लगेंगे।
- समान (Uniform) क्षेत्र = केवल घूमना (Torque)।
- असमान (Non-uniform) क्षेत्र = घूमना + आगे बढ़ना (Torque + Force)।
असमानता का मतलब है कि सब कुछ 'डबल' अनुभव होगा!
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| Column - I | Column - II |
|---|---|
| (a) संधारित्र (Capacitor) | (I) शून्य विभव (Zero potential) |
| (b) पृथ्वी (Earth) | (II) उच्च विभवान्तर (High potential difference) |
| (c) वान-डी-ग्राफ (Van-de-graaff) | (III) आवेश संग्रहण (Storage of charge) |
| (d) परावैद्युत माध्यम (Dielectric medium) | (IV) विद्युत क्षेत्र कम करना (To decrease electric field) |
B. a-III, b-I, c-II, d-IV
C. a-I, b-IV, c-II, d-III
D. a-III, b-I, c-IV, d-II
व्याख्या (Explanation):
- (a) → (III): संधारित्र (Capacitor) का मुख्य कार्य आवेश को संग्रहित करना है।
- (b) → (I): पृथ्वी का विभव मानक रूप से हमेशा शून्य (Zero Potential) माना जाता है।
- (c) → (II): वान-डी-ग्राफ जनरेटर का उपयोग बहुत उच्च विभवान्तर (High Potential Difference) उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
- (d) → (IV): संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत (Dielectric) डालने से उनके बीच का विद्युत क्षेत्र घट जाता है।
पृथ्वी = 0 विभव।
जैसे ही आप 'b' का मिलान 'I' से करेंगे, आपके पास केवल विकल्प B और D बचेंगे। अब याद रखें कि परावैद्युत (Dielectric) का काम हमेशा क्षेत्र को कम करना होता है (IV), जिससे सही विकल्प B मिल जाएगा।
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(A particle having a mass of $10^{-2}$ kg carries a charge of $5 \times 10^{-8}$ C. The particle is given an initial horizontal velocity of $10^5$ m/s in the presence of electric field $\vec{E}$ and magnetic $\vec{B}$. To keep the particle moving in horizontal direction it is necessary that-)
(II) $\vec{B}$ और $\vec{E}$ दोनों वेग की दिशा में होने चाहिए।
(III) $\vec{B}$ और $\vec{E}$ दोनों परस्पर लंबवत् और वेग की दिशा के लंबवत् होने चाहिए।
(IV) $\vec{B}$ वेग की दिशा में होना चाहिए और $\vec{E}$ वेग की दिशा के लंबवत् होना चाहिए।
B. III और IV सत्य हैं।
C. II और III सत्य हैं।
D. II और IV सत्य हैं।
व्याख्या (Explanation):
कण को विक्षेपित हुए बिना सीधी (क्षैतिज) दिशा में चलने के लिए उस पर लगने वाला नेट बल शून्य होना चाहिए।
1. स्थिति (II): यदि $E$ और $B$ दोनों वेग की दिशा में हैं, तो चुंबकीय बल शून्य ($F_m = qvB\sin 0^\circ = 0$) होगा। विद्युत बल कण को उसी दिशा में त्वरित करेगा, पर रास्ता नहीं बदलेगा। (सत्य है)
2. स्थिति (III): यदि $E$ और $B$ परस्पर लंबवत् और वेग के भी लंबवत् हैं, तो विद्युत बल ($qE$) और चुंबकीय बल ($qvB$) एक-दूसरे के विपरीत कार्य करके एक-दूसरे को काट सकते हैं। (सत्य है)
सीधी रेखा में चलने के दो ही तरीके हैं:
- या तो कोई छेड़े ही नहीं (जब दोनों वेग की दिशा में हों)।
- या फिर दोनों छेड़ें पर बराबर और विपरीत ताकत से (Crossed Fields - लंबवत् स्थिति)।
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(Which of the following graphs show variation of induced emf with the rate of change of current flowing through the coil?)
B. ग्राफ B (धनात्मक ढाल वाली सीधी रेखा)
C. ग्राफ C (क्षैतिज रेखा)
D. ग्राफ D (वक्र रेखा)
व्याख्या (Explanation):
स्व-प्रेरण (Self Induction) के नियमानुसार, प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced emf):
$$e = -L \frac{dI}{dt}$$
यहाँ $L$ स्व-प्रेरकत्व (Self-inductance) है जो एक नियतांक है।
यह समीकरण $y = -mx$ के रूप का है। इसका मतलब है कि प्रेरित emf ($e$) और धारा परिवर्तन की दर ($\frac{dI}{dt}$) के बीच एक सीधी रेखा का संबंध होगा, लेकिन ऋणात्मक चिह्न (-) के कारण इसकी ढाल (Slope) नीचे की ओर होगी। इसलिए ग्राफ A सही है।
प्रेरित emf हमेशा उस 'कारण' का विरोध करता है जिससे वह पैदा हुआ है (लेंज का नियम)। यह 'विरोध' गणित में ऋण चिन्ह (-) से दिखाया जाता है। ग्राफ में जब रेखा नीचे की ओर जाए, तो वह विरोध को दर्शाती है।
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(The total work done on a particle is equal to the change in its kinetic energy-)
B. केवल तभी जब उस पर लगाया बल संरक्षी हो (Only if forces acting on it are conservative)
C. केवल तब जब अकेले गुरुत्वाकर्षण बल उस पर कार्य करे (Only if gravitational force alone acts on it)
D. केवल तब जब उस पर प्रत्यास्थ बल कार्य करता हो (Only if elastic force alone acts on it)
व्याख्या (Explanation):
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem): यह प्रमेय कहती है कि किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों (चाहे वे संरक्षी हों या असंरक्षी, आंतरिक हों या बाह्य) द्वारा किया गया कुल कार्य, उसकी गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।
समीकरण: $W_{total} = \Delta K = K_f - K_i$
चूंकि यह नियम ब्रह्मांड के हर बल के लिए लागू होता है, इसलिए इसका उत्तर 'हमेशा' होगा।
"कुल कार्य" (Total Work) का मतलब ही है "सबका साथ"। जब सवाल में 'कुल कार्य' लिखा हो, तो वह किसी खास बल का पक्षपात नहीं करता। वह 'हमेशा' गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के ही बराबर होगा।
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(The correct ratio of specific heat of the following gaseous substance of constant volume and constant pressure will be-)
(b) द्विपरमाणुक गैस (Diatomic gas molecules)
(c) अरैखिक बहुपरमाणुक गैस (Non-linear polyatomic gas molecules)
(d) रैखिक बहुपरमाणुक गैस (Linear polyatomic gas molecules)
B. d > a > b > c
C. a > b > c > d
D. c > b > a > d
व्याख्या (Explanation):
विशिष्ट ऊष्मा का अनुपात $\gamma = \frac{C_p}{C_v} = 1 + \frac{2}{f}$ (जहाँ $f$ स्वतंत्रता की कोटि/Degrees of Freedom है)।
1. एक परमाणु (a): $f=3 \Rightarrow \gamma = 1 + 2/3 = 1.67$
2. द्विपरमाणुक (b): $f=5 \Rightarrow \gamma = 1 + 2/5 = 1.40$
3. अरैखिक बहुपरमाणुक (c): $f=6 \Rightarrow \gamma = 1 + 2/6 = 1.33$
4. रैखिक बहुपरमाणुक (d): $f=7$ (उच्च ताप पर) $\Rightarrow \gamma = 1 + 2/7 \approx 1.28$
तुलना: $1.67 > 1.40 > 1.33 > 1.28$
अतः सही घटता क्रम है: a > b > c > d
जैसे-जैसे गैस के अणु जटिल (Complex) होते जाते हैं, उनका $\gamma$ मान **कम** होता जाता है।
सबसे सरल (एक परमाणु) = सबसे बड़ा $\gamma$
सबसे जटिल (बहुपरमाणुक) = सबसे छोटा $\gamma$
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(Which of the following form(s) a virtual and erect image for all positions of the object?)
(b) अवतल लेंस (Concave lens)
(c) उत्तल दर्पण (Convex mirror)
(d) अवतल दर्पण (Concave mirror)
B. केवल b और d (b and d only)
C. a, b और c (a, b and c)
D. b, c और d (b, c and d)
व्याख्या (Explanation):
1. अवतल लेंस (b) और उत्तल दर्पण (c): ये दोनों ही "अपसारी" (Diverging) स्वभाव के होते हैं। वस्तु कहीं भी रखी हो, इनसे बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा आभासी (Virtual), सीधा (Erect) और छोटा होता है।
2. उत्तल लेंस (a) और अवतल दर्पण (d): ये "अभिसारी" (Converging) होते हैं। ये वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब भी बनाते हैं। ये केवल एक ही स्थिति (जब वस्तु ध्रुव/केंद्र और फोकस के बीच हो) में आभासी प्रतिबिंब बनाते हैं, "सभी स्थितियों" के लिए नहीं।
याद रखें: **"अवतल लेंस"** और **"उत्तल दर्पण"** जुड़वाँ भाई जैसे हैं। ये हमेशा सीधा और छोटा फोटो खींचते हैं, चाहे आप कहीं भी खड़े हों!
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(The magnetic field at the centre of a circular coil in tangent galvanometer is-)
B. कुण्डली में बहने वाली धारा के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (Inversely proportional to the current.)
C. कुण्डली में बहने वाली धारा से स्वतंत्र होता है। (Independent of the current.)
D. उपरोक्त में से कोई नहीं (None of the above)
व्याख्या (Explanation):
किसी वृत्ताकार कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ($B$) का सूत्र है:
$$B = \frac{\mu_0 n I}{2r}$$
जहाँ:
* $n$ = फेरों की संख्या
* $I$ = प्रवाहित धारा
* $r$ = कुण्डली की त्रिज्या
इस सूत्र से स्पष्ट है कि $B \propto I$, यानी चुंबकीय क्षेत्र कुण्डली में बहने वाली धारा के सीधे समानुपाती होता है।
जितनी ज्यादा बिजली (Current), उतना तगड़ा चुंबक (Magnetic Field)!
सीधा सा हिसाब है—बिजली बढ़ेगी तो चुंबकत्व भी बढ़ेगा।
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(Rank the following nuclei in order from largest to smallest value of the binding energy per nucleon-)
(b) $_{24}Cr^{52}$
(c) $_{62}Sm^{152}$
(d) $_{80}Hg^{200}$
(e) $_{92}Cf^{252}$
B. a > b > c > d > e
C. b > c > d > e > a
व्याख्या (Explanation):
बंधन ऊर्जा वक्र के अनुसार:
1. मध्यम आकार के नाभिक ($A \approx 30$ से $170$): इनकी प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा सबसे अधिक (लगभग 8.5 MeV) होती है। लोहे (Fe) और क्रोमियम (Cr) इसी क्षेत्र में आते हैं। इसलिए (b) $_{24}Cr^{52}$ सबसे ऊपर होगा।
2. भारी नाभिक ($A > 170$): जैसे-जैसे द्रव्यमान संख्या बढ़ती है, बंधन ऊर्जा धीरे-धीरे घटती है। इसलिए क्रम Sm > Hg > Cf होगा।
3. हल्के नाभिक: हीलियम ($He^4$) जैसे नाभिकों की बंधन ऊर्जा क्रोमियम और भारी नाभिकों की तुलना में काफी कम होती है।
सही घटता क्रम: Cr(52) > Sm(152) > Hg(200) > Cf(252) > He(4)
यानी: b > c > d > e > a
याद रखें, परमाणु भार 50 से 100 के बीच वाले नाभिक सबसे ज्यादा 'मजबूत' (Highest B.E.) होते हैं। बहुत हल्के और बहुत भारी नाभिक थोड़े कमजोर होते हैं।
सबसे मजबूत = Cr (52)
सबसे कमजोर = He (4)
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(Let V and E denote the gravitational potential and gravitational field at a point. It is possible to have-)
(b) V = 0 और E ≠ 0
(c) V ≠ 0 और E = 0
(d) V ≠ 0 और E ≠ 0
B. b, c और d
C. c, d और a
D. d, a और b
व्याख्या (Explanation):
गुरुत्वीय क्षेत्र (E) और विभव (V) के बीच संबंध है: $E = -\frac{dV}{dr}$
1. V=0 और E=0 (a): अनंत (Infinity) पर विभव और क्षेत्र दोनों शून्य होते हैं। (संभव है)
2. V≠0 और E=0 (c): एक खोखले गोले (Hollow Sphere) के अंदर विभव नियत (Constant) होता है पर क्षेत्र शून्य होता है। (संभव है)
3. V≠0 और E≠0 (d): पृथ्वी की सतह के ऊपर किसी भी बिंदु पर विभव और क्षेत्र दोनों के मान होते हैं। (संभव है)
4. V=0 और E≠0 (b): गुरुत्वाकर्षण में विभव हमेशा ऋणात्मक होता है, यह शून्य केवल अनंत पर होता है जहाँ क्षेत्र भी शून्य हो जाता है। अतः यह स्थिति संभव नहीं है।
गुरुत्वाकर्षण में 'विभव' (Potential) एक बहुत ही शर्मीला दोस्त है, यह तब तक शून्य नहीं होता जब तक आप अनंत (Infinity) तक न पहुँच जाएँ। अगर विभव शून्य हो गया, तो समझो क्षेत्र (Field) भी गायब हो चुका है।
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(For the two coils P and S of same coefficient of self inductance (L), if M is the mutual inductance then which of the following options is a correct sequence for the maximum coefficient of coupling (K) of the coils?)
B. b > c > a > e > d
C. a > b > c > e > d
D. d > e > b > c > a
व्याख्या (Explanation):
युग्मन गुणांक ($K$) इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों कुण्डलियाँ एक-दूसरे के कितने करीब हैं और किस दिशा में रखी हैं।
1. स्थिति (a): जब एक कुण्डली दूसरी के ऊपर लिपटी हो, तो फ्लक्स का रिसाव न्यूनतम होता है और $K$ अधिकतम होता है। ($K \approx 1$)
2. स्थिति (b) और (c): जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है ($r$ से $2r$), $K$ का मान कम होता जाता है। ($b > c$)
3. स्थिति (e): यहाँ कुण्डलियाँ एक कोण पर हैं, जिससे फ्लक्स जुड़ाव कम हो जाता है।
4. स्थिति (d): यहाँ दोनों कुण्डलियाँ एक-दूसरे के लम्बवत् (Perpendicular) रखी हैं। इस स्थिति में $K$ का मान न्यूनतम (लगभग शून्य) होता है क्योंकि फ्लक्स लाइन्स एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
सही क्रम: a > b > c > e > d
- चिपके हुए = सबसे ज्यादा $K$ (a)
- दूर हुए = $K$ कम (b, c)
- टेढ़े हुए = $K$ और कम (e)
- लम्बवत् (90°) हुए = $K$ सबसे कम या जीरो (d)
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(For the following Assertion [As] and Reason [R], select the correct alternative-)
(Assertion [As]: A Rigid body is that which has a definite shape and size.)
कारण [R]: ऐसे पिण्ड के विभिन्न कणों के बीच की दूरी उस पर कोई बल लगाने पर नहीं बदलती।
(Reason [R]: Distance between different pairs of particles of such a body do not change on applying any force on it.)
(Both [As] and [R] are true, and [R] is the correct explanation of [As].)
B. [As] और [R] दोनों सत्य हैं, लेकिन [R], [As] की सही व्याख्या नहीं है।
(Both [As] and [R] are true, but [R] is not the correct explanation of [As].)
C. [As] सत्य है, लेकिन [R] असत्य है।
([As] is true, but [R] is false.)
D. [As] और [R] दोनों असत्य हैं।
(Both [As] and [R] are also false.)
व्याख्या (Explanation):
1. दृढ़ पिण्ड (Rigid Body): आदर्श रूप से एक दृढ़ पिण्ड वह है जिसे दबाया या खींचा न जा सके, यानी उसका आकार (Size) और आकृति (Shape) स्थिर रहती है। अतः [As] सही है।
2. कारण: पिण्ड का आकार और आकृति स्थिर तभी रह सकती है जब उसके अंदर के कणों (Particles) के बीच की दूरी हमेशा एक जैसी रहे, चाहे उस पर कितना भी बाहरी बल लगाया जाए। चूँकि यही कारण पिण्ड को 'दृढ़' बनाता है, इसलिए [R] सही है और यह [As] की एकदम सही व्याख्या भी है।
"जैसे को तैसा!"
दृढ़ पिण्ड वो ज़िद्दी चीज़ है जो बल लगाने पर भी अपनी जगह से नहीं हिलती और अपने कणों को भी दूर नहीं जाने देती। कणों की दूरी फिक्स = आकृति फिक्स!
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(The Bohr model for the spectra of H-atom-)
(b) यह He-परमाणु के लिए लागू नहीं होगा। (will not be applicable as it is for an He-atom.)
(c) केवल कमरे के तापमान पर ही मान्य है। (is valid only at room temperature.)
(d) निरंतर और साथ ही असतत (discrete) स्पेक्ट्रल रेखाओं की भविष्यवाणी करता है। (predicts continuous as well as discrete spectral lines.)
B. केवल c और d (c and d only)
C. a, b और c (a, b and c)
D. a, c और b, d
व्याख्या (Explanation):
1. कथन (a): बोर का मॉडल केवल "एक इलेक्ट्रॉन" वाले परमाणुओं/आयनों के लिए है। हाइड्रोजन अणु ($H_2$) में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह आणविक रूप पर लागू नहीं होता। (सही है)
2. कथन (b): हीलियम ($He$) परमाणु में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह हीलियम परमाणु पर भी लागू नहीं होता (यह केवल $He^+$ आयन पर लागू होता है)। (सही है)
3. कथन (c) और (d): यह मॉडल तापमान पर निर्भर नहीं है, और यह केवल **असतत (Discrete)** स्पेक्ट्रल रेखाओं की व्याख्या करता है, निरंतर (Continuous) की नहीं।
नील्स बोर का मॉडल एक **"VIP क्लब"** की तरह है, जिसमें केवल **"सिंगल इलेक्ट्रॉन"** (Single Electron) वालों को ही एंट्री मिलती है।
$H$ परमाणु = 1 इलेक्ट्रॉन (OK)
$H_2$ अणु या $He$ परमाणु = 2 इलेक्ट्रॉन (NOT OK)
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(Arrange the following in order of their forbidden energy band gap-)
(b) कुचालक (Insulator)
(c) आंतरिक अर्धचालक (Intrinsic semiconductor)
(d) बाह्य अर्धचालक (Extrinsic semiconductor)
B. a > b > c > d
C. c > a > b > d
D. d > b > c > a
व्याख्या (Explanation):
वर्जित ऊर्जा अंतराल ($E_g$) वह ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को संयोजी बैंड से चालन बैंड में जाने के लिए चाहिए:
1. कुचालक (b): इनका अंतराल सबसे बड़ा होता है ($E_g > 3$ eV)। इलेक्ट्रॉन पार नहीं कर पाते।
2. आंतरिक अर्धचालक (c): इनका अंतराल मध्यम होता है (जैसे सिलिकॉन के लिए $1.1$ eV)।
3. बाह्य अर्धचालक (d): अशुद्धि (Doping) मिलाने से ऊर्जा अंतराल प्रभावी रूप से कम हो जाता है, जिससे चालकता बढ़ती है। ($c > d$)
4. सुचालक (a): इनमें बैंड एक-दूसरे के ऊपर होते हैं (Overlap), इसलिए अंतराल शून्य होता है।
सही क्रम: b (कुचालक) > c (आंतरिक) > d (बाह्य) > a (सुचालक)
"अंतराल जितना बड़ा, बिजली उतनी ही मुश्किल!"
कुचालक में 'गैप' पहाड़ जैसा है (सबसे बड़ा), और सुचालक में गैप है ही नहीं (शून्य)। अर्धचालक बीच में आते हैं, और अशुद्धि मिलाने से गैप थोड़ा और कम हो जाता है।
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(At critical temperature, the surface tension of liquid is-)
B. अनन्त (Infinity)
C. किसी भी अन्य ताप के समान (Same as that any other temperature)
D. तय नहीं किया जा सकता (Cannot be determined)
व्याख्या (Explanation):
1. तापमान का प्रभाव: जैसे-जैसे द्रव का तापमान बढ़ता है, उसके अणुओं के बीच लगने वाला संसंजक बल (Cohesive Force) कम होता जाता है, जिससे पृष्ठ तनाव घटता है।
2. क्रांतिक ताप (Critical Temperature): यह वह तापमान है जिस पर द्रव और उसकी वाष्प के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है। इस बिंदु पर द्रव का पृष्ठ तनाव पूरी तरह खत्म होकर शून्य हो जाता है।
याद रखें: **"गर्मी बढ़ाओ, तनाव घटाओ"**।
जब तापमान 'क्रांतिक' (Critical) हो जाए, तो समझो तनाव (Tension) लेने की शक्ति ही खत्म हो गई—यानी पृष्ठ तनाव सीधा **0**!
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(A charge q is uniformly distributed on a thin spherical shell of radius R. The graph showing the variation of electric field E with distance r is-)
B. ग्राफ B (अचानक उछाल और फिर घटता हुआ)
C. ग्राफ C (स्थिर और फिर घटता हुआ)
D. ग्राफ D (त्रिकोणीय ग्राफ)
व्याख्या (Explanation):
एक पतले गोलीय खोल के लिए विद्युत क्षेत्र ($E$) के तीन नियम हैं:
1. अन्दर (Inside, r < R): खोल के अन्दर कोई आवेश नहीं होता, इसलिए विद्युत क्षेत्र शून्य ($E = 0$) होता है। ग्राफ यहाँ अक्ष के साथ चलेगा।
2. सतह पर (At surface, r = R): सतह पर अचानक उछाल आता है और क्षेत्र अधिकतम होता है ($E = \frac{kq}{R^2}$)।
3. बाहर (Outside, r > R): बाहर जाने पर क्षेत्र दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है ($E \propto \frac{1}{r^2}$)। ग्राफ यहाँ तेजी से नीचे गिरेगा।
यह तीनों स्थितियाँ केवल ग्राफ B में सही तरीके से दिखाई गई हैं।
याद रखें: **"खोल के अन्दर शांति, सतह पर क्रांति!"**
अन्दर कुछ नहीं (0), सतह पर अचानक मैक्सिमम उछाल, और फिर धीरे-धीरे कम। ग्राफ में जहाँ शुरुआत में लाइन जमीन (Axis) पर चिपकी हो और फिर अचानक उछले, वही सही उत्तर है।
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(Arrange the spectral series in spectrum of hydrogen atom according to their wavelength-)
(b) पाश्चन श्रृंखला (Paschen Series)
(c) बाल्मर श्रृंखला (Balmer Series)
(d) ब्रैकेट श्रृंखला (Brackett Series)
(e) फुण्ड श्रृंखला (Pfund Series)
B. a < c < b < d < e
C. b < c < d < e < a
D. a < b < c < d < e
व्याख्या (Explanation):
तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) ऊर्जा ($E$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($E = hc/\lambda$)।
1. लायमन (a): पराबैंगनी (UV) क्षेत्र - सबसे अधिक ऊर्जा, सबसे कम तरंगदैर्ध्य।
2. बाल्मर (c): दृश्य (Visible) क्षेत्र - मध्यम तरंगदैर्ध्य।
3. पाश्चन (b), ब्रैकेट (d), फुण्ड (e): ये तीनों अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में आती हैं। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, ऊर्जा कम होती जाती है और तरंगदैर्ध्य बढ़ती जाती है।
सही बढ़ता क्रम ($\lambda$): Lyman (a) < Balmer (c) < Paschen (b) < Brackett (d) < Pfund (e)
बस यह नाम याद रखें: **"लइया-बासमती-पनीर-बटर-पनीर"** (L-B-P-B-P)।
जैसे-जैसे आप इस क्रम में आगे बढ़ेंगे, तरंगदैर्ध्य (Wavelength) बढ़ती जाएगी।
Lyman (सबसे छोटा $\lambda$) → Pfund (सबसे बड़ा $\lambda$)।
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(In a semiconductor the separation between conduction band and valence band is of the order of-)
B. 10 eV
C. 1 eV
D. 0 eV
व्याख्या (Explanation):
पदार्थों का वर्गीकरण उनके ऊर्जा अंतराल ($E_g$) के आधार पर किया जाता है:
1. अर्धचालक (Semiconductors): इनमें ऊर्जा अंतराल बहुत कम, लगभग 1 eV के क्रम का होता है। (जैसे सिलिकॉन के लिए $1.1$ eV और जर्मेनियम के लिए $0.7$ eV)।
2. कुचालक (Insulators): इनमें यह अंतराल बहुत बड़ा, लगभग 6 eV से 10 eV या उससे अधिक होता है।
3. सुचालक (Conductors): इनमें अंतराल 0 eV होता है क्योंकि बैंड ओवरलैप करते हैं।
याद रखने का सीधा तरीका:
- **0 eV** = सुचालक (खुला रास्ता)
- **1 eV** = अर्धचालक (छोटा सा गड्ढा)
- **>5 eV** = कुचालक (बहुत बड़ी खाई)
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(A prism with an angle $A = 60^\circ$ produces an angle of minimum deviation of $30^\circ$. Find the refractive index of material of the prism-)
B. $\sqrt{2}$
C. $\sqrt{1.5}$
D. 2
व्याख्या (Explanation):
प्रिज्म के अपवर्तनांक ($\mu$) का सूत्र:
$$\mu = \frac{\sin\left(\frac{A + \delta_m}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}$$
यहाँ $A = 60^\circ$ और $\delta_m = 30^\circ$ है।
1. अंश: $\sin\left(\frac{60 + 30}{2}\right) = \sin(45^\circ) = \frac{1}{\sqrt{2}}$
2. हर: $\sin\left(\frac{60}{2}\right) = \sin(30^\circ) = \frac{1}{2}$
अतः, $\mu = \frac{1/\sqrt{2}}{1/2} = \frac{2}{\sqrt{2}} = \mathbf{\sqrt{2}}$
$\sqrt{2}$ का मान लगभग **1.414** होता है।
फोटो में उपयोग किया गया सूत्र $\delta = (\mu - 1)A$ केवल तभी काम करता है जब प्रिज्म का कोण बहुत छोटा ($10^\circ$ से कम) हो। $60^\circ$ वाले प्रिज्म के लिए हमेशा $\sin$ वाला मुख्य सूत्र ही लगायें!
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| कालम - I (गैस प्रकार) | कालम - II (विशिष्ट ऊष्मा $C_v$) |
|---|---|
| (a) एक परमाणु गैस ($He$) | (I) $C_v = \frac{7}{2}R$ |
| (b) द्विपरमाणुक गैस ($H_2$) | (II) $C_v = 3R$ |
| (c) बहुपरमाणुक रैखिक गैस ($CO_2$) | (III) $C_v = \frac{3}{2}R$ |
| (d) बहुपरमाणुक अरैखिक गैस ($NH_3$) | (IV) $C_v = \frac{5}{2}R$ |
B. a-II, b-III, c-IV, d-I
C. a-III, b-IV, c-I, d-II
D. a-IV, b-I, c-II, d-III
व्याख्या (Explanation):
स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा का सूत्र है: $C_v = \frac{f}{2}R$ (जहाँ $f$ स्वतंत्रता की कोटि है)।
* (a) → (III): $He$ (एक परमाणु) के लिए $f=3 \Rightarrow C_v = \frac{3}{2}R$
* (b) → (IV): $H_2$ (द्विपरमाणुक) के लिए $f=5 \Rightarrow C_v = \frac{5}{2}R$
* (c) → (I): $CO_2$ (रैखिक बहुपरमाणुक) के लिए $f=7$ (कंपन ऊर्जा जोड़कर) $\Rightarrow C_v = \frac{7}{2}R$
* (d) → (II): $NH_3$ (अरैखिक बहुपरमाणुक) के लिए $f=6 \Rightarrow C_v = \frac{6}{2}R = 3R$
याद रखें: परमाणुओं की संख्या बढ़ेगी, तो $C_v$ भी बढ़ेगा!
सबसे कम परमाणु (He) = सबसे कम $C_v$ ($\frac{3}{2}R$)
सबसे अधिक परमाणु (NH3) = ज्यादा $C_v$ ($3R$)
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(The closed loop (PQRS) of wire is moved into a uniform magnetic at right angles to the plane of the paper as shown in the figure. Predict the direction of the induced current in the loop-)
B. PSRQP
C. समतल से ऊपर (Up to the plane)
D. समतल से नीचे (Down into the plane)
व्याख्या (Explanation):
इस सवाल को हल करने के लिए हम लेंज के नियम का उपयोग करते हैं:
1. फ्लक्स में वृद्धि: चित्र में लूप चुंबकीय क्षेत्र (X चिह्न का मतलब है कागज के तल के अंदर की ओर) में प्रवेश कर रहा है। जैसे-जैसे यह अंदर जाएगा, लूप से गुजरने वाला 'अंदर की ओर' जाने वाला चुंबकीय फ्लक्स बढ़ेगा।
2. विरोध: लेंज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा इस बढ़ते हुए फ्लक्स का विरोध करेगी। विरोध करने के लिए उसे अपना चुंबकीय क्षेत्र कागज के तल से बाहर की ओर (Dots) पैदा करना होगा।
3. दाएँ हाथ का नियम: यदि हम दाएँ हाथ के अंगूठे को बाहर की ओर रखें, तो उंगलियाँ वामावर्त (Anti-clockwise) दिशा में मुड़ेंगी।
अतः धारा की दिशा P → S → R → Q → P होगी।
जब 'X' वाला क्षेत्र बढ़े, तो धारा उसे घटाने के लिए 'उलटी' (Anti-clockwise) दिशा में बहती है। बस चित्र में P से शुरू करके घड़ी की उलटी दिशा में चलें: P-S-R-Q-P।
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(Three harmonic waves having equal frequency $v$ and same intensity $I_0$, have phase angles $0, \frac{\pi}{4}$ and $-\frac{\pi}{4}$ respectively. When they are superimposed the intensity of the resultant wave is close to-)
B. $5.8 I_0$
C. $0.2 I_0$
D. $I_0$
व्याख्या (Explanation):
मान लीजिए प्रत्येक तरंग का आयाम (Amplitude) $A$ है, जहाँ $I_0 \propto A^2$ है। परिणामी आयाम $A_{net}$ निकालने के लिए हम आयामों को सदिश (Vector) की तरह जोड़ते हैं:
1. पहली तरंग: $0$ डिग्री पर (मान लीजिए X-अक्ष पर)।
2. दूसरी और तीसरी तरंग: $+45^\circ$ और $-45^\circ$ पर।
3. Y-अक्ष के घटक: $A \sin(45^\circ)$ और $A \sin(-45^\circ)$ एक-दूसरे को काट देंगे।
4. X-अक्ष के घटक: $A + A \cos(45^\circ) + A \cos(45^\circ) = A + 2A \cos(45^\circ) = A + 2A(1/\sqrt{2}) = A(1 + \sqrt{2})$
5. $A_{net} \approx A(1 + 1.414) = 2.414 A$
परिणामी तीव्रता ($I$):
$I \propto (A_{net})^2 \Rightarrow I = I_0 \times (2.414)^2 \approx \mathbf{5.82 I_0}$
चूंकि तीनों तरंगें काफी हद तक एक ही दिशा में ($-45^\circ$ से $+45^\circ$ के बीच) झुकी हुई हैं, इसलिए उनकी तीव्रता $3I_0$ से तो ज्यादा ही होगी (संपोषी व्यतिकरण की ओर)। विकल्पों में $3I_0$ से बड़ा केवल एक ही विकल्प है: **5.8 $I_0$**।
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(Wheatstone bridge is balanced when-)
(b) विपरीत प्रतिरोधों का गुणनफल बराबर होता है ($R_1 R_4 = R_2 R_3$)। (The product of opposite resistances is equal.)
(c) धारामापी से बहने वाली धारा अधिकतम होती है। (The current through the galvanometer is maximum.)
(d) परिपथ का तुल्य प्रतिरोध न्यूनतम होता है। (The equivalent resistance of the circuit is minimized.)
B. a और b सही हैं। (a and b are correct.)
C. a, b और c सही हैं। (a, b and c are correct.)
D. सभी विकल्प a, b, c और d सही हैं।
व्याख्या (Explanation):
एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. विभवान्तर शून्य (a): गैल्वेनोमीटर के दोनों सिरों (मध्य बिंदुओं) पर विभव समान होता है, जिससे विभवान्तर शून्य हो जाता है। (सत्य)
2. प्रतिरोधों का अनुपात (b): संतुलन की स्थिति में $\frac{R_1}{R_2} = \frac{R_3}{R_4}$ होता है, जिसे तिरछा गुणा करने पर $R_1 R_4 = R_2 R_3$ मिलता है। (सत्य)
3. धारामापी (c): संतुलन की स्थिति में धारामापी (Galvanometer) से बहने वाली धारा शून्य होती है, अधिकतम नहीं। (असत्य)
4. तुल्य प्रतिरोध (d): संतुलन का तुल्य प्रतिरोध के न्यूनतम होने से कोई सीधा संबंध नहीं है। (असत्य)
याद रखें: **संतुलन = शांति!**
शांति का मतलब है कि गैल्वेनोमीटर में कोई हलचल (Current) नहीं होगी। अगर करंट नहीं है, तो मतलब दोनों तरफ का 'दबाव' (Potential) बराबर है। बस 'a' और 'b' ही इस शांति को दर्शाते हैं।
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(If the intensity of radiation incident on a photocell be increased four times, then the number of photoelectrons and the energy of photoelectrons emitted respectively become-)
B. दोगुना, अपरिवर्तित (Doubled, remains unchanged)
C. अपरिवर्तित, दोगुना (Remains unchanged, doubled)
D. चार गुना, अपरिवर्तित (Four times, remains unchanged)
व्याख्या (Explanation):
आइंस्टीन के प्रकाश विद्युत समीकरण के अनुसार:
1. इलेक्ट्रॉनों की संख्या: फोटोइलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन की दर सीधे आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) के समानुपाती होती है। यदि तीव्रता चार गुना बढ़ेगी, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी चार गुना बढ़ जाएगी।
2. इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा: उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा केवल आपतित प्रकाश की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करती है, तीव्रता पर नहीं। अतः तीव्रता बदलने से ऊर्जा अपरिवर्तित (Remains unchanged) रहेगी।
याद रखें:
- **तीव्रता** = "भीड़" (ज्यादा फोटॉन = ज्यादा इलेक्ट्रॉन)।
- **आवृत्ति** = "ताकत" (ज्यादा आवृत्ति = ज्यादा ऊर्जा)।
जब तक सिर्फ "भीड़" बढ़ रही है, हर इलेक्ट्रॉन की अपनी "ताकत" (ऊर्जा) वही रहेगी।
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(For the below Assertion [As] and Reason [R], choose the correct alternative-)
(Assertion [As]: In a progressive wave motion, particle velocity is constant at all time.)
कारण [R]: ऐसा इसलिए है क्योंकि माध्यम का घनत्व पूरे माध्यम में एक समान है।
(Reason [R]: This is because density of medium is uniform throughout.)
B. दोनों [As] और [R] सत्य हैं, परंतु [R], [As] का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
C. [As] और [R] दोनों असत्य हैं। (Both [As] and [R] are false.)
D. [As] सत्य है, परंतु [R] असत्य है।
व्याख्या (Explanation):
1. कण का वेग: एक प्रगतिशील तरंग में माध्यम के कण सरल आवर्त गति (SHM) करते हैं। SHM में कण का वेग कभी स्थिर नहीं रहता; यह माध्य स्थिति पर अधिकतम और चरम स्थितियों पर शून्य होता है। अतः [As] गलत है।
2. घनत्व और वेग: माध्यम का घनत्व एक समान होने से "तरंग का वेग" (Wave Velocity) स्थिर हो सकता है, लेकिन इसका "कण के वेग" के स्थिर होने से कोई संबंध नहीं है। अतः [R] भी गलत या अप्रासंगिक है।
याद रखें: **तरंग का वेग** (Wave Velocity) = 'ट्रेन की रफ़्तार' (जो स्थिर हो सकती है)।
**कण का वेग** (Particle Velocity) = 'ट्रेन में बैठे यात्री का डांस' (जो ऊपर-नीचे होता रहता है, कभी रुकता है कभी तेज होता है)।
चूंकि यात्री का डांस स्थिर नहीं है, इसलिए अभिकथन गलत है!
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(Arrange the following circuit elements in increasing order of power dissipation when the same current flows through them-)
(b) शुद्ध संधारित्र (Pure capacitor)
(c) प्रतिरोध (Resistor)
(d) प्रतिरोध के साथ प्रेरकत्व (Inductor with resistance)
B. b → a → c → d
C. c → a → d → b
D. a → c → b → d
व्याख्या (Explanation):
AC परिपथ में औसत शक्ति क्षय $P = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$ होता है:
1. शुद्ध प्रेरकत्व (a) और शुद्ध संधारित्र (b): इनके लिए कलांतर ($\phi$) $90^\circ$ होता है, इसलिए शक्ति क्षय शून्य (Zero) होता है। इन्हें 'वाटहीन' अवयव कहते हैं।
2. प्रतिरोध (c): यहाँ $\phi = 0^\circ$ होता है, इसलिए शक्ति क्षय अधिकतम ($I^2 R$) होता है।
3. प्रतिरोध के साथ प्रेरकत्व (d): इसमें प्रेरकत्व के साथ प्रतिरोध भी जुड़ा है, इसलिए इसमें शुद्ध प्रतिरोध (c) की तुलना में प्रतिबाधा अलग होगी, लेकिन व्यावहारिक रूप से ऊर्जा क्षय केवल प्रतिरोध वाले भाग में ही होगा।
बढ़ता क्रम: (a = b) < c < d (यदि 'd' में प्रतिरोध 'c' से अधिक है)। विकल्पों के अनुसार, चूँकि 'a' और 'b' दोनों शून्य हैं, इसलिए शुरुआत a, b से ही होगी।
याद रखें: **प्रेरक (L) और संधारित्र (C)** 'कंजूस' हैं, ये बिजली खर्च नहीं करते (0 Power)।
**प्रतिरोध (R)** 'खर्चीला' है, ये सारी बिजली गर्मी (Heat) बनाकर उड़ा देता है।
तो क्रम हमेशा 0 से शुरू होकर प्रतिरोध पर खत्म होगा!
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| कालम - I | कालम - II |
|---|---|
| (a) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) | (I) $P = F \cdot v$ |
| (b) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational P.E.) | (II) $K = \frac{1}{2}mv^2$ |
| (c) स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा (P.E. of spring) | (III) $U = mgh$ |
| (d) शक्ति (Power) | (IV) $U = \frac{1}{2}kx^2$ |
B. a-II, b-III, c-IV, d-I
C. a-III, b-IV, c-I, d-II
D. a-IV, b-I, c-II, d-III
व्याख्या (Explanation):
- (a) → (II): गतिज ऊर्जा द्रव्यमान और वेग के वर्ग के गुणनफल का आधा होती है।
- (b) → (III): पृथ्वी की सतह से $h$ ऊँचाई पर गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा $mgh$ होती है।
- (c) → (IV): स्प्रिंग को $x$ दूरी तक खींचने या दबाने पर संचित ऊर्जा $\frac{1}{2}kx^2$ होती है।
- (d) → (I): शक्ति (कार्य करने की दर) बल और वेग के अदिश गुणनफल के बराबर होती है।
याद रखें: **"जिसमें वेग (v) है, उसमें गति (Kinetic) है।"** (a → II)
**"जिसमें ऊँचाई (h) है, उसमें गुरुत्व (Gravity) है।"** (b → III)
बस इन दो को मिलाते ही आपका विकल्प **B** पक्का हो जाता है!
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(Given below are two statements-)
(Statement - I: Biot-Savart’s law gives us the expression for the magnetic field strength of an infinitesimal current element (Idl) of a current carrying conductor.)
कथन - II: बायोट-सावर्ट का नियम कूलॉम के $q$ आवेश के व्युत्क्रम वर्ग नियम के अनुरूप है, जहाँ दोनों में पहला अदिश स्रोत $Idl$ द्वारा उत्पन्न क्षेत्र है और दूसरा सदिश स्रोत $q$ द्वारा उत्पन्न है।
(Statement - II: Biot-Savart’s law is analogous to Coulomb’s inverse square law of charge q, with the former being related to the field produced by a scalar source Idl while the latter being produced by a vector source q.)
B. कथन I और II दोनों गलत हैं। (Both statement I and II are incorrect.)
C. कथन I सही है और कथन II गलत है। (Statement I is correct II is incorrect.)
D. कथन I गलत है और कथन II सही है। (Statement I is incorrect II is correct.)
व्याख्या (Explanation):
1. कथन - I: यह बिल्कुल सही है। बायोट-सावर्ट नियम एक बहुत छोटे धारा तत्व $Idl$ के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र ($dB$) को दर्शाता है।
2. कथन - II: यहाँ एक बड़ी तकनीकी गलती है। बायोट-सावर्ट नियम में स्रोत **$Idl$ एक सदिश (Vector) स्रोत** है, जबकि कूलॉम नियम में **आवेश $q$ एक अदिश (Scalar)** राशि है। कथन में इसे उल्टा लिख दिया गया है (Idl को अदिश और q को सदिश कह दिया गया है)। इसलिए कथन II गलत है।
याद रखें: **आवेश (q)** की कोई दिशा नहीं होती (अदिश), लेकिन **धारा तत्व ($Idl$)** हमेशा एक दिशा में होता है (सदिश)। कथन II ने 'राजा' को 'रंक' और 'रंक' को 'राजा' बना दिया, इसलिए वह गलत हो गया!
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